ब्लॉग

चाबहार: हॉर्मुज के ‘चोकपॉइंट’ का काट, क्या भारत ने ईरान के साथ रणनीतिक जोखिम लेने में की देरी?

भारत की विदेश नीति हमेशा रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy) पर आधारित रही है, लेकिन ईरान के साथ उसके संबंध अमेरिकी प्रतिबंधों की छाया में बंधे रहे. उपयोगकर्ता द्वारा प्रस्तुत बिंदु सही दिशा में इशारा करता है- यदि भारत ने ईरानी तेल खरीद पर लगे प्रतिबंधों का पालन न किया होता, चाबहार बंदरगाह से जुड़े प्रतिबंधों को न माना होता, ईरान में रेल और सड़क इंफ्रास्ट्रक्चर का व्यापक निर्माण किया होता, और बंदर अब्बास के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) को सीमित न रखा होता, तो आज भारत के पास एक मजबूत, बहु-मोडल कनेक्टिविटी नेटवर्क होता जो स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे संवेदनशील चोकपॉइंट को काफी हद तक दरकिनार कर सकता था.

वर्तमान वास्तविकता और सीमाएं

आज चाबहार और ग्वादर बंदरगाह केवल 72 किमी की दूरी पर स्थित हैं. चाबहार भारत के लिए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का महत्वपूर्ण विकल्प है, जो पाकिस्तान को बायपास करता है. लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों (खासकर IFCA के तहत) ने बार-बार भारत की भागीदारी को प्रभावित किया. भारत को समय-समय पर सैंक्शंस वेवर मिले, लेकिन वे अस्थायी और शर्तों से बंधे रहे. इससे प्रोजेक्ट्स की गति धीमी पड़ी, फाइनेंसिंग प्रभावित हुई और पूर्ण क्षमता का विकास नहीं हो सका.

INSTC

India-Iran-Russia का 7,200 किमी लंबा मल्टी-मोडल कॉरिडोर) मुख्य रूप से बंदर अब्बास (Strait of Hormuz पर स्थित, ईरान का सबसे बड़ा पोर्ट जो 85% समुद्री व्यापार हैंडल करता है) से जुड़ा है. चाबहार को INSTC के साथ पूरी तरह एकीकृत करने की योजनाएं सीमित रहीं. बंदर अब्बास की क्षमता भीड़भाड़ वाली है और बड़े जहाजों (100,000 टन से अधिक) को हैंडल करने में सीमित.

भारत की ऊर्जा सुरक्षा अभी भी हॉर्मुज स्ट्रेट पर निर्भर है. दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऑयल चोकपॉइंट, जहां से खाड़ी देशों का बड़ा हिस्सा तेल निर्यात होता है. कोई भी तनाव (जैसा कि हाल के वर्षों में देखा गया) शिपिंग, कीमतों और सप्लाई चेन को प्रभावित करता है.

क्या होता अगर भारत प्रतिबंधों की अनदेखी करता?

यदि भारत ने 2010 के दशक से ही पूर्ण रणनीतिक साहस दिखाया होता:

1. ईरानी तेल खरीद बिना रुकावट : भारत ईरान का दूसरा सबसे बड़ा तेल खरीदार रहा है. प्रतिबंध न मानने पर निरंतर, सस्ता और बड़ा आयात संभव होता. इससे फॉरेन एक्सचेंज बचत और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होती. बदले में ईरान के साथ बार्टर या वैकल्पिक पेमेंट सिस्टम (रुपया-रियाल) और मजबूत हो जाता.

2. चाबहार पर पूर्ण निवेश बिना सैंक्शंस के डर: चाबहार को केवल शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल तक सीमित न रखकर, पूर्ण डीप-सी पोर्ट क्षमता (2.5 मिलियन टन से बढ़ाकर 12.5 मिलियन टन या अधिक) विकसित किया जाता. भारत ने पहले ही $500 मिलियन+ का वादा किया था; बिना वेवर की चिंता के यह तेजी से पूरा होता. चाबहार Gulf of Oman पर स्थित है, जो हॉर्मुज से बाहर है- यानी जहाज सीधे भारतीय महासागर से आ-जा सकते हैं.

3. ईरान में रेल-रोड इंफ्रास्ट्रक्चर का भारी निर्माण:

  • चाबहार-जाहेदान रेल लाइन (जो पहले से आंशिक रूप से विकसित है) को पूर्ण गति से पूरा करना.
  • चाबहार को ईरान के राष्ट्रीय रेल नेटवर्क (मशहद, बिरजंद, तेहरान आदि) से जोड़ना.
  • सड़क नेटवर्क का विस्तार, लॉजिस्टिक्स हब और ड्राई पोर्ट्स का विकास.
  • इससे चाबहार अफगानिस्तान (जैसा कि पहले गेहूं शिपमेंट्स में हुआ), मध्य एशिया (तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान आदि) और आगे रूस/यूरोप तक सीधा लैंड-सी लिंक बन जाता.

4. INSTC को बंदर अब्बास तक सीमित न रखकर चाबहार को मुख्य हब बनाना: INSTC का पूर्वी रूट (Eastern Corridor) पहले से ही चाबहार/बंदर अब्बास को मध्य एशिया से जोड़ने की क्षमता रखता है. यदि भारत ने चाबहार को INSTC का प्राथमिक दक्षिणी टर्मिनल बना दिया होता, तो माल ढुलाई का समय और लागत काफी कम हो जाती. चाबहार बड़े कंटेनर जहाजों को हैंडल कर सकता है, जबकि बंदर अब्बास भीड़भाड़ वाला है.

