तमिलनाडु की राजनीति में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधनों की जटिल पहेली बनी हुई है. भाजपा के कद्दावर नेता और गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में राज्य का दौरा किया, जहां उन्होंने एनडीए (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) को मजबूत करने और द्रमुक (द्रविड़ मुनेत्र कड़गम) के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाने पर जोर दिया. मोदी-शाह जोड़ी के लिए तमिलनाडु अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है, जहां भाजपा का वोट बैंक सीमित है और क्षेत्रीय दलों पर निर्भरता ज्यादा है.
शाह का दौरा दिसंबर 2025 के अंत या जनवरी 2026 की शुरुआत में हुआ, जिसमें उन्होंने भाजपा नेताओं, एनडीए सहयोगियों से मुलाकात की और पुदुकोट्टई में एक राज्यव्यापी यात्रा के समापन समारोह में भाग लिया. उनका फोकस एनडीए को मजबूत करने, भाजपा-अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) गठबंधन को मजबूत करने और अन्य दलों को शामिल करने पर था.
भाजपा ने 2025 में एआईएडीएमके के साथ फिर से गठबंधन किया, जिसमें एडाप्पादी के. पलानीसामी (ईपीएस) को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया. हालांकि, इस गठबंधन के लिए भाजपा को कीमत चुकानी पड़ी—पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई को हटाना पड़ा, जो द्रमुक के मुखर आलोचक थे और पार्टी में मजबूत छवि रखते थे. अन्नामलाई की जगह नैनार नागेंद्रन को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया.
भाजपा अब एक बड़ा गठबंधन बनाने की कोशिश में है, जिसमें शामिल हों:
2024 लोकसभा चुनाव के बाद एनडीए टूटा था, लेकिन एआईएडीएमके वापस लौट आई. फिर भी, अंदरूनी कलह बनी हुई है. पलानीसामी ने हाल में जिला अध्यक्षों की बैठक बुलाई, जहां बूथ स्तर की कमजोरी और भाजपा से तालमेल न बनाने पर फटकार लगाई, लेकिन आश्वासन नहीं मिला.
सत्तारूढ़ द्रमुक मजबूत गठबंधन के साथ है, लेकिन सहयोगियों से ज्यादा सीटों और सत्ता में हिस्सेदारी की मांग का दबाव झेल रही है. कांग्रेस ने 38 सीटों पर दावा ठोका है (2021 में 25 मिली थीं), साथ ही सत्ता में हिस्सा मांगा है. वीसीके (विदुतलाई चिरुथैगल कट्ची) और अन्य छोटे दल भी इसी तरह की मांग कर रहे हैं.
हालिया विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) में 97.37 लाख वोटरों के नाम कटे, जिससे द्रमुक और एआईएडीएमके दोनों में हलचल मची. चेन्नई में अकेले 14.25 लाख नाम हटे.
अभिनेता विजय की तमिलगा वेट्री कड़गम (टीवीके) ने स्थिति और जटिल कर दी है. सर्वेक्षणों में स्टालिन सबसे पसंदीदा मुख्यमंत्री हैं, लेकिन विजय दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं, जबकि पलानीसामी तीसरे पर फिसल गए. टीवीके ने द्रमुक के वोट बैंक में सेंध लगाई है, खासकर युवाओं और शहरी इलाकों में. कुछ सर्वे में टीवीके को 30%+ वोट शेयर का अनुमान है.
तमिलनाडु की राजनीति में गठबंधन, जातीय समीकरण और नए खिलाड़ी (टीवीके) निर्णायक होंगे. द्रमुक अभी मजबूत दिख रही है, लेकिन विपक्षी एकता और वोटर लिस्ट बदलाव स्थिति को रोचक बना रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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