UP Budget 2026: उत्तर प्रदेश विधानसभा में जब बजट पेश किया जाता है, तो लोगों के जहन में बड़ें आंकड़, योजनाए और करोड़ों के खर्चों का हिसाब ही आता है. लेकिन इस बार साल 2026 के भाषण में एक अलग अंदाज देखने को मिला. यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने जब सदन में अपनी फाइल खोली, तो उन्होंने सिर्फ राज्य की तिजोरी का लेखा-जोखा ही नहीं रखा, बल्कि अपने शब्दों से सदन में एक अलग ही समां बांध दिया.
बजट सत्र के दौरान सुरेश खन्ना ने बीच-बीच में 4 ऐसी शायरियां पढ़ीं, जिन्होंने न सिर्प सत्ता पक्ष को मेज थपथपाने पर मजबूर कर दिया, बल्कि विपक्ष और आम जनता का ध्यान भी अपनी ओर खींचा. चलिए जानते हैं उन शायरियों के पीछे का संदेश बजट में की गई किन बातों से किस तरह से जुड़ा था.
बजट सत्र के दौरान भाषण की शुरुआत में जब विकास कार्यों का जिक्र हुआ, तो वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उन सभी लोगों को सलाम किया जो जमीन पर रहकर प्रदेश को बदल रहे हैं. उन्होंने कहा- “सितारा बनकर आसमां में वही चमकते हैं, डुबो देते हैं, जो अपने आप को पसीने में.”
इस शेर के जरिए उन्होंने साफ संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश आज जिस मुकाम पर है, उसके पीछे कड़ी मेहनत और पसीना बहाने वाले लोगों का हाथ है. उनकी ये शायरी सरकार के काम करने के जज्बे को दिखाने की कोशिश भी थी.
विपक्ष की टोका-टाकी और बदलते परिवेश को देखते हुए उन्होंने एक बेहद सटीक शेर पढ़ा-
इतना ही नहीं किसी भी बजट सत्र के दौरान विपक्ष की टोका-टाकी न हो ऐसा तो हो नहीं सकता, तो इसी रोक-टोक को देखते हुए उन्होंने एक और शायरी पेश कर दी. उन्होंने कहा- “ये बात अलग है कि तुम ना बदलो मगर जमाना बदल रहा है गुलाब पत्थर पर खिल रहा है. चिराग आंधी में जल रहा है.”
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने इस शेर में ‘गुलाब का पत्थर पर खिलना’ सीधे तौर पर उस मुश्किल परिस्थिति की तरफ इशारा था जिनमें सरकार ने विकास को मुमकिन बनाया है. साथ ही ये उन लोगों पर तंज भी था जो बदलाव को अपनाने में अभी भी वक्त लगा रहे हैं.
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जब बात कल्याणकारी योजनाओं और प्रदेश के पिछड़े इलाकों की आई, तो खन्ना साहब थोड़े भावुक नजर आए और बोले- “यही जुनून, यही ख्वाब मेरा है. दिया जला के रोशनी कर दूं जहां अंधेरा है.”
ये पंक्तियां सरकार के उस विजन के लिए थीं जिसमें अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मदद पहुंचाने का वादा किया गया है.
बजट सत्र में अपने भाषण के आखिरी पड़ाव पर उन्होंने जीवन और समय की अहमियत को समझाते हुए एक गहरी बात कही- “बड़ी मुश्किल से कोई सुबह मुस्कुराती है, और गम हर शाम दबे पांव चली आती है, कि वक्त लगता ही नहीं जिंदगी बदलने में, पर बदलने में वक्त को पूरी जिंदगी लग जाती है…”
इस शेर ने सदन में मौजूद हर शख्स को सोचने पर मजबूर कर दिया. ये हकीकत है कि एक झटके में सब कुछ नहीं बदलता, एक बेहतर कल के लिए पूरी जिंदगी का संघर्ष लगता है.
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-भारत एक्सप्रेस
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