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Varanasi: अन्नकूट प्रसाद बनाने में जुटे 85 कारीगर, 511 कुंटल के व्यंजनों से लगेगा भोग, दीवाली पर होते हैं स्वर्णमयी अन्नपूर्णा माता के दर्शन

मुख्य कारीगर ने बताया कि तीन पीढ़ी से कार्य करती आ रही है, जिसमे 30 महिला व अन्य पुरुष होते हैं. कच्चा पक्का मिला कर 511 कुंतल का भोग माता को लगाया जाता है.

मां अन्नपूर्णा को भोग लगाने के लिए प्रसाद बनातीं महिलाएं

-सौरभ अग्रवाल

Varanasi: साल में सिर्फ एक बार दीवाली के दौरान ही काशी में स्वर्णमयी अन्नपूर्णा माता के दर्शन होते हैं. इस बार धनतेरस के दिन यानी 10 नवम्बर को माता के मंदिर के पट खुलेंगे और मां भक्तों को दर्शन देंगी. तो वहीं उनके भोग के लिए मंदिर में तैयारी जोरों पर चल रही है. यहां अन्नकूट प्रसाद तैयार करने के लिए 85 कारीगर जुटे हैं और इस बार मां को 511 कुंटल व्यंजनों का भोग लगाया जाएगा, जिसमें सूरन का लड्डू सबसे खास होगा.

भक्त इस बार 10 से लेकर 14 नवम्बर अन्नकूट वाले दिन तक स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा के दर्शन कर सकेंगे. शुक्रवार को स्वर्णमयी अन्नपूर्णा माता के 5 दिवसीय दर्शन की शुरुआत होगी. इस खास मौके के लिए पूरे मन्दिर परिसर को रंग बिरंगे झालरों से सराबोर कर दिया गया है. धनतेरस के एक दिन पूर्व आज रात्रि में पूरे मन्दिर को सुगन्धित फूलों से सजा दिया जाएगा. माता दरबार मे 511 कुंतल से भोग लगेगा, इसके लिए दिन-रात तैयारी चल रही है. अन्नपूर्णा दरबार में प्रसाद बनाने का कार्य जोरों पर है. इसमें लगभग 85 कारीगर लगे हैं. मुख्य कारीगर ने बताया कि तीन पीढ़ी से कार्य करती आ रही है, जिसमे 30 महिला व अन्य पुरुष होते हैं. कारीगर ने बताया कि, कच्चा-पक्का मिला कर 511 कुंतल का भोग लगाया जाता है. आस पास जिलों से भी कारीगरों को बुलाया जाता है. इसमे कुछ कारीगर तो पिछले 15 साल से आ रहे हैं.

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40 तरह का मीठा और 16 तरह की होगी नमकीन

कारीगर ने बताया कि इस बार खास सूरन का भी लड्डू तैयार किया जा रहा है. इसके साथ ही 40 तरह का मीठा व 16 तरह की नमकीन होगा. इस बार मिठाई से झांकी बनी होगी भक्तों को अन्नकूट झांकी दर्शन में दिखेगा. तो वहीं भक्तों के दर्शन में कोई समस्या न हो, इसके लिए अन्नपूर्णा मंदिर प्रशासन की तैयारी पूरी हो गई है. मंदिर में अस्थाई सीढ़ियां बन कर तैयार है. मंदिर प्रवेश होते ही बाएं हाथ को सीढ़ी के माध्यम से स्वर्ण माता अन्नपूर्णा का दर्शन होगा. मान्यता है कि मां अन्नपूर्णा और महादेव की कृपा से काशी में कोई भी भूख नहीं सोता है, इसलिए धनतेरस से लेकर अन्नकूट तक पांच दिवसीय महापर्व का आयोजन जहां एक ओर श्री काशी विश्वनाथ धाम में स्थित माता अन्नपूर्णा के दरबार में किया जा रहा है. तो वहीं काशी विश्वनाथ धाम के ठीक बगल में स्थित स्वर्णमयी माता अन्नपूर्णा मंदिर में भी 10 से 14 नवम्बर तक भक्तों को दर्शन होंगे.

-भारत एक्सप्रेस

 



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