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आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और नसबंदी अभियानों में ढिलाई को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग

दिल्ली में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और नसबंदी अभियानों में ढिलाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट के दो पीठों द्वारा दिए गए अलग-अलग फैसले को लेकर सीजेआई बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मेंशन कर जल्द सुनवाई की मांग की गई. जिसपर सीजेआई गवई ने कहा कि देखते है.

याचिकाकर्ता ने सुनवाई की अपील की

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ननिता शर्मा ने कहा कि यदि एबीसी नियमों को सही तरह से लागू किया गया होता तो आज जो स्थिति उत्पन्न हुई है, वह नही होती. उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि एक ओर जस्टिस संजय करोल की पीठ एबीसी नियमों के पालन का आदेश देती है, वही दूसरी ओर जस्टिस जे बी पारदीवाला की पीठ पर एबीसी नियमों का नजरअंदाज कर सभी कुत्तों को पकड़ने को कहता है.ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि दिल्ली में कौन सा आदेश लागू होगा.

पीठ ने कुत्तों की हत्या पर रोक लगाई थी

बता दें कि जस्टिस संजय करोल और जस्टिस जे के महेश्वरी की बेंच ने निर्देश दिया था कि एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) रूल को लागू करने का आदेश दिया था. साथ ही कुत्तों की हत्या करने पर रोक लगा दिया था. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि हम केवल इतना जोड़ना चाहते है कि किसी भी परिस्थिति में कुत्तों की हत्या नही हो सकती और अधिकारियों को मौजूदा कानून और उसके उद्देश्यों के अनुरूप कार्रवाई होगी. कोर्ट ने कहा कि सभी जीवों के प्रति करुणा दिखाना संवैधानिक मूल्य और दायित्व है, जिसे बनाए रखना आवश्यकता है. कोर्ट ने एबीसी नियमों को लागू करने पर जोर दिया था. जबकि जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने हालही में दिल्ली-एनसीआर के कुत्तों को पकड़कर स्थानांतरित करने या शेल्टर होम में रखने का आदेश दिया था.

इससे पहले वर्ष 2018 में एक संगठन ने दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी, जिसमें नियम 3(3) नियम 5 (a) और नियम 6 (2) के तहत नियमित स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन कार्यक्रम चलाने की मांग की गई थी. ताकि कुत्तों की बढ़ती संख्या पर रोक लग सके. अगस्त 2023 में हाई कोर्ट ने यह कहते हुए याचिका का निपटारा कर दिया कि उसे अधिकारियों द्वारा उठाए गए कदमों से संतुष्टि है. जिसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुचा और हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ याचिका दायर की गई.

जिसपर सुनवाई के बाद जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस के वी विश्नाथन की बेंच ने नोटिस जारी किया. लेकिन जवाब दाखिल नही करने पर सीजेआई गवई ने जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दे दिया था. लेकिन अभी तक इस मामले में सुनवाई नही हो पाई है.

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भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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