जस्टिस यशवंत वर्मा कथित कैश मामले में बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने सीजेआई बीआर गवई को पत्र लिख कर यशवंत वर्मा के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग की है. साथ ही जस्टिस वर्मा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है.
यह पत्र एसोसिएशन के अध्यक्ष एडवोकेट अहमद आब्दी और सचिव एडवोकेट एकनाथ आर ढोकले ने चिठ्ठी लिखी है. यह एफआईआर पीसी एक्ट 1988 और बीएनएस 2023 के तहत दर्ज करने की मांग की गई है. पत्र में सुप्रीम कोर्ट के 1991 के वीरास्वामी के फैसले में बदलाव करने की मांग की गई है.
दरअसल 1991 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक सीजेआई की अनुमति के बिना हाईकोर्ट (HC) के जज के खिलाफ FIR दर्ज नहीं की जा सकती. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील मैथ्यूज जे नेदुम्परा, हेमाली सुरेश कुर्ने, राजेश विष्णु आद्रेकर और चार्टर्ड अकाउंटेंट मंशा निमेश मेहता ने संयुक्त रूप से दायर की गई थी.
याचिका में जस्टिस यशवंत वर्मा, सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग को पार्टी बनाया गया था. याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट से दिल्ली पुलिस को मुकदमा दर्ज करने और प्रभावी तथा सार्थक जांच करने का निर्देश देने की मांग की थी.याचिका पर जस्टिस अभय एस ओका ने सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश ने पहले ही इन-हाउस जांच कमेटी की रिपोर्ट और जस्टिस वर्मा का जवाब राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेज दिया है.
बेंच ने कहा था कि याचिकाकर्ताओं ने कार्रवाई की मांग करते हुए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के सामने कोई भी प्रतिवेदन दायर नहीं किया है, इसलिए परमादेश की मांग करने वाली रिट याचिका पर विचार करने का कोई मतलब नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित इन-हाउस कमेटी में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जी एस संधावालिया और कर्नाटक हाईकोर्ट के जस्टिस अनु शिवरामन शामिल थी. कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद सीजेआई ने इसे प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति के पास भेज दिया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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