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सौर मं​डल का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह यूरेनस: 17 घंटे का होता है दिन, जानें कैसे खोजा गया और क्या हैं जीवन की संभावनाएं

यूरेनस (Uranus) हमारे सौर मंडल (Solar System) का तीसरा सबसे बड़ा ग्रह (Planet) है. यह पृथ्वी (Earth) से लगभग चार गुना चौड़ा है. यूरेनस एक बहुत ठंडा और हवादार ग्रह है. यह धुंधले छल्लों और दो दर्जन से अधिक छोटे चंद्रमाओं से घिरा हुआ है.

बड़ी मात्रा में मीथेन के कारण यूरेनस का रंग नीला-हरा है, जो लाल प्रकाश को अवशोषित करता है, लेकिन नीले रंग को वापस अंतरिक्ष में परावर्तित होने देता है.

13 छल्ले और 28 चांद से घिरा

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, बर्फ का यह विशालकाय ग्रह 13 धुंधले छल्लों और 28 छोटे चंद्रमाओं से घिरा हुआ है. यूरेनस अपनी कक्षा के तल से लगभग 90 डिग्री के कोण पर घूमता है. इस अनोखे झुकाव के कारण यूरेनस एक तरफ घूमता हुआ दिखाई देता है, जो एक लुढ़कती गेंद की तरह सूर्य की परिक्रमा करता है.

दूरबीन से खोजा गया पहला ग्रह

यूरेनस पहला ग्रह था, जिसे दूरबीन की सहायता से खोजा गया था. इसकी खोज साल 1781 में जर्मन खगोलशास्त्री विलियम हर्शेल (William Herschel) ने की थी, हालांकि उन्होंने शुरू में सोचा था कि यह या तो धूमकेतु है या फिर तारा. दो साल बाद खगोलशास्त्री जोहान एलर्ट बोडे (Johann Elert Bode) की रिसर्च के बाद इसे एक नए ग्रह के रूप में स्वीकार किया गया.

विलियम हर्शेल ने अपनी खोज का नाम किंग जॉर्ज तृतीय के नाम पर जॉर्जियम सिडस रखने की असफल कोशिश की थी. हालांकि इसके बजाय ग्रह का नाम यूरेनस रखा गया, जो आकाश के यूनानी देवता हैं, जैसा कि जोहान बोडे ने सुझाया था.


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17 घंटे का एक दिन

यूरेनस पर एक दिन में लगभग 17 घंटे होते हैं. यह वह समय है जो यूरेनस को अपनी धुरी पर एक चक्कर लगाने में लगता है. वहीं यूरेनस सूर्य के चारों ओर एक पूरी परिक्रमा (यूरेनियन समय में एक वर्ष) लगभग 84 पृथ्वी वर्ष (30,687 दिन) में पूरी करता है.

यूरेनस को खोजने वाले जर्मन खगोलशास्त्री विलियम हर्शेल.

1.8 अरब मील (2.9 अरब किलोमीटर) की औसत दूरी से यूरेनस सूर्य से लगभग 19 खगोलीय इकाइयों (Astronomical Units) की दूरी पर है. एक खगोलीय इकाई, जिसे AU कहा जाता है, सूर्य से पृथ्वी की दूरी है. इस दूरी से सूर्य से यूरेनस तक पहुंचने में सूर्य के प्रकाश को 2 घंटे और 40 मिनट लगते हैं.

यूरेनस सौर मंडल के उन दो ग्रहों में से एक है, जो अधिकांश ग्रहों की तुलना में विपरीत दिशा में घूमता है. दूसरा ग्रह शुक्र है. 31,763 मील (51,118 किलोमीटर) के भूमध्यरेखीय व्यास के साथ यूरेनस पृथ्वी से चार गुना चौड़ा है.

यूरेनस के चंद्रमा

यूरेनस के 28 ज्ञात चंद्रमा हैं, जिनमें पांच प्रमुख चंद्रमा – मिरांडा, एरियल, अम्ब्रिएल, टाइटेनिया और ओबेरॉन – शामिल हैं. जहां अन्य ग्रहों की परिक्रमा करने वाले अधिकांश उपग्रहों के नाम ग्रीक या रोमन पौराणिक कथाओं से लिए गए हैं, यूरेनस के चंद्रमा विलियम शेक्सपियर और अलेक्जेंडर पोप की कृतियों के पात्रों के नाम पर रखे जाने के कारण अद्वितीय हैं.

यूरेनस के सभी आंतरिक चंद्रमा लगभग आधे पानी की बर्फ और आधे चट्टान से बने प्रतीत होते हैं. बाहरी चंद्रमाओं की संरचना अज्ञात है, लेकिन वे संभवत: क्षुद्रग्रह हैं. सबसे हाल ही में खोजा गया चंद्रमा पहली बार नवंबर 2023 में देखा गया था. इसे वर्तमान में S/2023 U1 नाम दिया गया है.

यूरेनस के रिंग

यूरेनस के दो सेट रिंग हैं. नौ रिंगों की आंतरिक प्रणाली में ज्यादातर गहरे भूरे रंग के रिंग हैं. दो बाहरी रिंग हैं. सबसे अंदर वाला लाल रंग का है और बाहरी रिंग शनि ग्रह के E रिंग की तरह नीला है.

ग्रह से बढ़ती दूरी के क्रम में रिंग को ज़ीटा, 6, 5, 4, अल्फा, बीटा, एटा, गामा, डेल्टा, लैम्ब्डा, एप्सिलॉन, नू और म्यू कहा जाता है. कुछ बड़े रिंग महीन धूल की पट्टियों से घिरे हुए हैं.


