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झारखंड महुआगढ़ी कोल ब्लॉक के आवंटन मामले में निदेशक मनोज जायसवाल दोषी करार

झारखंड महुआगढ़ी कोल ब्लॉक मामले में निदेशक मनोज जायसवाल दोषी, पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता सहित अन्य बरी. कोर्ट ने जेआईपीसीएल पर धारा 120बी, 420 के तहत दोष सिद्ध किया. सजा पर बहस 8 जुलाई को.

delhi highCourt
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Jharkhand Mahuagari Coal Block Case: झारखंड महुआगढ़ी कोल ब्लॉक के आवंटन में कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में पूर्व कोयला सचिव एच सी गुप्ता, पूर्व संयुक्त सचिव के एस क्रोफा और कोयला आवंटन निदेशक के सी सामरिया को बरी कर दिया है.

स्पेशल न्यायाधीश संजय बंसल ने यह फैसला सुनाया है. कोर्ट ने फर्म जेआईपीसीएल और उसके निदेशक मनोज कुमार जयसवाल को आईपीसी की धारा 120बी के साथ धारा 420 सहित अन्य धाराओं के तहत दोषी करार दिया है. 8 जुलाई को सजा पर बहस होगी. दर्ज एफआईआर में आरोप लगाया गया था कि जेआईपीसीएल और उसके निदेशक मनोज कुमार जयसवाल ने महुआगढ़ी कोल ब्लॉक के आवंटन में अनुचित लाभ प्राप्त करने के लिए अपने आवेदन में तथ्यों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया और छुपाया. इसमें सीबीआई ने 18 गवाहों से पूछताछ की थी.

सीबीआई ने 2006-09 के दौरान निजी कंपनियों को कोयला ब्लॉक के आवंटन के संबंध में कोयला मंत्रालय के भीतर कथित भ्रष्टाचार की जांच की थी. इससे पहले कोर्ट ने झारखंड के बृंदा, सिसई और मेराल में 2005 में अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर को कोयला ब्लॉक आवंटन के मामले में कंपनी अभिजीत इंफ्रास्ट्रक्चर के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज कुमार जायसवाल को चार साल की सजा और पूर्व डायरेक्टर रमेश कुमार जायसवाल को तीन साल की सजा सुनाई थी.

साथ ही कोर्ट ने कंपनी पर 30 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया था. बता दें कि यूपीए 2 के दौरान यह घोटाला सामने आया था. जिसमें एक पूर्व प्रधानमंत्री, एक पूर्व मुख्यमंत्री, एक सांसद और दो पूर्व कोयला सचिवों के नाम शामिल है. सीएजी ने देश को 1.86 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान लगाया है और सुप्रीम कोर्ट ने 1993से सभी कोयला ब्लॉक आवंटन को अवैध घोषित कर दिया था.



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