नेपाल में प्रदर्शन से सियासी संकट
Nepal Gen Z Protest: सोशल मीडिया पर लगाए गए बैन के खिलाफ शुरू हुआ प्रदर्शन ने अब नेपाल में सियासी संकट खड़ा कर दिया है. पहले तो Gen-Z आंदोलन ने सोशल मीडिया से बैन हटाने की मांग की और फिर आक्रामक हो गए. इसके बाद धीरे-धीरे हिंसक हुए प्रदर्शन ने नेताओं और सरकार के साथ सरकारी आवासों को निशाने पर लेना शुरू किया. इसी बीच नेपाल के गृहमंत्री ने इस्तीफा दे दिया. इसके बाद राष्ट्रपति आवास पर कब्जा कर लिया गया. अब कहा जा रहा है कि नेपाली पीएम केपी शर्मा ओली इलाज के बहाने विदेश भाग सकते हैं. कुछ मिलाकार नेपाल में तख्तापलट का माहोल बन गया है.
आंदोलन के समर्थन में अब सियासी दलों ने कदम बढ़ा दिया है. पीएम केपी शर्मा ओली ने शाम 6 बजे सर्वदलीय बैठक बुलाई है. उनके आवाास पर आग लगा दी गई है. इस बीच लगातार उनके मंत्रियों के इस्तीफे सामने आ रहे हैं. वहीं राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सभी 21 सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है. सभी ने सामूहिक रूप से आंदोलन (Nepal Gen Z Protest) को समर्थन दिया है. नेपाल में पहले से ही राजशाही की मांग हो रही थी. ऐसे में कहा जा रहा है कि इस आंदोलन को पीछे से राजशाही की चाहत रखने वालों ने समर्थन दिया है.
ओली की संभावित योजना
नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ प्रदर्शनकारियों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है. ओली के दुबई भागने की अफवाहें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं, जिसमें दावा किया जा रहा है कि वह इलाज का बहाना बनाकर दुबई जा सकते हैं. हिमालय एयरलाइंस को स्टैंडबाय पर रखे जाने की खबरें भी सामने आई हैं. हालांकि, त्रिभुवन इंटरनेशनल एयरपोर्ट के प्रवक्ता रिंजी शेरपा ने इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि कोई वीआईपी या विशेष उड़ानें निर्धारित नहीं हैं.
प्रदर्शनकारी ओली के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं. वे फिर से राजशाही लाने की मांग भी कर रहे हैं. कई मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया है, जिनमें गृह मंत्री और कृषि मंत्री शामिल हैं. ओली अपनी जगह किसी मंत्री को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त कर सकते हैं और दुबई जा सकते हैं. हालांकि, अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है और सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.
दुनिया कर रहा शांति की अपील
भारत और संयुक्त राष्ट्र ने शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है. भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा कि वे नेपाल की स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए हैं और शांति और संयम बनाए रखने की अपील की है. संयुक्त राष्ट्र ने भी नागरिक अधिकारों की रक्षा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने का आह्वान किया है.
बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे हालात
कुछ समय पहले बांग्लादेश में भी ऐसी ही हालात बने थे. छात्रों के प्रदर्शन के बाद शेख हसीना को ढाका से सीधे उड़ान भरकर भारत में शरण लेना पड़ा था. फिलहाल अभी भी वो भारत में हैं. उनके देश छोडने के बाद मोहम्मद यूनुस अंतरिम सरकार के सलाहकार के तौर पर सरकार चला रहे हैं. साल 2022 में श्रीलंका में भी ऐसे ही हालात बने थे. आर्थिक-राजनीतिक संकट के कारण हुए प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे देश छोड़कर मालदीव भागना पड़ा था.
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