Parshuram And Ravana: हिंदू ग्रंथों में ईश्वरीय लीलाओं का वर्णन अथाह सागर की तरह है. सृष्टि के चार युगों- सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग- में हुई घटनाएं मानव की समझ से परे हैं. फिर भी, ग्रंथों में भगवान के अवतारों की कथाएं सरलता से वर्णित हैं. त्रेता युग में भगवान विष्णु के अंश से ऋषि जमदग्नि और रेणुका के पुत्र के रूप में परशुराम का जन्म हुआ. वे युगों तक जीवित रहे और कहा जाता है कि उनका वास त्रेता, द्वापर के बाद कलयुग में भी है.
परशुराम के जन्म से लेकर पृथ्वी पर अधर्मी क्षत्रियों के संहार तक की कथाएं प्रचलित हैं. कुछ कथाएं लंकापति रावण से भी जुड़ी हैं. बी.आर. चोपड़ा के टीवी धारावाहिक के अनुसार, रावण और परशुराम (Parshuram And Ravana) की मुलाकात हुई थी. रावण बुराई का प्रतीक था, जिसने त्रिलोक में हाहाकार मचाया, जबकि परशुराम विष्णु के छठे अवतार थे. फिर भी, दोनों के बीच कभी युद्ध नहीं हुआ.
ग्रंथों के अनुसार, रावण परशुराम से हजारों वर्ष पहले जन्मा था. दोनों महादेव के परम भक्त थे. रावण को एक बार सहस्रबाहु कार्तवीर्यार्जुन ने बंदी बनाया था. कार्तवीर्यार्जुन ने परशुराम के पिता जमदग्नि की हत्या भी की थी. उस समय युवा परशुराम ने अकेले ही कार्तवीर्यार्जुन और उसकी सेना को नष्ट कर दिया. इसके बाद भी उन्होंने उस कुल के योद्धाओं का बार-बार संहार किया.
इसके कई कारण पुराणों में मिलते हैं:
रावण परशुराम से आयु में बड़ा था, लेकिन दोनों के बीच युद्ध नहीं हुआ क्योंकि रावण का अंत राम के हाथों लिखा था. परशुराम और रावण की मुलाकात और उनके संबंध ईश्वरीय लीला का हिस्सा थे, जो ग्रंथों में स्पष्ट हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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