भारत का पड़ोसी देश बांग्लादेश एक बार फिर से आंतरिक संघर्ष की ओर बढ़ रहा है. अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार और देश के मुखिया मोहम्मद यूनुस को जिस बदलाव की उम्मीद से लाया गया था वह उस पर खरे नहीं उतर पा रहे हैं. इन सबके बीच सबसे जव्लंतशील मुद्दा है राष्ट्रीय चुनाव.
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में 26 वर्षीय नाहिद इस्लाम के नेतृत्व में अभूतपूर्व छात्र आंदोलन शुरू हुआ जो तेजी से सत्ता विरोधी विद्रोह में बदल गया. हुआ और उतनी ही तेजी से तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना की सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया. अपने पद से हटाए जाने के बाद शेख हसीना को भारत में शरण लेनी पड़ी.
हसीना के भागने से बांग्लादेश में सत्ता का एक बड़ा शून्य पैदा हो गया, क्योंकि पिछले पंद्रह वर्षों से वही सत्ता में थीं. ऐसे में नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को अंतरिम सरकार का नेतृत्व दिया गया, जिसका समर्थन उभरते राजनीतिक कार्यकर्ता नाहिद इस्लाम, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और बांग्लादेश सेना ने किया. नाहिद इस्लाम ने फरवरी 2025 में नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) नाम से पार्टी बनाई.
शेख हसीना के देश से बाहर जाने से आवामी लीग के समर्थक मुश्किल में पड़ गए. यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार पर अवामी लीग के कार्यकर्ताओं और समर्थकों की गिरफ्तारी का आरोप लगा.
इसके अलावा, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हिंसक झड़प के दौरान एक किराना दुकानदार की मौत का मामले में मुकदमा भी दर्ज किया गया. अब अंतरिम सरकार ने हसीना की पार्टी पर प्रतिबंध लगा दिया है और भारत से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रही है.
84 साल के नोबेल विजेता यूनुस को सत्ता में लोकतांत्रिक सुधारों के प्रतीक के रूप में लाया गया था और उन्होंने बांग्लादेश के लोगों से सुधारों का भरोसा भी दिया. हालांकि, समय बीतने और चुनाव, सुधारों और अन्य मुद्दों पर आम सहमति बनाने में उनकी असमर्थता के कारण नागरिकों और समर्थकों की बेचैनी बढ़ रही है, जिसके कारण अब यूनुस और सेना प्रमुख वकर-उज-जमान के बीच तनाव बढ़ गया है.
यूनुस और जमान के बीच मतभेद इतने गहरे हो गए कि यूनुस के इस्तीफे की चर्चा जोर पकड़ने लगी. सेना प्रमुख जमान ने यूनुस प्रशासन को इस साल दिसंबर तक राष्ट्रीय चुनाव कराने की सख्त चेतावनी दी है. इस बीच, बीएनपी ने चुनाव में देरी पर नाराजगी जताई है. अंतरिम प्रमुख यूनुस ने कुछ महीने पहले कहा था कि देश में जून 2025 तक चुनाव करा लिए जाएंगे.
बीएनपी के वरिष्ठ नेता खांडाकर मुशर्रफ हुसैन ने कहा, “अगर सरकार जनता की उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है, तो बीएनपी के लिए अपना समर्थन जारी रखना मुश्किल होगा.” उन्होंने कहा, “चुनाव के लिए स्पष्ट रोडमैप की घोषणा करने को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए.”
BNP भी अपने मेयर उम्मीदवार के तत्काल शपथ ग्रहण की मांग करते हुए ढाका में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन कर रही है. पार्टी का दावा है कि अंतरिम सरकार ने चुनाव आयोग के उस फैसले को बाधित किया है, जिसमें विवादित 2020 मेयर चुनावों में इशराक हुसैन को सही विजेता घोषित किया गया था. उस समय, बीएनपी ने आरोप लगाया था कि प्रतिबंधित अवामी लीग ने चुनावों में धांधली की है.
लगभग 17 करोड़ की आबादी वाला बांग्लादेश अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपदस्थ करने वाले छात्र-नेतृत्व वाले विद्रोह के बाद से राजनीतिक अशांति में है. लोकतांत्रिक सुधारों और तेजी से चुनाव के लिए विभिन्न दलों द्वारा दबाव डाले जाने के कारण विरोध प्रदर्शन जारी है.
देश में फैल रही अशांति और अपने समर्थकों और सेना द्वारा बढ़ती आलोचना के बीच, यूनुस ने निराशा व्यक्त की है और अंतरिम प्रमुख के रूप में पद छोड़ने के अपने इरादे का संकेत दिया है.
यूनुस ने शनिवार दोपहर ढाका में योजना आयोग कार्यालय में सलाहकार परिषद की दो घंटे लंबी अनिर्धारित बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें राजनीतिक तनाव और अंतरिम सरकार की स्थिरता और निरंतरता पर बढ़ती अटकलों के बीच उन्होंने मुख्य सलाहकार के पद से इस्तीफा देने की पेशकश की.
हालांकि, अभी तक इस खबर की अभी तक अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. यूनुस ने कहा कि अगर मैं स्वतंत्र रूप से काम करने में असमर्थ हूं, तो मुझे सत्ता नहीं संभालनी चाहिए.
22 मई को यूनुस से मुलाकात के बाद नाहिद इस्लाम ने बीबीसी बांग्ला को बताया कि यूनुस सच में इस्तीफा देने पर विचार कर रहे हैं. इस बीच, कैबिनेट के एक सदस्य और यूनुस के विशेष सलाहकार ने शुक्रवार को कहा कि सत्ता का शांतिपूर्ण हस्तांतरण सुनिश्चित करने के लिए यूनुस को अंतरिम नेता के रूप में पद पर बने रहने की जरूरत है.
यूनुस के विशेष सहायक और डाक, दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के प्रमुख फैज अहमद तैयब ने फेसबुक पर एक पोस्ट में कहा, “बांग्लादेश और शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक हस्तांतरण के लिए, प्रोफेसर यूनुस को पद पर बने रहने की जरूरत है.”
उन्होंने कहा, “मुख्य सलाहकार पद छोड़ने वाले नहीं हैं.” उन्होंने यह भी कहा, “उन्हें सत्ता की लालसा नहीं है.”
अब यह देखना होगा कि क्या प्रोफेसर यूनुस अपने समर्थकों पर दबाव बनाने के लिए अपने इस्तीफे की धमकी दे रहे हैं या वास्तव में पद छोड़ने की योजना बना रहे हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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