दिल्ली हाई कोर्ट ने महिला पायलट की नियुक्ति से संबंधित मामले में बड़ा आदेश दिया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार ने वायु सेना पायलट के पद पर महिला उम्मीदवार को नियुक्त करने का आदेश दिया है. जस्टिस सी. हरिशंकर और जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अब वह दौर नहीं रह जब पुरुष और महिला उम्मीदवारों के बीच में भेदभाव किया जा सके. कोर्ट ने कहा कि भर्ती के दौरान तय की गई शर्ते पूरी करने वाले सभी उम्मीदवारों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए.
कोर्ट ने कहा कि भर्ती के लिए पदों का विज्ञापन देते समय अधिकारियों को नियम व शर्ते योग्यताएं और अन्य शर्ते शामिल करने की छूट है, जिन्हें पूरा करने पर ही उम्मीदवार प्रवेश के लिए योग्य हो सकता है.
भर्ती में लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाएगा- कोर्ट
17 मई 2023 को यूपीएससी ने सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अधिसूचना निकाली. एयरफोर्स में कुल 92 रिक्तियां थी. इनमें से 2 पद महिलाओं के लिए आरक्षित थे, बाकी 90 पद सभी के लिए खुले थे. यह याचिका गुरुग्राम के पटौदी में दौलताबाद की रहने वाली अर्चना ने दायर की थी. अर्चना ने दायर याचिका में कहा है कि मेरिट में सातवें नंबर पर होने और फिट-टू-फ्लाई का प्रमाणपत्र होने के बावजूद भी लड़कीं होने के आधार पर चयन नहीं करना भेदभावपूर्ण है. मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि शेष 90 सीटें केवल पुरुष उम्मीदवारों के लिए थी.
मेरिट सूची के आधार पर महिला को मिलेगा मौका
उनका कहना था कि इन खाली पदों को अन्य भर्ती प्रक्रियाओं जैसे एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट और संयुक्त रक्षा सेवा परीक्षा के जरिए भरा जाएगा. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि महिला उम्मीदवारों के लिए निर्धारित की गई 90 रिक्तियों में से 20 रिक्तियां खाली रह गई.
याचिकाकर्ता महिला उम्मीदवारों की मेरिट सूची में उन दो उम्मीदवारों के बाद सातवें स्थान पर हैं, जिन्हें दो निर्धारित रिक्तियों के लिए चुना गया, इसलिए बाकी 20 रिक्तियों में से एक पर याचिकाकर्ता को नियुक्त न करने का कोई आधार नहीं है.
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