लीगल

‘शराब महंगी करनी है तो करो…’ अदालतों में महिला वकीलों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने किया सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की महिला वकीलों के लिए अदालतों में बुनियाद सुविधाओं की कमी के मामले में सभी एडवोकेट जनरल से 2 सप्ताह के अंदर सच्चाई का पता लगाने का निर्देश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना ने यह निर्देश दिया है.

अदालत ने मामले की जांच कर राज्य सरकार को एक प्रस्ताव सौपनें का निर्देश दिया है. ताकि पानी और साफ-सफाई की सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें. कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट जनरल की जांच रिपोर्ट के 4 हफ्ते के अंदर जहां भी जरूरत हो, वहां वॉशरूम बनाने का काम तुरंत शुरू हो, शुरू नही होने पर इसके लिए पीडब्ल्यूडी जिम्मेदार होगा.

कोर्ट ने कहा कि फंड की कमी या रेवेन्यू घाटे की दलील नहीं मानी जाएगी. अदालत ने देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 6 सप्ताह में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगर तय समय-सीमा की कमी को दूर नही किया गया तो बर्दास्त नही किया जाएगा.

महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने किया टिप्पणी

वही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि कर्नाटक की तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए वॉशरूम या टॉयलेट नही है. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जरा सोचिए हमारी बेटियों के लिए हालात कितने खराब और बदतर हैं, वे कैसे काम कर रही हैं. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने कहा कि मैं सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल के साथ एक मीटिंग करने की योजना बना रहा हूं और स्थिति का जायजा लूंगा. सीजेआई ने कहा कि कृपया महिला वकीलों के काम करने की खराब स्थिति पर ध्यान.दें. कोर्ट ने कहा अगर इसके लिए शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त टैक्स लगाना है तो लगाइए हमे इसे मंजूरी देंगे.

महिला वकीलों द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि देश के अनेक हाई कोर्ट, जिला अदालतों, तहसील अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों में महिला वकीलों के लिए बार रूम और बाकी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नही है. पिछली सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नही है, बल्कि गरिमा और समान अवसर से जुड़ा संवैधानिक दायित्व है.

अदालत ने युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि प्रतिभाशाली युवा वकीलों को पेशा छोड़ने से रोकने के लिए संस्थागत सहायता व्यवहार पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: गाजियाबाद की मासूम से दरिंदगी पर सुप्रीम कोर्ट का फूटा गुस्सा, अस्पतालों को लेकर की ये बेहद तिखी टिप्पणी

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

आजम खान पर ईडी का बड़ा शिकंजा: जौहर यूनिवर्सिटी की ₹426.46 करोड़ की संपत्ति कुर्क, मार्केट प्राइस ₹1,170 करोड़!

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सपा नेता आजम खान और मौलाना मोहम्मद…

5 hours ago

मुंबई एयरपोर्ट के टर्मिनल 1 का रीडेवलपमेंट: 60 साल पुरानी इमारत की जगह होगा अत्याधुनिक ‘गेटवे’, सालाना 2 करोड़ यात्रियों की क्षमता

छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट (CSMIA) ने टर्मिनल 1 (T1) के पुनर्विकास की पहली कलात्मक…

6 hours ago

अंडमान-निकोबार से ‘टीबी मुक्त भारत’ अभियान का आगाज: PM मोदी के संकल्प को साकार करने के लिए LG डॉ. दिनेश शर्मा ने कर्मियों को दिलाई शपथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टीबी उन्मूलन के संकल्प को साकार करने के लिए अंडमान-निकोबार के…

6 hours ago

ANDAMAN NICOBAR: LG डॉ. दिनेश शर्मा की श्री विजयपुरम में विभागीय समीक्षा बैठक, अफसरों को निर्देश- जनहित के कार्यों में देरी बर्दाश्त नहीं!

श्री विजयपुरम स्थित लोक निवास में उपराज्यपाल डॉ. दिनेश शर्मा ने सभी विभागों की उच्चस्तरीय…

7 hours ago

‘जाणता राजा’ के ऐतिहासिक महामंचन का 250 कलाकारों के शानदार अभिनय के साथ भव्य समापन, अंतिम दिन भी गाजियाबाद में उमड़ा जनसैलाब

गाजियाबाद के सनसिटी में दिव्य प्रेम सेवा मिशन द्वारा आयोजित छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन…

7 hours ago