सांकेतिक फोटो
दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय को 26 नवंबर को या उससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (DUSU) चुनाव के लिए मतगणना की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया है. बशर्ते कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों द्वारा किए गए सभी विकृतीकरण को एक सप्ताह के भीतर साफ कर दिया जाए और फिर से रंग दिया जाए. मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की खंडपीठ ने कहा कि यह सुनिश्चित करना उम्मीदवारों और डीयू के मौजूदा छात्रों की जिम्मेदारी है कि अगला बैच अच्छी और साफ-सुथरी स्थिति में विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे का उपयोग करे.
अदालत अधिवक्ता प्रशांत मनचंदा द्वारा 2017 में दायर एक याचिका पर विचार कर रही थी, जिसमें सार्वजनिक संपत्तियों को विकृत करने वाले उम्मीदवारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी. याचिका में विकृतीकरण को हटाने और क्षेत्रों के नवीनीकरण की भी मांग की गई थी. मनचंदा ने हाल ही में डीयूएसयू चुनावों के दौरान हुई तोड़फोड़ और विकृतीकरण के खिलाफ एक आवेदन दायर किया था.
सितंबर में न्यायालय ने दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य कॉलेजों के चुनावों के लिए मतगणना की प्रक्रिया को उम्मीदवारों द्वारा सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ करने के कृत्यों में लिप्त होने के मद्देनजर रोक दिया था. बाद में न्यायालय ने कहा था कि यदि सारा नुकसान साफ हो जाता है तो अगले दिन मतगणना की जाएगी.
डूसू चुनाव 2024-25 के मुख्य चुनाव अधिकारी द्वारा एक हलफनामा दायर किया गया जिसमें कहा गया कि प्रभावित दलों के राजस्व के नुकसान का आकलन करने उसकी भरपाई करने और दोषी उम्मीदवारों की जवाबदेही तय करने के लिए एक नुकसान आकलन समिति का गठन किया गया था. दिल्ली विश्वविद्यालय के वकील ने पीठ को एक नई स्थिति रिपोर्ट सौंपी जिसमें मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा था कि उत्तर और दक्षिण दोनों परिसरों में लगभग सभी कॉलेज, विभाग और सुविधाएं साफ कर दी गई हैं और अब कोई नुकसान नहीं दिख रहा है. न्यायालय को आश्वासन दिया गया कि भविष्य में नुकसान पहुंचाने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा.
अभ्यर्थियों द्वारा एक हलफनामा भी दाखिल किया गया, जिसमें दिखाया गया कि परिसरों में की गई विकृतियों को हटाने के लिए सफाई अभियान में भाग लेकर परिसरों को बहाल करने के लिए उन्होंने कदम उठाए हैं. मनचंदा ने कहा कि हालांकि कई कॉलेजों, विभागों और संकायों की सफाई की गई है और विकृतियों को हटाया गया है फिर भी परिसरों के पास स्थित सार्वजनिक और निजी संपत्तियों पर कई पोस्टर, भित्तिचित्र और स्प्रे पेंट अभी भी दिखाई दे रहे हैं.
छात्रों की ओर से पेश हुए वकील ने वचन दिया कि ऐसी सभी जगहों को एक सप्ताह के भीतर साफ कर दिया जाएगा और फिर से रंग दिया जाएगा. सुनवाई बंद करते हुए, न्यायालय ने डीयू को छात्रों द्वारा संपत्तियों की सफाई के तथ्य की पुष्टि करने और उम्मीदवारों की रिपोर्ट के साथ 10 दिनों के भीतर एक रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया. पीठ ने कहा वर्तमान कार्यवाही का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि छात्र और डीयूएसयू उम्मीदवार यह समझें कि विश्वविद्यालय की संपत्ति आम जनता की है और वे इसे सीमित अवधि के लिए उपयोग करने के हकदार हैं और इसे वे अगले बैच के लिए ट्रस्ट में रखते हैं.
यह देखते हुए कि डीयूएसयू चुनाव लड़ रहे उम्मीदवार युवा हैं न्यायालय का मानना है कि उन्हें दूसरा मौका मिलना चाहिए और कार्यवाही का उद्देश्य सुधार करना है, न कि दंडित करना. न्यायालय ने आगे कहा इस न्यायालय को उम्मीद है कि इससे छात्र समुदाय और इस साल चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों तथा भविष्य में चुनाव लड़ने की योजना बनाने वाले उम्मीदवारों को स्पष्ट संदेश जाएगा.
–भारत एक्सप्रेस
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