आलोक जोशी फाइल फोटो.
Indo-Pak बॉर्डर पर आतंकी खतरे और हालिया सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB) का पुनर्गठन किया है. इस पुनर्गठित बोर्ड के अध्यक्ष के रूप में पूर्व रॉ प्रमुख आलोक जोशी को नियुक्त किया गया है.
इस नए बोर्ड में शामिल किए गए अनुभवी अधिकारी
7 सदस्यों वाले इस नए बोर्ड में सेना, पुलिस और विदेश सेवा के अनुभवी अधिकारी शामिल किए गए हैं. रक्षा सेवाओं से सेवानिवृत्त एयर मार्शल पी एम सिन्हा, लेफ्टिनेंट जनरल ए के सिंह और रियर एडमिरल मोंटी खन्ना को बोर्ड में स्थान मिला है. भारतीय पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त राजीव रंजन वर्मा और मनमोहन सिंह को भी बोर्ड में शामिल किया गया है. इसके अलावा भारतीय विदेश सेवा से सेवानिवृत्त अधिकारी बी वेंकटेश वर्मा भी इस बोर्ड का हिस्सा बनाए गए हैं.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का मुख्य उद्देश्य
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का मुख्य उद्देश्य सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीतियों, विदेश नीति से जुड़े सुरक्षा पहलुओं और रक्षा नीति पर विशेषज्ञ सलाह प्रदान करना है. हाल ही में पाकिस्तान से जुड़े आतंकी हमलों में वृद्धि, मॉस्को में हुआ आतंकी हमला और ईरान-पाकिस्तान सीमा पर बढ़ते तनाव जैसे घटनाक्रमों को देखते हुए इस बोर्ड की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड का कार्य
बोर्ड अब आतंकवाद से निपटने, सीमा पार से हो रहे हमलों के खिलाफ ठोस रणनीति बनाने तथा भारत की विदेश और रक्षा नीतियों को बदलते वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप मजबूत दिशा देने का कार्य करेगा. वर्तमान परिदृश्य में यह पुनर्गठन भारत की सक्रिय और सशक्त राष्ट्रीय सुरक्षा नीति की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है.
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड (NSAB)
स्थापना:
•वर्ष 1998 में परमाणु परीक्षणों (पोखरण-II) के बाद भारत सरकार द्वारा स्थापित किया गया.
उद्देश्य:
•सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा, रणनीतिक मामलों और विदेश नीति पर सलाह देना.
•भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों के लिए दीर्घकालिक रणनीति तैयार करना.
कार्य:
•रक्षा, विदेश नीति, आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा जैसे विषयों पर अध्ययन और सुझाव देना.
•राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (NSC) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) को सलाह देना.
•उभरती तकनीकों (AI, साइबर, ड्रोन आदि) से संबंधित सुरक्षा पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार करना.
•वैश्विक और क्षेत्रीय खतरों का विश्लेषण कर नीतिगत सिफारिशें करना.
संरचना:
•चेयरमैन के नेतृत्व में एक बोर्ड, जिसमें सेना, पुलिस, विदेश सेवा, खुफिया एजेंसियों, विज्ञान एवं तकनीक क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होते हैं.
•सदस्यों का कार्यकाल तय नहीं होता; विशेषज्ञता के आधार पर नामांकित किए जाते हैं.
वर्तमान पुनर्गठन (2025):
•चेयरमैन: आलोक जोशी (पूर्व रॉ प्रमुख)
सदस्य:
•एयर मार्शल पी एम सिन्हा (रिटायर्ड)
•लेफ्टिनेंट जनरल ए के सिंह (रिटायर्ड)
•रियर एडमिरल मोंटी खन्ना (रिटायर्ड)
•राजीव रंजन वर्मा (रिटायर्ड IPS)
•मनमोहन सिंह (रिटायर्ड IPS)
•बी वेंकटेश वर्मा (रिटायर्ड IFS)
वर्तमान संदर्भ:
•पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद, मॉस्को हमला, ईरान-पाक तनाव के बीच NSAB की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.
•आतंकवाद से निपटने, सीमा सुरक्षा और विदेश नीति के समन्वय के लिए नई रणनीतियां तैयार करना बोर्ड की प्राथमिकता होगी.
महत्व:
•दीर्घकालिक सुरक्षा दृष्टिकोण तय करना.
•त्वरित संकट प्रबंधन में सहायता देना.
•भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति को मजबूत करना.
-भारत एक्सप्रेस
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