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चुनावी ‘रेवड़ी’ पर सुप्रीम कोर्ट सख्त; मार्च में होगी मुफ्त उपहारों पर रोक लगाने वाली याचिका की सुनवाई

चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त की घोषणा किए जाने पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर जल्द सुनवाई का सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को भरोसा दिया है. वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सीजेआई सूर्यकांत और जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि यह मामला अत्यंत महत्वपूर्ण है और जनहित से जुड़ा हुआ है.

कोर्ट ने कहा कि इस मामले की सुनवाई तीन जजों की पीठ करेगी. कोर्ट ने मार्च में मामले को सूचिबद्ध करने का भरोसा दिया है. मेंशनिंग के दौरान उपाध्याय ने कहा कि देश में पांच विधानसभा चुनाव आने वाले हैं और अब वादों में सिर्फ सूरज और चांद का वादा करना ही बाकी रह गया है. उन्होंने कहा कि इस तरह की घोषणाएं भ्र्ष्टा आचरण की श्रेणी में आती हैं.

कोर्ट ने दिया था ये सुझाव

इससे पहले कोर्ट ने सुझाव दिया था कि केंद्र मुफ्त उपहारों के.पेशेवरों और विपक्षों पर चर्चा करने के लिए एक सर्वदलीय बैठक बुला सकता है और यदि आवश्यक हो तो इसे कैसे रोक सकता है, इसपर निर्णय ले सकता है. वही राजनीतिक दलों ने फ्रिबिज के लिए नियामक तंत्र की जांच के लिए एक विशेष पैनल के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का विरोध किया है.

चुनाव आयोग और ‘मुफ्त उपहार’ की बहस

पिछली सुनवाई में चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया था कि चुनाव से पहले या बाद में मुफ्त उपहार देना राजनीतिक दलों का नीतिगत फैसला है. वह राज्य की नीतियों और पार्टियों की ओर से लिए एक फैसलों को नियंत्रित नही कर सकता. आयोग ने कहा कि इस तरह की नीतियों का क्या नकरात्मक असर होता है? ये फैसला करना वोटरों का काम है.

चुनाव आयोग ने अपने हलफनामे में कहा था कि चुनाव से पहले या बाद में किसी भी मुफ्त सेवा की.पेशकश या वितरण संबंधित पार्टी का एक नीतिगत निर्णय है औरक्या ऐसी नीतियां आर्थिक रूप से व्यवहारिक हैं या राज्य के आर्थिक रूप से व्यवहारिक हैं या राज्य के आर्थिक स्वास्थ्य पर इसका उल्टा असर पड़ता है, इस सवाल पर राज्य के मतदाताओं को विचार कर निर्णय लेना चाहिए.

ये भी पढ़ें- 69,000 शिक्षक भर्ती पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से पूछा- ‘क्या 6800 आरक्षित अभ्यर्थियों का हो सकता है समायोजन?’

मुफ्त उपहार बनाम जनकल्याण

दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि चुनाव से पहले सार्वजनिक धन से तर्कहीन मुफ्त का वादा या वितरण एक स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की जड़ों को हिलाता है. चुनाव प्रक्रिया की.शुद्धता को खराब करता है. दलों पर शर्त लगाई जानी चाहिए कि वे सार्वजनिक कोष से चीजें मुफ्त देने का वादा या वितरण नहीं करेंगे.

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-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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