'पिनव्हील गैलेक्सी' (M101)
ब्रह्मांड असीम रहस्यों और अकल्पनीय सुंदरता से भरा है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) ने एक बार फिर दुनिया को इस सुंदरता का एक अनूठा तोहफा दिया है. नासा ने पृथ्वी से करोड़ों प्रकाश वर्ष दूर स्थित एक विशाल आकाशगंगा, ‘पिनव्हील गैलेक्सी’ (Pinwheel Galaxy) के केंद्र की एक अत्यंत दुर्लभ और खूबसूरत तस्वीर जारी की है. यह तस्वीर न केवल देखने में मनमोहक है, बल्कि विज्ञान की दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण है.
इस अद्भुत दृश्य को कैद करने के लिए नासा के दो सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष टेलिस्कोप – ‘हबल स्पेस टेलिस्कोप’ (Hubble Space Telescope) और ‘जेम्स वेब स्पेस टेलिस्कोप’ (James Webb Space Telescope) ने एक साथ मिलकर काम किया है. हबल टेलिस्कोप, जो दशकों से हमें अंतरिक्ष की तस्वीरें दे रहा है, ने अल्ट्रावॉयलेट (पराबैंगनी), विजिबल (दृश्यमान) और नियर-इन्फ्रारेड (निकट-अवरक्त) डेटा प्रदान किया. वहीं, अत्याधुनिक जेम्स वेब टेलिस्कोप ने अपनी इन्फ्रारेड (अवरक्त) क्षमताओं का उपयोग करके धूल और गैस के घने बादलों के पार झाँका, जहाँ नए तारे जन्म ले रहे हैं. इन दोनों टेलिस्कोप के डेटा को मिलाकर यह समग्र तस्वीर तैयार की गई है, जो गैलेक्सी की चमक और संरचना को बहुत बारीकी से दिखाती है.
खगोलविदों के बीच मेसियर 101 (Messier 101 या M101) के नाम से प्रसिद्ध, यह एक विशाल सर्पिल (स्पाइरल) आकार की आकाशगंगा है. इसका आकार ठीक एक ‘पिनव्हील’ (बच्चों की खेलने वाली कागज़ की चर्खी) जैसा दिखता है, जिसके कारण इसे यह लोकप्रिय नाम मिला है.
इंटरनेट से प्राप्त अन्य वैज्ञानिक स्रोतों के अनुसार, पिनव्हील गैलेक्सी की खोज सबसे पहले 1781 में फ्रांसीसी खगोलशास्त्री पियरे मेचैन (Pierre Méchain) ने की थी, और बाद में इसे चार्ल्स मेसियर ने अपने कैटलॉग में शामिल किया.
पिनव्हील गैलेक्सी हमारे लिए एक विशेष अजूबा है क्योंकि यह पृथ्वी के सापेक्ष बिल्कुल ‘फेस-ऑन’ (Face-on) स्थिति में है. इसका मतलब है कि हम इस गैलेक्सी को सीधे ऊपर से, उसके चेहरे की तरफ से देख सकते हैं, न कि किनारे से. इस वजह से इसके चमकीले केंद्र, सर्पिल भुजाओं (spiral arms) और तारों के निर्माण वाले क्षेत्रों (star-forming regions) को अत्यंत स्पष्ट रूप से देखा और अध्ययन किया जा सकता है. यह पृथ्वी के सबसे करीब की ‘फेस-ऑन’ सर्पिल गैलेक्सिज में से एक है.
इस आकाशगंगा का पैमाना अकल्पनीय है. यह पृथ्वी से लगभग 25 मिलियन (2.5 करोड़) प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है. इसका मतलब है कि हम इस तस्वीर में जो प्रकाश देख रहे हैं, वह 2.5 करोड़ साल पहले वहाँ से चला था. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि पिनव्हील गैलेक्सी में कम से कम एक ट्रिलियन (1000 अरब) तारे मौजूद हैं. तुलना के लिए, हमारी अपनी मिल्की वे आकाशगंगा में लगभग 100 से 400 अरब तारे हैं. इसका व्यास लगभग 170,000 प्रकाश वर्ष है, जो मिल्की वे से लगभग दोगुना बड़ा है.
नासा द्वारा जारी की गई नई तस्वीर में गैलेक्सी का केंद्र एक अत्यंत चमकदार, सफेद-पीले रंग के गोले के रूप में दिखाई दे रहा है. इस केंद्र से बाहर की ओर निकलती हुई घुमावदार सर्पिल भुजाएं साफ नजर आती हैं. इन भुजाओं में नारंगी और भूरे रंग के धूल के जटिल फिलामेंट्स (धागेनुमा संरचनाएं) फैले हुए हैं. इनके बीच-बीच में चमकीले गुलाबी और लाल रंग के धब्बे दिख रहे हैं, जो विशाल गैस के बादल हैं जहां नए तारे लगातार जन्म ले रहे हैं (नेबुला). तस्वीर का बैकग्राउंड नीला-ग्रे है, जो अनगिनत दूरस्थ तारों और अन्य आकाशगंगाओं से भरा हुआ है.
पिनव्हील गैलेक्सी उत्तरी गोलार्ध के आकाश में ‘उरसा मेजर’ (Ursa Major) तारामंडल में स्थित है, जिसे हम आम तौर पर ‘सप्तर्षि मंडल’ या ‘बिग डिपर’ (Big Dipper) के नाम से जानते हैं. वैज्ञानिक इस गैलेक्सी का अध्ययन बहुत रुचि से करते हैं क्योंकि यह तारों के जन्म और विकास, आकाशगंगाओं की संरचना और उनके रासायनिक विकास को समझने के लिए एक आदर्श प्रयोगशाला है.
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