आजकल सोशल मीडिया पर किसी को भी निशाने पर लेना बहुत आसान हो गया है, खासकर तब जब मामला देश की राजनीति और न्यायपालिका से जुड़ा हो. इन दिनों दिल्ली हाई कोर्ट की जज जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का एक वीडियो इंटरनेट पर आग की तरह फैल रहा है. इस वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि जस्टिस शर्मा खुद ये मान रही हैं कि वे जब भी आरएसएस (RSS) के कार्यक्रमों में जाती हैं, उनका प्रमोशन हो जाता है. चूंकि अरविंद केजरीवाल ने हाल ही में उनके खिलाफ मोर्चा खोला था, इसलिए इस वीडियो ने नई बहस छेड़ दी है. लेकिन क्या वाकई जस्टिस शर्मा ने ऐसा कुछ कहा है? आइए जानते है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा ये वीडियो दरअसल वाराणसी के मशहूर ‘महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ’ का है. ये वीडियो करीब दो साल पुराना है, जब जस्टिस शर्मा विश्वविद्यालय की लॉ फैकल्टी द्वारा आयोजित एक वर्कशॉप में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुई थीं. 19 मई 2024 को हुई इस वर्कशॉप का विषय “बदलते भारत में नए आपराधिक कानूनों की प्रासंगिकता” था. वीडियो को ध्यान से सुनने पर पता चलता है कि जस्टिस शर्मा अपनी कामयाबी का श्रेय आरएसएस को नहीं, बल्कि बाबा विश्वनाथ के आशीर्वाद और विश्वविद्यालय के प्यार को दे रही थीं.
अपने भाषण के दौरान उन्होंने बेहद भावुक होकर कहा था कि वे जब भी बनारस आती हैं, बाबा उन्हें कुछ न कुछ सौगात जरूर देते हैं. उन्होंने अपनी करियर यात्रा का जिक्र करते हुए बताया कि जब वे पहली बार इस विश्वविद्यालय में आईं तो सेशन जज थीं, अगली बार डिस्ट्रिक्ट जज बनीं और अब जब वे आईं हैं, तो बाबा की कृपा से हाई कोर्ट की जज बन चुकी हैं. उनके इस पूरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया और ‘बाबा विश्वनाथ’ तथा ‘विश्वविद्यालय’ की जगह ‘आरएसएस’ का नाम जोड़ दिया गया, ताकि एक भ्रामक नैरेटिव खड़ा किया जा सके.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा का नाम हाल के दिनों में अरविंद केजरीवाल और शराब नीति मामले की वजह से चर्चा में रहा है. केजरीवाल ने मांग की थी कि जस्टिस शर्मा इस मामले की सुनवाई न करें, क्योंकि वे कथित तौर पर आरएसएस से जुड़े कार्यक्रमों में जाती रही हैं.
हालांकि, जस्टिस शर्मा ने इस याचिका को खारिज कर दिया था. इसी राजनीतिक खींचतान के बीच इस पुराने वीडियो को गलत संदर्भ के साथ वायरल किया गया ताकि जज की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा सकें.
बता दें कि जिस महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में ये कार्यक्रम हुआ था, उसका अपना एक गौरवशाली इतिहास रहा है. इस संस्थान की स्थापना 1921 में हुई थी और यहां से लाल बहादुर शास्त्री जैसे दिग्गज नेता पढ़कर निकले हैं.
इस जांच से ये साफ है कि वायरल हो रहा वीडियो पुराना है. साथ ही इसके साथ किया जा रहा दावा झूठा और भ्रामक है.
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-भारत एक्सप्रेस
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