Jammu Kashmir: पहलगाम की बैसरन घाटी में हुई आतंकी घटना के बाद पर्यटन उद्योग को खतरा मंडरा है . भारत पाक युद्ध विराम के बाद शांति की पहल शुरू होने से पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों और कारोबारियों में उम्मीद की किरण जगी है.
इस वर्ष 2025 जनवरी से लेकर पहलगाम हमले तक जम्मू कश्मीर में 6 लाख पर्यटक आ चुके थे. इस बार पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा पर्यटक आने की उम्मीद थी । आंकड़ों की बात करें तो जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में हर साल पर्यटकों में काफी इजाफा हो रहा था. साल 2022 में 1करोड़ 90 लाख पर्यटक ,साल 2023 में 2 करोड़ 11लाख पर्यटक , साल 2024 में 2 करोड़ 36 लाख पर्यटक जम्मू कश्मीर आए.
जम्मू कश्मीर वासियों को इस बार उम्मीद थी कि पर्यटकों की संख्या पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी . जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के बाद और केंद्र सरकार के प्रयासों से घाटी में शांति कायम हो गई थी जिससे कश्मीर के परंपरागत हस्तशिल्पियों , खच्चर वालों , ट्रैवल एजेंसियों , होटल , शिकारों सहित अन्य लोगों की आय में काफी इजाफा हो गया था लेकिन पहलगाम की घटना ने पूरे जम्मू कश्मीर की अर्थव्यवस्था को अस्त व्यस्त कर दिया.
होता है सेब और केसर का एक्सपोर्ट
जम्मू कश्मीर की सुंदरता , मौसम , झरने , वादियां , सांस्कृतिक विरासत पर्यटकों को अपनी और खींच लेती है . देश की अर्थव्यवस्था में जम्मू कश्मीर के पर्यटन उद्योग का बड़ा योगदान है. जम्मू में कई वर्षों से आतंकवाद की घटनाएं बंद हो गई थीं जिससे जम्मू कश्मीर अमन चैन के रास्ते पर था जिसके कारण पर्यटन उद्योग से लोगों की आय में काफी इजाफा हुआ. सेब और केसर के एक्सपोर्ट के कारण अंतराष्ट्रीय बाजार में भी यहां के किसानों को अच्छी कीमत मिली और घाटी में रोजगार के अवसर बढ़े और बेरोजगारी खत्म हुई.
जम्मू कश्मीर के बढ़ते पर्यटन उद्योग का कई बार था जिक्र
पर्यटकों की संख्या में लगातार हो रहे इजाफे से मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला भी काफी उत्साहित थे. इस बार सदन में अपने बजट भाषण में जम्मू कश्मीर में बढ़ रहे पर्यटन उद्योग का कई बार जिक्र किया. उन्होंने कहा कि मुझे पूरी उम्मीद है कि पर्यटन उद्योग के कारण जीडीपी 7 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी.
हमले के बाद बंद हो गए थे 48 पर्यटक स्थल
पहलगाम की आतंकी घटना के बाद जम्मू कश्मीर के 87 पर्यटक स्थलों में से 48 पर्यटक स्थल पर्यटकों के लिए बंद कर दिए गए थे और जो 39 पर्यटक स्थल खुले भी थे तो वहां खौफ के कारण पर्यटक नहीं आ रहे थे. जम्मू कश्मीर के लोग जानते हैं कि आतंकवाद उनके हित में नहीं है. भारत पाक युद्ध विराम के बाद उनको फिर से उम्मीद जागी है कि घाटी में शांति कायम होगी और पर्यटकों की भीड़ फिर यहां आएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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