Ritu Divya
Pashupatinath Mandir: भगवान शिव जिनको न केवल संहारक के रुप में जाना जाता है बल्कि करुणा और मोक्ष का दाता भी माना जाता है. नेपाल स्थित पशुपतिनाथ मंदिर इन्हीं भगवान शिव का एक दिव्य धामों में से एक है,जो 12 ज्योतिर्लिंगों जैसा ही महत्व रखने वाला तीर्थस्थल माना जाता है.
नेपाल में एक धार्मिक स्थल जहां शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है, पशुपतिनाथ मंदिर जो कि काठमांडू में बागमती नदी के तट पर स्थित है. पुराणों और वेदों में मिलने वाला इस मंदिर की महिमा भगवान शिव के सबसे पवित्र और महत्वपूर्ण स्थलों में से एक माना जाता है जहां मृत्यु भी मोक्ष का मार्ग बन जाती है. आइए, जानते हैं कि पशुपतिनाथ मंदिर क्यों इतना खास है, इसकी क्या खासियत है.
पशुपतिनाथ मंदिर का इतिहास रहस्यमयी और बेहद प्राचीन है. इसके सही निर्माण की तिथि आज तक रहस्य बनी हुई है, हालांकि मान्यता है कि इसका निर्माण 5वीं शताब्दी में लिच्छवी वंश के राजा प्रचंड देव ने करवाया था. समय-समय पर इस दिव्य धाम का पुनर्निर्माण और जीर्णोद्धार होता रहा. मंदिर से जुड़ी एक रोचक कथा भी है, कहा जाता है कि भगवान शिव एक बार हिरण का रूप धारण कर यहां आए और यहीं भ्रमण करने लगे.
देवताओं ने जब उन्हें कैलाश लौटने के लिए मनाया तो वे तैयार नहीं हुए. इसी बीच उनका एक सींग टूट गया, जो शिवलिंग के रूप में स्थापित हो गया. तभी से यहां शिव ‘पशुपति’ यानी ‘जानवरों के स्वामी’ कहलाए. आज भी इस मंदिर में चार मुखों वाला शिवलिंग स्थापित है, जिसका ऊपरी भाग पांचवां मुख दर्शाता है, और इसे उसी दिव्य रूप में पूजा जाता है.
नेपाली पैगोडा शैली में बनी पशुपतिनाथ मंदिर की शिल्पकारी इसको आकर्षक बनाती है. इस चतुर्मुखी शिव मंदिर का मुख्य शिखर सोने से ढका हुआ है और इसके चार द्वार चांदी से बने हैं. भगवान शिव के विभिन्न रूपों का प्रतिनिधित्व करते इस चतुर्मुखी शिवलिंग का चारों मुख अलग-अलग दिशाओं में है जो कि मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है. चतुर्मुखी शिवलिंग के अलावा विभिन्न देवी-देवताओं को समर्पित छोटे-बड़े मंदिर और मूर्तियां इस मंदिर परिसर में स्थापित है.
पशुपतिनाथ मंदिर को सिर्फ पूजा और आस्था का केंद्र ही नहीं, बल्कि इसे ‘मृत्यु का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है. यहां मृत्यु को अंत नहीं, बल्कि मोक्ष की ओर बढ़ने वाली एक पवित्र यात्रा माना जाता है. मंदिर के पास बहती बागमती नदी के तट पर स्थित आर्य घाट वह स्थान है, जहां अंतिम संस्कार के बाद आत्मा को जीवन के चर्क से मुक्ति मिलती है.
मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार होने से व्यक्ति सीधा मोक्ष प्राप्त करता है. इतना ही नहीं, विश्वास है कि जो भक्त जीवन के अंतिम क्षणों में पशुपतिनाथ के दर्शन करता है, उसे मृत्यु के बाद शांति और मुक्ति मिलती है. यही कारण है कि कई लोग अपने अंतिम दिनों में इस धाम आते हैं, ताकि उनका अंत शांति से भरा रहे.
पशुपतिनाथ मंदिर केवल मृत्यु का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह जीवन के हर रंग और पहलू से जुड़ा एक पवित्र केंद्र है. हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन और आशीर्वाद पाने आते हैं. महाशिवरात्रि, बाला चतुर्दशी और तीज जैसे पर्वों पर यह मंदिर श्रद्धा और भक्ति में डूब जाता है,खासकर महाशिवरात्रि के दिन, नेपाल ही नहीं, बल्कि भारत और दुनिया के कोने-कोने से भक्त यहां अपने मन की शांति और आशीर्वाद पाने के लिए पहुंचते हैं.विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान यहां की भव्यता को और भी अद्वितीय बना देते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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