Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

‘शराब महंगी करनी है तो करो…’ अदालतों में महिला वकीलों की बदहाली पर सुप्रीम कोर्ट ने किया सख्त टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की महिला वकीलों के लिए अदालतों में बुनियादी सुविधाओं, शौचालय और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल को दो सप्ताह के भीतर वास्तविक स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया है.

Supreme Court To Hear Asian Games Dressage Selection Dispute On July 9

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर की महिला वकीलों के लिए अदालतों में बुनियाद सुविधाओं की कमी के मामले में सभी एडवोकेट जनरल से 2 सप्ताह के अंदर सच्चाई का पता लगाने का निर्देश दिया है. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना ने यह निर्देश दिया है.

अदालत ने मामले की जांच कर राज्य सरकार को एक प्रस्ताव सौपनें का निर्देश दिया है. ताकि पानी और साफ-सफाई की सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें. कोर्ट ने कहा कि एडवोकेट जनरल की जांच रिपोर्ट के 4 हफ्ते के अंदर जहां भी जरूरत हो, वहां वॉशरूम बनाने का काम तुरंत शुरू हो, शुरू नही होने पर इसके लिए पीडब्ल्यूडी जिम्मेदार होगा.

कोर्ट ने कहा कि फंड की कमी या रेवेन्यू घाटे की दलील नहीं मानी जाएगी. अदालत ने देश भर के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 6 सप्ताह में स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि अगर तय समय-सीमा की कमी को दूर नही किया गया तो बर्दास्त नही किया जाएगा.

महिला वकीलों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने किया टिप्पणी

वही सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि कर्नाटक की तालुका अदालतों में महिलाओं के लिए वॉशरूम या टॉयलेट नही है. इसपर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि जरा सोचिए हमारी बेटियों के लिए हालात कितने खराब और बदतर हैं, वे कैसे काम कर रही हैं. सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल वेंकटरमणी ने कहा कि मैं सभी राज्यों के एडवोकेट जनरल के साथ एक मीटिंग करने की योजना बना रहा हूं और स्थिति का जायजा लूंगा. सीजेआई ने कहा कि कृपया महिला वकीलों के काम करने की खराब स्थिति पर ध्यान.दें. कोर्ट ने कहा अगर इसके लिए शराब या सिगरेट पर अतिरिक्त टैक्स लगाना है तो लगाइए हमे इसे मंजूरी देंगे.

महिला वकीलों द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि देश के अनेक हाई कोर्ट, जिला अदालतों, तहसील अदालतों, ट्रिब्यूनलों और आयोगों में महिला वकीलों के लिए बार रूम और बाकी बुनियादी सुविधाएं मौजूद नही है. पिछली सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा था कि अदालत परिसरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल प्रशासनिक आवश्यकता नही है, बल्कि गरिमा और समान अवसर से जुड़ा संवैधानिक दायित्व है.

अदालत ने युवा वकीलों की आर्थिक चुनौतियों पर भी चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि प्रतिभाशाली युवा वकीलों को पेशा छोड़ने से रोकने के लिए संस्थागत सहायता व्यवहार पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए.

यह भी पढ़ें: गाजियाबाद की मासूम से दरिंदगी पर सुप्रीम कोर्ट का फूटा गुस्सा, अस्पतालों को लेकर की ये बेहद तिखी टिप्पणी

-भारत एक्सप्रेस 



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read


Pension Mission Shakti Digital

Latest