China Military Parade 2025: चीन की सैन्य ताकत जिस तरह तेजी से बढ़ रही है, उससे पूरी दुनिया न केवल एशिया बल्कि अमेरिका तक को चिंता में डाल दिया है. हाल ही में बीजिंग में हुई भव्य सैन्य परेड में चीन ने अपने कई एडवांस्ड हथियारों की झलक पूरी दुनिया को दिखाई है. इस परेड में चीन ने ऐसे हथियारों का प्रदर्शन किया, जिनकी क्षमता अमेरिका महाद्वीप तक पहुंचकर हमला करने की है.
दुनिया की सबसे बड़ी सेनाओं में गिनी जाने वाली पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के पास आज कई खास हथियारों का विशाल भंडार है. अमेरिकी रक्षा विभाग की 2024 की रिपोर्ट बताती है कि 2025 तक चीन के पास करीब 600 परमाणु हथियार होंगे. इनमें से अधिकतर हथियार बैलिस्टिक मिसाइलों, परमाणु पनडुब्बियों और रणनीतिक बॉम्बर विमानों पर तैनात किए जा रहे हैं.
चीन के हथियारों की खास विशेषताएं
- DF-21A/DF-41 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) 11,000 से 15,000 किलोमीटर तक अमेरिका के किसी भी हिस्से तक पहुंच सकती है. ये चीन की DF-41 दुनिया की सबसे लंबी रेंज मिसाइलों में से एक है.
- वहीं JL-3 समुद्री लॉन्च बैलिस्ट मिसाइल (SLBM) है. ये मिसाइल 9,000 से ज्यादा किलोमीटर तक तैनात है. इसकी क्षमता टाइप पनडुब्बी से लॉन्च होकर अमेरिका के तटों पर हमला कर सकती है. इसकी खासियत यह है कि ये चीन की 6 टाइप 094 पनडुब्बियां इसे ले जाती हैं. जिसमें परमाणु क्षमता वाली टाइप 096 शामिल है जो 24 मिसाइलें ले सकेगी.
- H-6N स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमान जो रिफ्यूलिंग के साथ 6,000 से ज्यादा रेंज की है. इसकी हवाई हमला या क्रूज मिसाइल से अमेरिका तक पहुंच है. ये रूप के Su-30 से भी प्रेरित है.
- हाइपरसोनिक हथियार जैसे DF-17 अमेरिकी मिसाइल डिफेंस को भेद सकते हैं क्योंकि ये बहुत तेज और मैन्यूवरेबल हैं. ये मिसाइल 5 गुना स्पीड से उड़ती है, जो अमेरिकी मिसाइल डिफेंस को चकमा दे सकती है.
- कक्षीय हथियार जैसे फ्रैक्शनल ऑर्बिटल बॉम्बर्डमेंट सिस्टम (FOBS) पृथ्वी की कक्षा से घूमकर अमेरिका पर हमला करती है. ये मिसाइल अमेरिकी चेतावनी को बेकार कर सकती है.

इन हथियारों की क्षमता कैसे काम करती है?
- ICBM (DF-31A/DF-41): जमीन से दागी जाने वाली इन मिसाइलों की रेंज इतनी लंबी है कि लॉन्च के 30–40 मिनट में अमेरिकी शहरों तक पहुंच सकती हैं. DF-41 तो एक बार में 10 से अधिक वॉरहेड्स गिराने की क्षमता रखती है.
- SLBM (JL-3): पानी के नीचे से दागी जाने वाली ये मिसाइलें अमेरिकी तटों के बेहद नजदीक से अचानक हमला करने में सक्षम हैं. चीन के पास फिलहाल ऐसी 6 पनडुब्बियां हैं.
- बॉम्बर (H-6N): हवा में ईंधन भरकर लंबी दूरी तय करने वाला यह विमान परमाणु हथियारों और क्रूज मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचा सकता है.
- हाइपरसोनिक मिसाइल (DF-17, YJ-21): ध्वनि की रफ्तार से कहीं तेज उड़ने वाली ये मिसाइलें अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को धोखा दे सकती हैं.
- FOBS (Fractional Orbital Bombardment System): कक्षा में घूमकर दक्षिण ध्रुव की ओर से हमला करने वाली यह तकनीक अमेरिकी राडार को चकमा देती है.
चीन का पूरा सैन्य ढांचा A2/AD (Anti-Access/Area Denial) रणनीति पर आधारित है, जिसका मकसद अमेरिकी नौसेना को चीन के तटों के पास आने से रोकना है. हालांकि कुल मिलाकर देखें तो अमेरिका के पास अभी भी कहीं अधिक—करीब 5000 परमाणु हथियार हैं.
परेड में चीन ने जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ मनाई
3 सितंबर 2025 को आयोजित इस सैन्य परेड में चीन ने जापान पर जीत की 80वीं वर्षगांठ मनाई. परेड में 50,000 से अधिक सैनिक, टैंक, मिसाइलें, ड्रोन और यहां तक कि रोबोटिक डॉग ड्रोन तक नजर आए. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने साफ संदेश दिया कि ‘चीन धमकियों से डरने वाला नहीं है.’
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग की मौजूदगी ने इस परेड को और खास बना दिया है. पहली बार ये तीनों नेता एक ही मंच पर दिखे, इसके अलावा ईरान और पाकिस्तान समेत कई एशियाई देशों के नेता भी मौजूद थे. पश्चिमी देशों के किसी बड़े नेता ने इसमें हिस्सा नहीं लिया.

सैन्य परेड से आखिर क्यों खफा नजर आए ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस परेड से खासे खफा नजर आए. उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए व्यंग्य में लिखा ‘कृपया पुतिन और किम जोंग उन को मेरी शुभकामनाएं दें, क्योंकि आप अमेरिका के खिलाफ साजिश रच रहे हैं.’
ट्रंप का आरोप है कि यह परेड चीन-रूस-उत्तर कोरिया के गठबंधन की झलक है, जो अमेरिका को घेरने की साजिश रच रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध में चीन की जीत में अमेरिका की भूमिका (जैसे लेंड-लीज सहायता) का कोई जिक्र नहीं किया गया, जबकि असलियत में चीन उस समय अमेरिकी मदद पर निर्भर था.
दिलचस्प बात यह रही कि ट्रंप ने परेड को “बेहद प्रभावशाली” बताते हुए माना कि चीन ने यह शक्ति प्रदर्शन अमेरिका को संदेश देने के लिए किया. उन्होंने यह भी जोड़ा कि शी जिनपिंग चाहते थे कि वे इसे देखें—”और हां, मैं देख रहा था.”
अमेरिका-चीन टकराव की राह?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अमेरिका और चीन के बीच सीधा युद्ध अभी दूर की बात है. दोनों ही परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं और टकराव दोनों के लिए विनाशकारी साबित होगा. हालांकि, चीन की बढ़ती सैन्य क्षमता और रूस-उत्तर कोरिया जैसे देशों के साथ उसकी नजदीकी वॉशिंगटन के लिए सिरदर्द जरूर है.
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