डीपसीक (Deepseek) नाम का एक नया चीनी एआई मॉडल पिछले कुछ दिनों से चर्चा में है. यह मॉडल तकनीक जगत में छाया हुआ है. चैटजीपीटी (ChatGPT), जेमिनी (Gemini) और क्लाउड एआई (Claude AI) जैसे बड़े नामों को चुनौती देते हुए, डीपसीक ने अपनी अलग पहचान बनाई है.
डीपसीक का नया एआई मॉडल R1 हाल ही में लॉन्च हुआ. लॉन्च के कुछ ही दिनों में, यह अमेरिका का सबसे अधिक डाउनलोड किया जाने वाला मुफ्त ऐप बन गया. बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस एआई मॉडल की लोकप्रियता ने अमेरिकी टेक कंपनियों को हिलाकर रख दिया है.
डीपसीक के कारण, दुनिया की प्रमुख AI चिप निर्माता कंपनी एनवीडिया (Nvidia) के शेयर में लगभग 17% की गिरावट आई और इसके मार्केट वैल्यू में 588.8 अरब डॉलर का नुकसान हुआ. यह अब तक किसी भी स्टॉक का एक दिन में हुआ सबसे बड़ा नुकसान है. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट (Microsoft) और मेटा (Meta) जैसी कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखी गई है.
डीपसीक चीन के हांग्जो में स्थित एक उभरती हुई एआई रिसर्च लैब है. इस कंपनी की शुरुआत 2023 में लियांग वेनफेंग ने की थी. लियांग वेनफेंग एक जाने-माने इंजीनियर और बिजनेसमैन हैं, जिन्हें एआई और क्वांटिटेटिव फाइनेंस में अच्छा खासा अनुभव है.
डीपसीक की टीम में चीन के टॉप विश्वविद्यालयों (जैसे कि सिंघुआ और पेकिंग विश्वविद्यालय) से निकले युवा और प्रतिभाशाली इंजीनियर काम कर रहे हैं. कंपनी का फोकस ऐसे एआई मॉडल विकसित करना है, जो ओपन-सोर्स और लागत-कुशल (cost efficient) हों.
डीपसीक का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी कम लागत में हाई परफॉरमेंस करने की क्षमता है. इसके R1 मॉडल को विकसित करने में केवल 60 लाख डॉलर खर्च हुए. इसकी तुलना में, अन्य एआई कंपनियां अपने मॉडल पर अरबों डॉलर खर्च करती हैं.
डीपसीक के ओपन-सोर्स मॉडल ने डेवलपर्स को नई संभावनाएं दी हैं. कंपनी का कहना है कि उनका R1 मॉडल मानव सोच की नकल करने में सक्षम है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह किसी सवाल का जवाब देने से पहले अपने उत्तर का तर्क भी प्रदान करता है.
डीपसीक की लोकप्रियता का मुख्य कारण इसका मुफ्त होना है. अन्य एआई मॉडल, जैसे चैटजीपीटी और क्लाउड एआई, प्रीमियम फीचर्स के लिए सशुल्क सब्सक्रिप्शन की मांग करते हैं. गूगल जेमिनी भले ही मुफ्त हो, लेकिन इसका मुफ्त संस्करण पुराने मॉडल तक सीमित है. इसके विपरीत, डीपसीक पूरी तरह से असीमित मुफ्त उपयोग की पेशकश करता है.
डीपसीक की सफलता का असर अमेरिकी टेक कंपनियों पर साफ देखा जा सकता है. एनवीडिया, मेटा, और माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियों को अब चीनी एआई से मुकाबला करना पड़ रहा है. विश्लेषकों का मानना है कि कम लागत वाले चीनी विकल्प अमेरिकी कंपनियों को अपनी रणनीतियों पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर सकते हैं.
डीपसीक का उभरना ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका ने चीन पर सेमीकंडक्टर निर्यात को लेकर प्रतिबंध लगाए हैं. इसका मकसद चीन की एआई क्षमताओं को सीमित करना था. लेकिन डीपसीक ने इन चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए साबित कर दिया कि सीमित संसाधनों में भी उन्नत तकनीक विकसित की जा सकती है.
-भारत एक्सप्रेस
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