परिणामी कनेक्टिविटी

हॉर्मुज बायपास: चाबहार के माध्यम से माल और (सीमित स्तर पर) ऊर्जा उत्पादों का परिवहन हॉर्मुज स्ट्रेट से स्वतंत्र हो जाता. जहाज Gulf of Oman से सीधे चाबहार आते, फिर रेल/रोड से उत्तर की ओर जाते.

मध्य एशिया और रूस तक तेज पहुंच: INSTC के साथ मिलकर यह सुएज कैनाल का विकल्प भी बन सकता था.

रणनीतिक संतुलन: Gwadar (CPEC का हिस्सा, चीन समर्थित) के ठीक बगल में चाबहार का मजबूत विकास भारत को क्षेत्रीय प्रभाव संतुलित करने में मदद करता.

आर्थिक लाभ: सस्ता तेल, तेज ट्रांजिट टाइम, कम लॉजिस्टिक्स लागत, अफगानिस्तान-मध्य एशिया में बढ़ा बाजार पहुंच.

वास्तविक चुनौतियां

अमेरिकी प्रतिबंधों का दबाव : पूर्ण अनदेखी से SWIFT जैसी अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, फाइनेंसिंग और टेक्नोलॉजी एक्सेस प्रभावित होती. भारत की अर्थव्यवस्था अमेरिका और पश्चिमी प्रणाली से गहराई से जुड़ी है.

ईरान की आंतरिक स्थिति: ईरान में भी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में देरी, भ्रष्टाचार और क्षमता की कमी रही है.

क्षेत्रीय भू-राजनीति: पाकिस्तान-चीन गठजोड़, अफगानिस्तान में तालिबान शासन और हाल के संघर्षों (जैसे हॉर्मुज तनाव) ने स्थिति को और जटिल किया.

तकनीकी सीमाएं: बड़े पैमाने पर तेल/गैस पाइपलाइन या बुल्क एनर्जी को चाबहार-लैंड रूट से हॉर्मुज बायपास करना आसान नहीं- मुख्य रूप से यह कंटेनर, जनरल कार्गो और कुछ हद तक ऊर्जा उत्पादों के लिए उपयुक्त होता.

सबक और आगे का रास्ता

यदि भारत ने प्रतिबंधों की अनदेखी कर ईरान के साथ गहरे इंफ्रास्ट्रक्चर साझेदारी का रिस्क लिया होता, तो आज उसके पास चाबहार-केंद्रित एक मजबूत नेटवर्क होता जो हॉर्मुज की असुरक्षा को काफी कम कर देता. यह न केवल ऊर्जा सुरक्षा बल्कि मध्य एशिया में आर्थिक और कूटनीतिक प्रभाव बढ़ाता.

हालांकि, वास्तविक दुनिया में राष्ट्रीय हितों का संतुलन (US, QUAD, आर्थिक स्थिरता vs. लॉन्ग-टर्म कनेक्टिविटी) जटिल है. चाबहार अभी भी भारत की ‘Look North’ और ‘Act East’ नीति का महत्वपूर्ण स्तंभ है. भविष्य में, यदि भू-राजनीतिक परिस्थितियां अनुकूल हों, तो INSTC और चाबहार को पूर्ण क्षमता तक ले जाना भारत की रणनीतिक प्राथमिकता होना चाहिए, क्योंकि क्षेत्रीय कनेक्टिविटी केवल बंदरगाह नहीं, बल्कि राष्ट्रीय शक्ति का विस्तार है.

बड़े रणनीतिक निर्णय अक्सर तात्कालिक दबावों से ऊपर उठकर लिए जाते हैं. भारत को अपनी स्वायत्तता को और मजबूत करते हुए ऐसे विकल्पों पर निरंतर निवेश करना चाहिए.

ये भी पढ़ें: ‘पिछड़े’ जिलों के लिए गेमचेंजर गंगा एक्सप्रेसवे, बनेगा अर्थव्यवस्था का नया ‘इंजन’- डॉक्टर रीना पाठक

-भारत एक्सप्रेस

विशाल तिवारी, संपादकीय सलाहकार

Recent Posts

इटली में जेन-अल्फा का बवाल; 4,400 करोड़ की संपत्ति जली, मेलोनी ने किसे ठहराया जिम्मेदार?

Italy Protests: इटली में शिक्षा बजट और रक्षा खर्च को लेकर जेन-अल्फा छात्रों का विरोध…

7 minutes ago

कलयुगी बेटे ने विवाद शांत कराने पहुंचे माता-पिता पर छिड़का पेट्रोल, जिंदा फूंका

लखीमपुर खीरी में बहू-बेटे के विवाद को शांत कराने पहुंचे माता-पिता पर बेटे ने पेट्रोल…

8 minutes ago

मुजफ्फरनगर में रावण-कुंभकरण के साथ जलेगा 15 फीट का ‘कॉकरोच’, आयोजकों ने बताई वजह

Dussehra 2026: मुजफ्फरनगर के नुमाइश ग्राउंड में इस बार दशहरे पर रावण, कुंभकरण और मेघनाद…

19 minutes ago

‘A Sixth of Humanity’: देवेश कपूर और अरविंद सुब्रमण्यन की नजर से स्वतंत्र भारत के विकास की कहानी

देवेश कपूर और अरविंद सुब्रमण्यन की पुस्तक 'A Sixth of Humanity' स्वतंत्र भारत की विकास…

24 minutes ago

पुलिस की तारीफ होनी चाहिए! गोलीबारी की घटना पर MVA पर क्यों भड़के नितेश राणे?

Nitesh Rane Target MVA: मुंबई में गोलीबारी महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे ने विपक्ष पर…

28 minutes ago