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गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन: मां ललिता की पूजा और आज का पंचांग

Aaj Ka Panchang 21 January 2025: माघ मास की शुक्ल तृतीया पर गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन मां ललिता की पूजा के लिए शुभ माना जाता है. जानें 21 जनवरी 2026 का विस्तृत पंचांग, सूर्योदय-सूर्यास्त, शुभ-अशुभ मुहूर्त और धनिष्ठा नक्षत्र की विशेषताएं.

Aaj Ka Panchang 21 January 2025: माघ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि आज गुप्त नवरात्रि का तीसरा दिन है. इस दिन मां ललिता की पूजा-अर्चना का विशेष विधान बताया गया है. मान्यता है कि इस तिथि पर मां ललिता की आराधना करने से साधक को ज्ञान, शक्ति और आत्मबल की प्राप्ति होती है. साथ ही व्रत रखने से मन की शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति होती है.

आज की तिथि और संवत

आज बुधवार का दिन है और विक्रम संवत 2082 चल रहा है. तिथि शुक्ल तृतीया है, जो 22 जनवरी की रात 2 बजकर 47 मिनट तक रहेगी. इस तिथि पर कई शुभ योग भी बन रहे हैं, जो धार्मिक कार्यों और पूजा-पाठ के लिए अनुकूल माने जाते हैं.

योग और करण की स्थिति

आज व्यतीपात योग शाम 6 बजकर 58 मिनट तक रहेगा. इसके बाद वरीयान् योग का आरंभ होगा. करण की बात करें तो दोपहर 2 बजकर 47 मिनट तक तैतिल करण रहेगा और उसके बाद गर करण का प्रभाव शुरू होगा. यह समय पूजा और व्रत के लिए विशेष माना जा रहा है.

सूर्योदय और सूर्यास्त का समय

  • सूर्योदय: सुबह 7 बजकर 14 मिनट
  • सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 51 मिनट
  • चंद्रोदय: सुबह 8 बजकर 51 मिनट
  • चंद्रास्त: रात 8 बजकर 20 मिनट

इन समयों के अनुसार दिनभर पूजा और धार्मिक कार्यों की योजना बनाई जा सकती है.

शुभ मुहूर्त

आज अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं है. हालांकि अमृत काल 22 जनवरी को सुबह 7 बजकर 6 मिनट से 8 बजकर 44 मिनट तक रहेगा. इस दौरान किए गए कार्यों को शुभ फल प्राप्त होने की संभावना रहती है.

अशुभ समय

  • राहुकाल: दोपहर 12:33 से 1:52 तक
  • गुलिकाल: सुबह 11:13 से 12:33 तक
  • यमगण्ड: सुबह 8:34 से 9:53 तक

इन समयों में महत्वपूर्ण कार्यों से बचना ही उचित माना जाता है.

आज का नक्षत्र

आज चंद्रमा धनिष्ठा नक्षत्र में रहेंगे, जो दोपहर 1 बजकर 58 मिनट तक प्रभावी रहेगा. इस नक्षत्र के जातक आत्मविश्वासी, परिश्रमी और कलात्मक प्रतिभा से संपन्न माने जाते हैं. साथ ही उनमें सौंदर्य, धन और प्रसिद्धि प्राप्त करने की क्षमता होती है. हालांकि स्वार्थ, क्रोध और लालच जैसी प्रवृत्तियां भी देखी जाती हैं.

नक्षत्र के देवता और प्रतीक

धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है और राशि स्वामी शनि देव हैं. इसके देवता आठ वसु हैं, जिन्हें भौतिक समृद्धि के देवता कहा जाता है. इस नक्षत्र का प्रतीक ढोल या बांसुरी है, जो कला और संगीत से जुड़ा हुआ है.

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आज का दिन गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन मां ललिता की पूजा और व्रत के लिए विशेष महत्व रखता है. ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति धार्मिक कार्यों के लिए अनुकूल है. शुभ और अशुभ समय को ध्यान में रखकर पूजा-पाठ और अन्य कार्य करने से सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं. धनिष्ठा नक्षत्र के प्रभाव से आज आत्मविश्वास और परिश्रम से सफलता प्राप्त करने के योग बन रहे हैं.

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-भारत एक्सप्रेस



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