विवादों के 'किंग' संतोष वर्मा
IAS Santosh Verma Case: कहते हैं दूध का जला छाछ भी फूंक-फूंक कर पीता है, लेकिन मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी संतोष कुमार वर्मा शायद इस कहावत में यकीन नहीं रखते. कभी फर्जी दस्तावेज तो कभी शादी का झांसा देकर रेप के आरोप झेल चुके ‘साहब’ अब समाज सुधारक बनने चले थे. सुधार के नाम पर जुबान ऐसी फिसली कि सीधे ब्राह्मणों की बेटियों तक जा पहुंची. जो अधिकारी खुद कानून और मर्यादा की धज्जियां उड़ाने के लिए कुख्यात हो वही ‘रोटी-बेटी’ और आरक्षण का पाठ पढ़ाने लगे, तो विवाद तो लाजमी है. उनकी इसी करतूत पर अब सरकारी हंटर चला है. ऐसे में अब शेर की दहाड़ ‘माफीनामे’ की मिमियाहट में बदल गई है.
ममला भोपाल में ‘अजाक्स’ (SC/ST कर्मचारी संगठन) का प्रांतीय अधिवेशन का है. संगठन के नए नवेले अध्यक्ष और सीनियर आईएएस संतोष वर्मा ने माइक संभाला और अपनी मर्यादा से पार चले गए. इसके बाद से ही मीडिया में उनकी किरकिरी हो रही है. कुल लोगों ने उनके खिलाफ शिकायत (complaint On Santosh Verma) भी की है. अब मध्य प्रदेश सरकार ने भी उन्हें 7 दिनों में जवाब देने का नोटिस जारी किया है.
मध्य प्रदेश सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग ने संतोष वर्मा के बयान को अखिल भारतीय सेवा (आचरण) नियमों का खुला उल्लंघन माना है. विभाग ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कहा है कि उनकी टिप्पणी सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने वाली है.
उन्हें 7 दिनों के भीतर जवाब देना होगा कि उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों न की जाए. यदि जवाब नहीं मिला या संतोषजनक नहीं हुआ, तो उन पर एकतरफा कार्रवाई (सस्पेंशन या अन्य दंड) हो सकती है.
चारों तरफ से घिरने और नौकरी पर खतरा मंडराता देख आईएएस संतोष वर्मा के सुर बदल गए हैं. अपनी सफाई में उन्होंने कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया और उन्होंने सिर्फ एक पंक्ति को ही मुद्दा बनाया गया है. हालांकि, डैमेज कंट्रोल करते हुए उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि यदि मेरे शब्दों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं, तो मैं हृदय से क्षमा मांगता हूं.
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संतोष वर्मा ने आरक्षण का खत्म या कम न करने की वकालत की. जैसे उनका भाषण आगे बढ़ा उन्होंने अपने मर्यादा लांघ दी और ब्राह्मणों और उनकी बेटियों को लेकर अभद्र बयान देने लगे. सोशल मीडिया उनका यह वीडियो वायरल हो रहा है. वायरल वीडियो में साफ सुनाई पड़ रहा है कि संतोष वर्मा क्या कह रहे हैं?
इतना ही नहीं सोतोष वर्मा ने आगे कहा कि केवल आर्थिक आधार की बात है तो जब तक यह रोटी-बेटी का व्यवहार ना होता तब तक हमको समाज के पिछड़ेपन, सामाजिक पिछड़ेपन के कारण आरक्षण की पात्रता मिलती रहेगी. आप खत्म कर दीजिए जाति- हमें नहीं चाहिए आरक्षण.
यह पहली बार नहीं है जब संतोष वर्मा सुर्खियों में हैं. उन पर शादी का झांसा देकर एक महिला से दुष्कर्म करने और फर्जी दस्तावेज (अदालत के जाली आदेश) तैयार करने के गंभीर आरोप लग चुके हैं. इन आरोपों के चलते उन्हें जेल भी जाना पड़ा था और सेवा से निलंबित भी रहे. अब बहाली के बाद अजाक्स का अध्यक्ष बनते ही उन्होंने फिर से ऐसा बयान दिया, जिसने उनकी प्रशासनिक समझ पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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एक आईएएस अधिकारी से समाज को दिशा देने की उम्मीद की जाती है, लेकिन संतोष वर्मा जैसे अधिकारी दिशा भटकाने का काम कर रहे हैं. जिस पद की गरिमा ‘संविधान’ और ‘समानता’ की रक्षा करना है, उसका इस्तेमाल जातीय वैमनस्य फैलाने के लिए करना दुर्भाग्यपूर्ण है. अब गेंद सरकार के पाले में है. देखना दिलचस्प होगा कि क्या महज एक ‘माफीनामे’ से यह पाप धुल जाएगा, या फिर एक आदतन विवादित अधिकारी पर कोई ठोस नजीर पेश की जाएगी.
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