राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी साजिश मामले (RC-05/2022/NIA/JMU) के तहत सोमवार को विभिन्न जिलों में 32 स्थानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया. यह मामला पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठनों और उनके ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) द्वारा जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश से जुड़ा है.
एनआईए के अनुसार, ये संगठन – जैसे लश्कर-ए-तैयबा (LeT), जैश-ए-मोहम्मद (JeM), हिज्ब-उल-मुजाहिदीन (HM), अल-बद्र और उनके फ्रंट ग्रुप्स जैसे TRF, ULFJ&K, MGH, JKFF और PAAF – सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए भारत में युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलने का काम कर रहे हैं.
•छापे श्रीनगर, पुलवामा, शोपियां, बारामुला, डोडा, रियासी, किश्तवाड़, रामबन और अन्य जिलों में मारे गए.
•तलाशी अभियान के दौरान कई डिजिटल डिवाइस, आपत्तिजनक दस्तावेज और आतंकी गतिविधियों से जुड़ी सामग्री बरामद की गई है.
•जांच में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलर ड्रोन और सोशल मीडिया के जरिए हथियार, विस्फोटक और फंडिंग भेजने की कोशिश में लगे हैं.
•स्थानीय ओवरग्राउंड वर्कर्स और कथित हाइब्रिड आतंकियों की मदद से इन गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था.
एनआईए ने यह मामला 21 जून 2022 को दर्ज किया था और अब तक कई बार जम्मू-कश्मीर के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी कर चुकी है. जांच एजेंसी का लक्ष्य इन आतंकी मॉड्यूल्स को खत्म करना, नेटवर्क को ध्वस्त करना और युवाओं को कट्टरपंथी संगठनों से दूर रखना है.
एनआईए के अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई भविष्य में होने वाले संभावित आतंकी हमलों को रोकने और जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है. सरकार और सुरक्षा एजेंसियों का यह स्पष्ट संदेश है कि आतंक और उसके समर्थकों के लिए भारत में कोई जगह नहीं है.
-भारत एक्सप्रेस
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