लीगल

‘वंदे मातरम नहीं गाया तो 3 साल की जेल?’ सुप्रीम कोर्ट का बड़ा कदम, केंद्र सरकार से मांगा जवाब

 Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रीय गान के समान कानूनी संरक्षण देने वाले कानून को चुनौती देने वाली याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है. कोर्ट इस बात पर विचार कर रहा है कि ‘वंदे मातरम’ नहीं गाने या इसके गायन में व्यवधान डालने पर दंडात्मक कार्रवाई किस हद तक लागू हो सकता है.

दंडात्मक परिणाम वाले हिस्से की जांच किए जाने की जरूरत

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच दायर याचिका पर सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील डॉ. एस. मुरलीधर ने दलील दी कि करीब 80 साल बाद पहली बार लोगों पर इसे थोपने और इसके लिए दंडात्मक परिणाम तय करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस तरह के विषय पर लोगों के बीच सहमति बननी चाहिए, न कि इसे थोपा जाए. इसपर जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि दंडात्मक परिणाम वाले हिस्से की जांच किए जाने की जरूरत है.

छह अंतरों के गायन को लेकर दिशा निर्देश जारी

वहीं केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता इतनी संकीर्ण नहीं हो सकती. यह याचिका कर्नाटक संगीत के जाने-माने गायक टी. एम. कृष्णा ने दायर की है. दायर याचिका में केंद्र सरकार के उस अधिसूचना को चुनौती दी है, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के छह अंतरों के गायन को लेकर दिशा निर्देश जारी किए गए है. दायर याचिका में हालिया संशोधन को चुनौती दी गई है, जिसके तहत वंदे मातरम को राष्ट्रीय गान के समान दर्जा दिए जाने का प्रावधान किया गया.

धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत से जुड़ा असंवैधानिक सवाल खड़ा

याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई की ‘वंदे मातरम’ के बाद चार अंतरों में हिंदू देवी देवताओं का स्पष्ट उल्लेख है. ऐसे में इन अंशों का अनिवार्य रूप से गायन कराना संविधान में निहित धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत से जुड़ा असंवैधानिक सवाल खड़ा करता है. बता दें कि केंद्र सरकार ने Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन किया है. संशोधन के जरिए वंदे मातरम को भी राष्ट्रीय गान के साथ उसी कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है. संशोधित प्रावधान के तहत राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकना अथवा ऐसे गायन में शामिल सभा मे व्यवधान पैदा करना दंडात्मक है. इसके लिए तीन साल की जेल, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है.

यह भी पढ़ें-गिरफ्तार होते ही पहला सवाल क्या पूछना है? सुप्रीम कोर्ट ने बता दिया वो मंत्र जिससे बच जाएगी जमानत

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

कोयला तस्करों का नेटवर्क ध्वस्त… झारखंड की मगध-आम्रपाली खदानों में CISF का बड़ा सर्जिकल स्ट्राइक

Jharkhand News: झारखंड की सबसे बड़ी मगध और आम्रपाली खदानों समेत विभिन्न कोयला क्षेत्रों में…

13 minutes ago

नंदन यादव को मिली बैड टच की सजा, जमुई पुलिस ने कैसे किया एनकाउंटर?

Nandan Yadav police encounter in Jamui: बिहार के जमुई जिले में 10वीं की छात्रा के…

16 minutes ago

‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान…’, बच्चों ने मॉर्निंग असेंबली में गाया Hanuman Ansh का गाना, देखें VIDEO

स्कूल की मॉर्निंग असेंबली में सैकड़ों बच्चों ने हाथ जोड़कर ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान’…

21 minutes ago

सेलेब्स की फिटनेस का ये सीक्रेट हुआ वायरल! फैंस भी अपना रहे हैं ये आसान फिटनेस रूटीन

Celebrity Fitness Routine: सेलेब्रिटी फिटनेस रूटीन में नियमित वर्कआउट, वॉकिंग, योग और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे…

29 minutes ago

सुप्रीम कोर्ट से कर्नाटक को राहत, कावेरी जल विवाद पर सोसाइटी की याचिका की खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद मामले में 70 टीएमसी पानी के पुनः आवंटन की…

39 minutes ago

‘पापरहित होकर चलें शुभ मार्ग पर…’, पीएम मोदी ने साझा किया श्लोक, क्या हैं मायने?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऋग्वेद का पावन मंत्र साझा कर पापरहित जीवन, धर्म, सत्य और…

50 minutes ago