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Noida News: अब बिल्डर नहीं कर सकेंगे नक्शे से छेड़छाड़, यूपी RERA ने लागू किया नया नियम

UP Rera News Noida: रियल एस्टेट प्रॉजेक्टों के नक्शे के बढ़ रहे विवादों को देखते हुए यूपी RERA ने बड़ा फैसला लिया है और इसको लेकर नया नियम लागू किया है. शुक्रवार को RERA के नवनियुक्त चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने पत्रकार वार्ता की और इस नए नियम की जानकारी दी. मीडिया के सामने उन्होंने बताया कि प्रॉजेक्टों की निर्माण प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने, विशेष रूप से प्रमोटर और आवंटियों के बीच होने वाले विवादों को रोकने के लिए यह निर्णय लिया गया है. इसके तहत अब प्राधिकरण से पास हुए नक्शे को राजस्व विभाग के मैप पर सुपर इम्पोज कराया जाएगा और यही वजह है कि बिल्डर प्रॉजेक्ट के नक्शे से किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं कर पाएगा.

स्वीकृत नक्शे पर ही कराना होगा निर्माण कार्य

चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने पत्रकारों को आगे जानकारी दी कि, इस नए नियम व नई व्यवस्था के बाद बिल्डर जो भी नक्शा प्राधिकरण से पास कराएगा, उसे राजस्व विभाग के नक्शे पर सुपर इम्पोज कराया जाएगा और फिर इसी कारण उसे स्वीकृत नक्शे के अनुसार ही निर्माण कराने के लिए बाध्य होना पड़ेगा और व ह अपने मनमुताबिक कार्य नहीं कर सकेगा और न ही प्राधिकरण को धोखा दे सकेगा. उन्होंने जानकारी दी कि पहले फेज में यह प्रक्रिया जीआईएस (ग्लोबल इनफॉर्मेशन सिस्टम) बेस्ड मास्टरप्लान वाले 13 शहरों में लागू होगी, जिसमें नोएडा और गाजियाबाद भी शामिल है.

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वित्तीय संस्थाओं से भी ली जाएगी डिटेल

पत्रकार-वार्ता करते हुए चेयरमैन ने कहा कि, रियल एस्टेट प्रॉजेक्ट्स से संबंधित बैंकिंग प्रक्रिया को भी पारदर्शी बनाने के लिए यूपी RERA काम कर रही है. इसके तहत अब वित्तीय संस्थाओं से भी बैंक खातों की डिटेल ली जाएगी. उन्होंने बताया कि, इस नए नियम के बाद प्रॉजेक्टों के बैंक खातों की सूचना देना प्रमोटर्स के साथ ही वित्तीय संस्थानों की भी जिम्मेदारी हो जाएगी. उन्होंने जानकारी दी कि जल्द ही RERA से जारी गाइडलाइंस को लागू किया जाएगा.

लेन-देन और व्यय के विवरण को भी बनाया जाएगी पारदर्शी

चेयरमैन संजय भूसरेड्डी ने RERA एक्ट का हवाला देते हुए ये भी बताया कि, RERA एक्ट के मुताबिक किसी भी प्रॉजेक्ट के लिए प्रमोटर को कलेक्शन अकाउंट, सेपरेट अकाउंट और एक्सपेंडिचर अकाउंट खोलने होते हैं. उन्होंने कहा कि, इन सबकी जानकारी रेरा पोर्टल पर अपलोड की जाती है, जिसका एकमात्र उद्देश्य प्रमोटर्स की ओर से 70 प्रतिशत धनराशि उसी प्रॉजेक्ट में इस्तेमाल करना होता है, हालांकि अधिकांश लोग ऐसा नहीं करते हैं. इसी के साथ उन्होंने बताया कि, लेकिन बिल्डर द्वारा प्रॉजेक्ट में उपयोग की जा रही राशि, उसके लेनदेन और व्यय के विवरण को पारदर्शी रखने के लिए नई गाइडलाइंस जारी की गई हैं और इसे बहुत जल्द लागू किया जाएगा.

-भारत एक्सप्रेस

Archana Sharma

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