पाकिस्तान बांग्लादेश संबंध
Pakistan Bangladesh Relations: भारत के दो पड़ोसी बांग्लादेश और पाकिस्तान हिंदुस्तान से दुश्मनी में इतने अंधे हो गए हैं कि कोई अपने कंगाली भूल जा रहा है तो किसी को अपने स्वाभिमान की भी कोई फिक्र नहीं है. ‘गरीबी में आटा गीला’ वाली कहावत तो आपने सुनी ही होगी. यही हाल इन दिनों पाकिस्तान का है. एक उसके सबसे बड़े शहर कराची में लोग 50-50 घंटे की बिजली कटौती से परेशान. इसके विरोध में लोग सड़कों पर उतर आए हैं. दूसरी तरफ यही कंगाल पाकिस्तान पड़ोसी देश बांग्लादेश में पैसे उड़ाने के वादे कर रहा है. जिस पाकिस्तान ने 1971 में बांग्लादेश में नरसंहार किया था, आज उसी से दोस्ती का हाथ बढ़ाया जा रहा है.
पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच संबंधों (Pakistan Bangladesh Relations) में एक नया मोड़ आया है. दोनों देशों ने शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में संबंधों को मजबूत करने के लिए पाकिस्तान-बांग्लादेश नॉलेज कॉरिडोर (Pakistan Bangladesh MoU) की शुरुआत की है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया पर यह जानकारी दी है.
पाकिस्तान ने बांग्लादेश के छात्रों को हायर एजुकेशन के लिए स्कॉलरशिप देने का वादा किया है. इसके अलावा, बांग्लादेश के प्रशासनिक अधिकारियों के लिए ट्रेनिंग का भी इंतजाम किया जाएगा. यह समझौता दोनों देशों के बीच शिक्षा और व्यवसाय के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया है.
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इशाक डार की बांग्लादेश यात्रा से पहले एक बार फिर 1971 के युद्ध (Pakistan Bangladesh 1971 War) को लेकर माफी का मुद्दा उठा था. हालांकि, यह मुद्दा धरा का धरा रह गया. 1971 में पाकिस्तानी सेना के अत्याचार से हजारों बांग्लादेशी मारे गए थे. ढाका के विदेश मामलों के सलाहकार मोहम्मद तौहीद हुसैन ने कहा कि यह मुद्दा अनसुलझा रह गया है, लेकिन दोनों देश संबंधों को मजबूत करने पर सहमत हुए हैं. पहले बांग्लादेश इस मामले में मांफी की मांग कर रहा था.
पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बहुत खराब है. कराची में 50 घंटे की बिजली कटौती के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. लोगों का कहना है कि बिजली न होने से उनकी परेशानी बढ़ गई है. पाकिस्तान में बारिश से संबंधित 700 से ज्यादा मौतें हुई हैं. इस बीच अपने घर के हालात सुधारे की जगह पाकिस्तान, भारत के खिलाफ बांग्लादेश के साथ खिचड़ी पकाने में लगा है.
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पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच बढ़ती इस करीबी (Pakistan Bangladesh Ties) को भारत सरकार गंभीरता से लेना चाहिए. हालांकि, पाकिस्तान की मौजूदा आर्थिक और सामाजिक हालत को देखते हुए, बांग्लादेश को शिक्षा या अन्य मामलों में मदद करने का उसका दावा एक मजाक जैसा लगता है. कराची में बिजली और पानी के लिए चल रहा संघर्ष दिखाता है कि पाकिस्तान खुद अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम नहीं है. ऐसे में, यह देखना दिलचस्प होगा कि वह बांग्लादेश को दिए गए अपने वादों को कैसे पूरा करता है.
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