मध्यप्रदेश के धार में स्थित भोजशाला मामले को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में CJI के पास भेजा गया. अब CJI की बेंच यह तय करेगी कि इस मामले की प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 के मामले के साथ या अलग से सुनवाई होगी. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि इस मामले की भी सुनवाई प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट 1991 को लेकर दायर याचिकाओं पर CJI की बेंच सुनवाई कर रही है, लिहाजा उसी बेंच को सुनवाई करनी चाहिए.
जस्टिस हृरिकेश रॉय और जस्टिस एसवीएन की बेंच ने यह आदेश दिया है. इस मामले को लेकर हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस सहित कई लोगों की ओर से याचिका दायर की गई है.
याचिका में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1 अप्रैल के दिए गए उस आदेश को वापस लेने की मांग की है, जिसके तहत सुप्रीम कोर्ट ने ASI की रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट को कोई कार्रवाई करने से रोक दिया था. हिंदू पक्ष का कहना है कि ASI की रिपोर्ट में वहां मंदिर होने की पुष्टि हुई है. अगर मुस्लिम पक्ष को रिपोर्ट पर ऐतराज है तो वो हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा सकता है. इस पर हाईकोर्ट उचित आदेश पास करने में समर्थ है. इसलिए अब हाईकोर्ट की कार्रवाई पर रोक का औचित्य नहीं है.
हिंदू पक्ष का यह भी कहना है कि मस्जिद कमेटी ASI जांच पर रोक को मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट आई थी लेकिन अब ASI जांच पूरी हो चुकी है और ASI ने हाईकोर्ट में जांच रिपोर्ट भी दाखिल कर दी है. याचिका मे हिंदू पक्ष ने कहा है कि 2047 पन्नों की ASI रिपोर्ट मे बताया गया है कि सर्वे मे सनातन संस्कृति की कई निशानियां मिली है और न्याय के हित में सुप्रीम कोर्ट को अपना अंतरिम आदेश वापस लेना चाहिए ताकि हाईकोर्ट मे मामले की सुनवाई आगे बढ़ाया जा सके.
बता दें कि सर्वे के दौरान मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में सर्वे रोकने के लिए याचिका दायर की थी. तब कोर्ट ने सर्वे पर तो कुछ नहीं कहा, लेकिन सर्वे के आधार पर फैसला लेने पर रोक लगाई है. ASI ने 89 दिन तक सर्वे कर रिपोर्ट तैयार की है. सर्वे में आधुनिक तकनीक भी अपनाई गई. खुदाई कर भी परिसर से पुराने अवशेष निकाले गए. गौरतलब है कि मध्यप्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला का विवाद लगभग अयोध्या जैसा ही है.
यह जगह फिलहाल ASI के कब्जे में है. इस पर हिंदू और मुसलमान दोनों अपना अधिकार जताते है. हिंदू पक्ष दावा करता है कि एज स्थान पर मां सरस्वती का मंदिर है. भोजशाला मूल रूप से 11 वीं शताब्दी में राजा भोज द्वारा बनवाया गया था. हिंदू पक्ष का कहना है कि उस वक्त मुसलमानों को कुछ समय के लिए यहां नमाज अदा करने की अनुमति दी गई थी, लेकिन बाद में उन्होंने पूरे परिसर पर कब्जा कर लिया और वहां मस्जिद बनवा दी. वहीं मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला की मस्जिद बताते आ रहे है.
-भारत एक्सप्रेस
सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के फाइव-स्टार होटलों पर समान प्रॉपर्टी टैक्स व्यवस्था को बरकरार रखा…
Gold Price in Pakistan: पड़ोसी देश पाकिस्तान में सोना भारत के मुकाबले करीब 20,000 रुपए…
दिल्ली हाईकोर्ट वकीलों को धमकी देने और पुलिस प्रदर्शन के मामले में एसीपी मनस्वी वशिष्ठ…
Agnipath Scheme Update: भारतीय सशस्त्र बलों में 'अग्निपथ योजना' के तहत सेवा दे रहे अग्निवीरों…
सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट देने वाले कानून…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू को फोन…