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यूरेनस की बनावट

यूरेनस बाहरी सौर मंडल में दो बर्फीले ग्रहों में से एक है. दूसरा ग्रह नेपच्यून है. ग्रह का अधिकांश (80% या उससे अधिक) द्रव्यमान एक छोटे से चट्टानी कोर के ऊपर ‘बर्फीले’ पदार्थों – पानी, मीथेन और अमोनिया – के गर्म घने तरल पदार्थ से बना है. कोर के पास यह 9,000 डिग्री फारेनहाइट (4,982 डिग्री सेल्सियस) तक गर्म हो जाता है.

यूरेनस अपने पड़ोसी नेपच्यून से व्यास में थोड़ा बड़ा है, फिर भी द्रव्यमान में छोटा है. यह दूसरा सबसे कम घनत्व वाला ग्रह है; शनि सभी में सबसे कम घनत्व वाला है.

यूरेनस और उसके चंद्रमा.

सबसे ठंडा ग्रह

आप सोच सकते हैं कि सौर मंडल का सबसे ठंडा ग्रह नेपच्यून होगा, क्योंकि यह सूर्य से सबसे अधिक दूरी पर स्थित है. नेपच्यून सूर्य से अविश्वसनीय रूप से तीन अरब मील दूर है. हालांकि, सबसे ठंडा ग्रह नेपच्यून नहीं, बल्कि यूरेनस है.

भले ही यूरेनस नेपच्यून की तुलना में सूर्य से एक अरब मील अधिक निकट है. यूरेनस सौर मंडल में अब तक मापे गए सबसे ठंडे तापमान का रिकॉर्ड रखता है. जो बहुत ठंडा यानी -224 डिग्री सेल्सियस है. नेपच्यून पर भी तापमान बहुत ठंडा होता है. आमतौर पर -214 डिग्री सेल्सियस के आसपास, लेकिन यूरेनस उससे भी आगे है.

यूरेनस का वायुमंडल

यूरेनस का वायुमंडल ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम से बना है, जिसमें थोड़ी मात्रा में मीथेन और पानी तथा अमोनिया के अंश हैं. मीथेन यूरेनस को उसका खास नीला रंग देता है.

यूरेनस का ग्रहीय वायुमंडल, जिसका न्यूनतम तापमान -224.2 डिग्री सेल्सियस है, इसे कुछ स्थानों पर नेपच्यून से भी ठंडा बनाता है. यूरेनस पर हवा की गति 560 मील प्रति घंटे (900 किलोमीटर प्रति घंटे) तक पहुंच सकती है. भूमध्य रेखा पर हवाएं प्रतिगामी होती हैं, जो ग्रह के घूमने की विपरीत दिशा में चलती हैं.

ग्रह पर उतरना कितना मुश्किल

यूरेनस को इसके वायुमंडल में मीथेन गैस से अपना नीला-हरा रंग मिलता है. सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से होकर गुजरता है और यूरेनस के बादलों से टकराकर वापस परावर्तित होता है. मीथेन गैस प्रकाश के लाल हिस्से को अवशोषित कर लेती है, जिसके परिणामस्वरूप यह नीले-हरे रंग का दिखता है.

बर्फ के विशालकाय ग्रह के रूप में यूरेनस की कोई वास्तविक सतह नहीं है. ग्रह पर ज्यादातर तरल पदार्थ घूमते रहते हैं, जबकि अंतरिक्ष यान के लिए यूरेनस पर उतरने के लिए कोई जगह ठोस जगह नहीं, वह इसके वायुमंडल से बिना किसी नुकसान के उड़ भी नहीं पाएगा. अत्यधिक दबाव और तापमान धातु के अंतरिक्ष यान को नष्ट कर देंगे.

जीवन के अनुकूल है या नहीं

यूरेनस का वातावरण जीवन के लिए अनुकूल नहीं है, जैसा कि हम जानते हैं. इस ग्रह की विशेषता वाले तापमान, दबाव और पदार्थ संभवत: इतने चरम और अस्थिर हैं कि जीवों के लिए अनुकूल होना मुश्किल है.

यूरेनस एकमात्र ऐसा ग्रह है, जिसका भूमध्य रेखा इसकी कक्षा के लगभग समकोण पर है, जिसका झुकाव 97.77 डिग्री है. यह बहुत पहले पृथ्वी के आकार की किसी वस्तु से टकराव का परिणाम हो सकता है. इस अनोखे झुकाव के कारण यूरेनस पर सौर मंडल में सबसे चरम मौसम होते हैं.

21 साल लंबी और अंधेरी सर्दियां

प्रत्येक यूरेनियन वर्ष के लगभग एक चौथाई भाग के लिए, सूर्य इस ग्रह प्रत्येक ध्रुव पर सीधे चमकता है, जिससे ग्रह का दूसरा आधा भाग 21 साल लंबी और अंधेरी सर्दियों में डूबा रहता है. अगर कल्पना की जाए तो कोई इंसान जो सूर्यास्त के समय इसके ध्रुव के पास पैदा हुआ है तो उसे अपना पहला वसंत सूर्योदय देखने के लिए 42 साल इंतजार करना होगा.

इन खगोलीय विषमताओं और चरम सीमाओं के कारण आश्चर्यजनक रूप से यूरेनस के करीब पहुंचने के लिए बहुत कम प्रयास किए गए हैं. 1986 में जब यूएस वॉयजर-2 यान सौर मंडल के अपने दौरे पर था तो इस ग्रह के करीब से गुजरा. इसने हाइड्रोजन, हीलियम और मीथेन के वायुमंडल, चंद्रमाओं के समृद्ध परिवार और एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र के साथ एक विशाल, सुविधाहीन, हल्के नीले रंग के इस ग्रह को देखा था.

-भारत एक्सप्रेस

Prashant Verma

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