India US Trade: अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर अगस्त से लगाए गए 50% के भारी-भरकम टैरिफ के बावजूद भारत ने जबरदस्त वापसी की है. दो महीने की गिरावट के बाद, नवंबर में अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात में भारी उछाल दर्ज किया गया है. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, सप्लाई-चेन में हुए बदलाव और छुट्टियों के सीजन से पहले अमेरिकी बाजार में स्टॉक भरने की होड़ ने इस रिकवरी में बड़ी भूमिका निभाई है.
स्मार्टफोन और ज्वैलरी का ‘ग्रैंड कमबैक’ (India Defies US Tariffs)
आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर में अमेरिका को भारत का निर्यात 22.61% बढ़कर 6.98 अरब डॉलर हो गया. सबसे चौंकाने वाली वापसी स्मार्टफोन सेक्टर ने की है. मई में 2.29 अरब डॉलर से गिरकर सितंबर में 88.46 करोड़ डॉलर पर पहुंचा स्मार्टफोन निर्यात, नवंबर में फिर से 1.8 अरब डॉलर पर पहुंच गया. इसी तरह, रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery) का निर्यात भी सुधरकर 40.62 करोड़ डॉलर हो गया, जो सितंबर में घटकर आधा रह गया था. मशीनरी और मैकेनिकल उपकरणों का निर्यात भी अपने पुराने स्तर (61.46 करोड़ डॉलर) पर लौट आया है.
कीमतों पर समझौता कंपनियों की नई रणनीति (India Exports to US)
जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने इस वापसी का कारण बताते हुए कहा कि शुरुआत में ऊंचे टैरिफ के डर से अमेरिकी खरीदारों ने ऑर्डर रोक दिए थे. लेकिन जब यह साफ हो गया कि टैरिफ बना रहेगा, तो दोनों पक्षों ने ‘एडजस्टमेंट’ शुरू कर दिया. निर्यातकों और खरीदारों ने बढ़ी हुई लागत को आपस में बांटा और कीमतों पर फिर से बातचीत की. इसके अलावा, उन उत्पादों पर फोकस बढ़ाया गया जिन्हें बदलना मुश्किल है.
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क्या यह खुशी ज्यादा दिन टिकेगी? (India US Trade Future)
भले ही आंकड़ों में उछाल है, लेकिन थिंक टैंक ने एक चेतावनी भी जारी की है. GTRI का मानना है कि यह रिकवरी शायद लंबे समय तक न टिके. यह उछाल सख्त टैरिफ के साथ तालमेल बिठाने (Adaptation) और शॉर्ट-टर्म रणनीतियों का नतीजा है, न कि व्यापार में किसी स्थायी सुधार का. फार्मास्यूटिकल्स और मिनरल फ्यूल्स में भी सुधार दिखा है, लेकिन यह अभी भी मई के स्तर से नीचे या उसके आसपास ही है.
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