Manipur Violence Case: 2023 में मणिपुर में हुई हिंसा के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, सीबीआई और एनआईए के मामलों के लिए अलग-अलग 2 स्पेशल कोर्ट बनाने पर विचार करने को कहा है. साथ ही, उसने जांच एजेंसियों को लंबित जांच जल्द से जल्द पूरी करने और यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि पीड़ितों को चार्जशीट की प्रतियां उपलब्ध कराई जाए. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने यह निर्देश दिया है.
पिछली सुनवाई में अदालत ने सीबीआई, राज्य एसआईटी और कोर्ट द्वारा नियुक्त निगरानी समिति को हिंसा से जुड़े मामलों पर नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया था. इस समिति की अध्यक्षता महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस महानिदेशक दत्तात्रेय पडसलगीकर कर रहे है.
दत्तात्रेय की ओर से दायर स्टेट्स रिपोर्ट में बताया गया है कि जुलाई 2026 में कुछ कम्युनिटी ग्रुप्स ने कई जगहों पर सड़कें जाम की थी, सीआरपीएफ पर हमले हुए थे. असम राइफल्स पर हमले और पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुचाने की घटनाएं भी हुई थी, साथ ही एनआरसी को लेकर हाल ही में पब्लिक प्रोटेस्ट भी हुआ था.
पिछली सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील वृंदा करात ने कोर्ट को बताया कि पूर्व के निर्देशों के बावजूद दो पीड़ितों के परिवारों को अभी तक कॉपी नहीं मिली है. आपराधिक मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का सुझाव देते हुए कोर्ट ने राज्य सरकार, एसआईटी और सीबीआई की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से उन मामलों का ब्यौरा एकत्र करने को कहा था, जिनमें जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके है.
दाखिल स्टेट्स रिपोर्ट में एनआईए ने बताया है कि कुल 30 मामले है, जिनमें से 15 में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. 15 मामलों की जांच चल रही है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था की संवेदनशील स्थिति के बावजूद, एसआईटी, सीबीआई और एनआईए अपनी जांच जारी रखेंगी और मणिपुर राज्य तथा केन्दीय सुरक्षा एजेंसियां लंबित जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाने में पूरा सहयोग सुनिश्चित करेगी. कोर्ट ने अगली सुनवाई से पहले स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्दर्श दिया है.
कोर्ट ने 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े आपराधिक मामलों की प्रतिदिन सुनवाई के लिए विशेष अदालतें गठित करने का सुझाव दिया था. तीन मई 2023 को मणिपुर के पहाड़ी जिलों में बहुसंख्यक मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग के विरोध में आयोजित आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद जातीय हिंसा भड़क उठी थी. तब से अब तक इस हिंसा में 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, कई सौ लोग घायल हुए हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए है.
ये भी पढ़ें: राम मंदिर के 500-1000 रुपये के चंदे का क्या हुआ? सुप्रीम कोर्ट में टली सुनवाई, जानिए कोर्ट का रुख
-भारत एक्सप्रेस
Anil Vij reaction to Rahul Gandhi: हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने राहुल गांधी…
Ayurveda Ahar Guidelines: आयुष मंत्रालय ने 'आयुर्वेद आहार' को बढ़ावा देने के लिए परंपरा, सही…
भारतीय सेना के टी-72 और टी-90 टैंकों को अब स्वदेशी तकनीक से बिजली मिलेगी. रक्षा…
द लैंसेट की नई स्टडी के अनुसार, मिडिल एज में ब्लड टेस्ट के जरिए अल्जाइमर…
सोशल मीडिया पर कांग्रेस द्वारा 19 सितंबर को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का एक…
SAMBHAL AT UP TRADE SHOW: उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के…