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मधु कोड़ा की दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई पूरी, दिल्ली हाई कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा की याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. कोड़ा ने कोयला घोटाला मामले में निचली अदालत द्वारा सुनवाई गई अपनी दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग की थी. कोड़ा ने आगामी विधानसभा चुनाव लड़ने का तर्क रखा हे. न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि कोड़ा और मामले की जांच करने वाले केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से लिखित दलीलें पहले ही दाखिल की जा चुकी हैं. सीबीआई ने इस आवेदन का विरोध किया, क्योंकि यह विचारणीय है.

दोषसिद्धि के आदेश पर रोक लगाने की मांग

कोड़ा ने 2024 के झारखंड विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दोषसिद्धि के 13 दिसंबर, 2017 के आदेश को निलंबित करने के लिए अदालत से आग्रह किया है. सीबीआई की और से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आर एस चीमा ने कहा कि कोड़ा द्वारा दायर एक समान आवेदन मई 2020 में खारिज कर दिया गया था और उसी राहत की मांग करने वाली उनकी नई याचिका विचारणीय नहीं है.

सीबीआई ने कहा इस अदालत ने पहले राजनीति के अपराधीकरण के लिए कदम उठाने की बढ़ती मांग पर ध्यान दिया था. इस सिद्धांत को ध्यान में रखते हुए, इस अदालत ने स्पष्ट रूप से आवेदन को खारिज कर दिया. प्रासंगिक रूप से, इस फैसले को चुनौती देने वाली कोई अपील दायर नहीं की गई थी. आवेदक ने इसे अंतिम रूप लेने दिया.

कोर्ट ने सजा पर रोक लगाने से किया था इनकार

मई 2020 में इससे पहले उच्च न्यायालय ने कोड़ा की सजा पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था यह कहते हुए कि जब तक उन्हें अंतिम रूप से बरी नहीं कर दिया जाता, तब तक उन्हें किसी भी सार्वजनिक पद के लिए चुनाव लड़ने की अनुमति देना उचित नहीं होगा. अदालत ने कहा था कि व्यापक राय यह है कि जिन पर अपराध के आरोप हैं, उन्हें सार्वजनिक पदों के लिए चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए. इसलिए, कोड़ा की सजा पर रोक लगाना और उन्हें मिली अयोग्यता से उबरने की अनुमति देना उचित नहीं होगा.

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कोड़ा, पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव ए के बसु और कोड़ा के करीबी सहयोगी विजय जोशी को भ्रष्ट आचरण में लिप्त होने और झारखंड में राजहरा उत्तर कोयला ब्लॉक को कोलकाता स्थित कंपनी विनी आयरन एंड स्टील उद्योग लिमिटेड (वीआईएसयूएल) को आवंटित करने में आपराधिक साजिश रचने के आरोप में निचली अदालत ने तीन साल जेल की सजा सुनाई थी.

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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