साइंस

धरती पर लौटे शुभांशु शुक्ला, कैलिफोर्निया तट पर समंदर में हुई सुरक्षित लैंडिंग

Shubhanshu Shukla Earth Return: भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आखिरकार 18 दिन बाद अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सुरक्षित धरती पर वापस आ गए हैं. उनकी यह यात्रा एक्सिओम मिशन 4 (Ax-4) का हिस्सा थी. जिसमें उन्‍होंने अंतरिक्ष में कई तरह के अनुसंधान किए और स्पेसशिप के जरिए रोजाना हजारों किलोमीटर का सफर किया.

उन्‍होंने पिछले महीने 25 जून 2025 को फाल्कन 9 रॉकेट से अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी थी और 26 जून को ISS पर पहुंच गए थे. वहां वह अपने साथी एस्‍ट्रोनॉट्स के साथ 18 दिन रहे. उन्‍हें 10 जुलाई को धरती पर वापस आना था, लेकिन कुछ वजहों से वापसी में देरी हो गई.

कैलिफोर्निया तट पर हुई शुभांशु की लैंडिंग

आज स्पेसएक्स के ग्रेस यान के साथ अमेरिका के कैलिफोर्निया तट के पास प्रशांत महासागर में ड्रैगन कैप्सूल की लैंडिंग ने भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक सुनहरा अध्याय जोड़ा. इसी ड्रैगन कैप्सूल में शुभांशु की अंतरिक्ष से धरती पर सकुशल वापसी हुई है. उनकी वापसी पर उनके गृहनगर लखनऊ में खुशी की लहर दौड़ गई.

यहां तस्‍वीर में आप देख सकते हैं कि शुभांशु कैसे एक स्‍पेसक्राफ्ट के कैप्सूल के जरिए धरती पर उतरे.

अंतरिक्ष में शुभांशु ने हासिल की उपलब्धियां

इसरो से मिली जानकारी के मुताबिक, शुभांशु ने 18 दिन के अपने स्‍पेस मिशन के दौरान ISS पर 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग किए. इनमें मांसपेशियों की हानि, मानसिक स्वास्थ्य, और अंतरिक्ष में फसल उगाने जैसे महत्वपूर्ण शोध शामिल थे. उनकी मेहनत ने भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान को नई ऊंचाइयां दी हैं.

फोटो: शुभांशु ने 25 जून 2025 को फाल्कन 9 रॉकेट से उड़ान भरी थी और 26 जून को वे ISS से जुड़े.

वापसी: प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन हुआ

14 जुलाई 2025 की शाम 4:45 बजे IST, ग्रेस यान ISS से अलग हुआ और पृथ्वी की ओर बढ़ा. डीऑर्बिट बर्न के जरिए यान ने अपनी गति कम की. वायुमंडल में प्रवेश के दौरान 27,000 किमी/घंटा की रफ्तार से तापमान 1,600°C तक पहुंचा, जिसे हीट शील्ड ने सहन किया. इसके बाद पैराशूट खुलने से यह धीमा हुआ और अंततः प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन हुआ.

अंतरिक्ष से इस तरह पैराशूट्स के जरिए शुभांशु के प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन हुआ.

10 दिन तक आइसोलेशन में रहेंगे शुभांशु

लैंडिंग के बाद शुभांशु को 10 दिन के आइसोलेशन में रखा जाएगा, जिसके बाद वे सामान्य जीवन में लौटेंगे. उनकी यह यात्रा न केवल वैज्ञानिक उपलब्धि है, बल्कि युवाओं के लिए प्रेरणा भी है. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए यह गर्व का क्षण है, जो दर्शाता है कि भारतीय वैज्ञानिक और अंतरिक्ष यात्री वैश्विक मंच पर अपनी छाप छोड़ रहे हैं.

यह भी पढ़िए: ‘मेथी और मूंग के बीज उगाए…हड्डियों की हेल्थ पर किए प्रयोग’, जानें 17 दिनों में शुभांशु शुक्ला ने ISS पर क्या-क्या किया?

Shailendra Verma

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