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बासमती ने कर दी पाकिस्तान की चांदी, अपनों ने मोड़ा भारत से मुंह

India-Pakistan Basmati Rice: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए टैरिफ के कारण भारत के कई सेक्टर प्रभावित हो रहे हैं. इसमें बासमती का एक्सपोर्ट भी शामिल है. सबसे बड़ी बात यह कि भारतियों की फर्म भी पाकिस्तान से चावल खरीद रही हैं.

India-Pakistan Basmati Rice

बासमती चावल का निर्यात

India-Pakistan Basmati Rice: पिछले कुछ दिनों से डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के खिलाफ कई कदम उठाए हैं. वह लगातार भारतीय सामानों पर टैरिफ बढ़ा रहे हैं. इसका असर भारत के बाजार के साथ प्रोडक्शन और निर्यात पर भी पड़ रहा है. सबसे खास और बड़ी बात की इन हालातों में विदेशों में व्यापार कर रही भारत की फर्म या फिर भारतीयों द्वारा चलाई जा रही फर्मों ने भी मुंह मोड़ लिया है. इसका अच्छा खासा फायदा पाकिस्तान को हो रहा है. कुल मिलाकर भारत पर लगे टैरिफ के कारण पाकिस्तान का एक्सपोर्ट बढ़ गया है और इसमें भारतीयों का भी हाथ है.

भारत का अमेरिका को बासमती चावल का निर्यात मौजूदा वित्त वर्ष के अप्रैल-जुलाई के दौरान करीब 13% घट गया है. व्यापार सूत्रों के अनुसार, पिछले साल जहां इस अवधि में 90,000 टन से ज्यादा चावल भेजा गया था, वहीं इस साल यह घटकर लगभग 78,000 टन रह गया.

भारत का बासममती निर्यात

  • 2024-25 में भारत ने अमेरिका को 2,74,213 टन बासमती निर्यात किया था.
  • भारत का निर्यात कुल 60.7 लाख टन यानी करीब 4.5% था.
  • बासमती चावल भारत के कुल चावल निर्यात का 30% है.
  • सबसे ज्यादा सऊदी अरब 11.7 लाख टन यानी 1.12 अरब डॉलर को निर्यात होता है.
  • इराक और ईरान ने मिलकर 17.6 लाख टन यानी करीब 1.6 अरब डॉलर का चावल भेजा जाता है.

भारतीय व्यापारियों की भूमिका

इस बीच, कुछ भारतीय कंपनियों ने पाकिस्तान से बासमती चावल खरीदकर यूरोप और अन्य देशों में भेजा है, जो प्रतिबंध के बावजूद हुआ है. ग्लोबल एक्सपोर्ट-इंपोर्ट डेटा के मुताबिक, इन कंपनियों ने 14,300 टन बासमती चावल पाकिस्तान से मंगवाकर यूरोप और अन्य देशों में भेजा.

नैतिक और राष्ट्रीय हित

यह मुद्दा सिर्फ व्यापार का नहीं, बल्कि नैतिक और राष्ट्रीय हित से भी जुड़ा है, क्योंकि इन कंपनियों ने पाकिस्तान को सात साल में विदेशी मुद्रा में करोड़ों डॉलर कमाने का मौका दिया है. खासकर, जब 2023 में भारत ने बासमती पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) लगाया, तब पाकिस्तान से इनकी खरीद तीन गुना बढ़ गई. भारत-चीन संबंधों में हालिया नरमी के बाद निर्यातक चीन को एक संभावित बड़ा बाजार मान रहे हैं.

  • APEDA के अनुसार पिछले 10 साल में भारतीयों की विदेशी फर्मों ने पाकिस्तान से 2.5 अरब डॉलर से ज्यादा का बासमती खरीदा है.
  • 2023 में भारत ने बासमती पर न्यूनतम निर्यात मूल्य (MEP) लगाया तब से पाकिस्तान से इनकी खरीद तीन गुना बढ़ गई.
  • 1965 के युद्ध के बाद टाटा, बिड़ला, सिप्ला और कई भारतीय बैंकों ने पाकिस्तान से रिश्ता तोड़ लिया था.
  • 2016 की उरी घटना और 2025 के पहलगाम हमले के बाद भी कुछ कंपनियां पाकिस्तान से खरीद कर रही हैं.

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अमेरिकी शुल्क में वृद्धि

अगस्त में गिरावट और तेज हो सकती है, क्योंकि इसी महीने की शुरुआत में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने बासमती पर अतिरिक्त शुल्क लगा दिया है. 27 अगस्त के बाद यह शुल्क 25% से बढ़कर 50% हो जाएगा. इससे भारत के लिए अमेरिका में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखना मुश्किल होगा, जबकि पाकिस्तान पर सिर्फ 19% शुल्क है. भारत को अपने बासमती चावल के निर्यात को बनाए रखने के लिए नए बाजारों की तलाश करनी होगी और साथ ही साथ व्यापारिक नीतियों में भी बदलाव करना होगा.



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