Chicken rate in Pakistan: रमजान के पवित्र महीने में जब पाकिस्तानी जनता इबादत और त्योहार की तैयारियों में लगी है, तब महंगाई ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. खासतौर पर चिकन की कीमतें बेकाबू हो गई हैं, जो तेजी से 800 रुपये प्रति किलो की ओर बढ़ रही हैं. कराची समेत कई शहरों में लोग ऊंचे दामों से परेशान हैं, वहीं दुकानदार सरकारी दरों को अव्यावहारिक बताकर अपनी मजबूरी जता रहे हैं.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाजार में सरकारी दरों और असल कीमतों में बड़ा फर्क देखने को मिल रहा है. जीवित मुर्गे की आधिकारिक कीमत 420 रुपये प्रति किलो तय की गई है लेकिन यह बाजार में 500 रुपये किलो तक बिक रहा है. इसी तरह चिकन मीट का सरकारी भाव 650 रुपये किलो है, लेकिन दुकानों पर यह 760 रुपये किलो तक बेचा जा रहा है.
दुकानदारों का कहना है कि वे खुद 470 रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रहे हैं, तो फिर सस्ते में कैसे बेचें? इस महंगाई ने गरीब और मध्यम वर्ग के लिए चिकन खरीदना मुश्किल कर दिया है.
सस्ते विकल्पों की तलाश में लोग
कीमतें लगातार बढ़ने से आम आदमी की रसोई से चिकन लगभग गायब हो गया है. लोग मजबूरी में सस्ते विकल्प तलाश रहे हैं. कराची के बाजार में एक महिला ने निराशा में कहा कि वह चिकन खरीदने आई थी, लेकिन अब सिर्फ लीवर लेकर जाना पड़ेगा.
महंगाई की मार- आगे क्या होगा?
सिर्फ एक महीने पहले चिकन 500-550 रुपये किलो मिल रहा था, लेकिन अब इसके दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं. रमजान के दौरान मांग बढ़ने से कीमतें और चढ़ने की आशंका है.
महंगाई से निपटने के लिए लोग अलग-अलग जुगाड़ निकाल रहे हैं. कुछ वैकल्पिक प्रोटीन स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं, तो कुछ सरकार से दखल देने की मांग कर रहे हैं. अब सवाल यह है कि क्या हुकूमत इस संकट से निपटने के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी, या जनता को खुद ही कोई नया उपाय खोजना पड़ेगा?
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-भारत एक्सप्रेस
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