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सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार KA लगाई फटकार, बोले- ‘काम कर रहे जजों को राजनीति के लिए परेशान न करें’

Bengal Voter List Case: पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई है. कोर्ट 6 अप्रैल को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा. सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने फिजूल की आपत्ति उठाये जाने पर फटकार लगाई है.

अब तक करीब 47 लाख आपत्तियों का निपटारा

टीएमसी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लिस्ट से बाहर किए गए लाखों लोगों के दावों और आपत्तियों के मामले की जांच के लिए अपीलेट ट्रिब्यूनल को चुनाव आयोग ट्रेनिंग दे रहा है.
जबकि पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कोर्ट को बताया कि अब तक करीब 47 लाख आपत्तियों का निपटारा किया जा चुका है.

जबकि कोलकाता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा सीजेआई को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि हर दिन लगभग 2 लाख आपत्तियों पर कार्रवाई की जा रही है.

सीजेआई ने कहा कि हम तथ्यों और आंकड़ों से काफी खुद हैं और बहुत आशावादी हैं. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने अवगत कराया है कि सात अप्रैल तक सभी आपत्तियों पर फैसला कर दिया जाएगा. पत्र में कहा गया है कि चुनाव आयोग ने 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल के गठन की अधिसूचना जारी कर दी हैं.

कोर्ट ने जताई नराजगी

मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वकील ने कहा कि अपीलीय ट्रिब्यूनल एक अर्ध-न्यायिक संस्था है. इसपर सीजेआई ने कहा कि ट्रिब्यूनल में पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी शामिल है. कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि निष्पक्ष तरीके से SIR का काम कर रहे जजों को राजनीतिक ज्ञापन देकर परेशान किया जा रहा है.

कोर्ट ने कहा कि जज जो कर रहे है, वह उनका काम नहीं है. उन्हें बेवजह परेशान नहीं किया जाना चाहिए. जस्टिस बागची ने टिप्पणी करते हुए कहा कि हम सुनवाई इस बात पर कर रहे है कि चुनाव किस मतदाता सूची से हो. साथ ही हमे देखना है कि नाम न होने के चलते अगर कोई इस चुनाव में मतदान न कर सके और उसे अपीलेट ट्रिब्यूनल से राहत मिले, तो वह भविष्य के लिए मतदाता सूची में जगह पा सकें.

कोर्ट के समक्ष उठा हिंसा का मुद्दा

मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा का मुद्दा कोर्ट के समक्ष उठाया गया. वकील ने इस संबंध में दाखिल एक आवेदन का जिक्र किया और इसपर सुनवाई की मांग की. इसपर कोर्ट ने कहा, तो फिर सीबीआई को पक्षकार बनाया जाए. कोर्ट ने पूछा कि क्या पहले की बेंच ने पोस्ट-पोल हिंसा की घटनाओं की जांच सीबीआई को नहीं सौंपी थी.

ये भी पढ़ें: लीना मारिया पॉलोज की जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट का फैसला सुरक्षित; 4 अप्रैल को होगी सुनवाई

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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