National Herald Case: नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर कूटनीतिक और कानूनी सरगर्मी तेज हो गई है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दायर की गई अपील पर दिल्ली हाई कोर्ट अब 25 मई 2026 को सुनवाई करेगा. जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की बेंच इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ईडी की दलीलों को सुनेगी.
क्या है हाई कोर्ट का रुख?
इससे पहले हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और सुमन दुबे सहित अन्य आरोपियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था. ईडी ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें गांधी परिवार और अन्य के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान लेने से इनकार कर दिया गया था.
निचली अदालत ने क्यों रोका था संज्ञान?
निचली अदालत का तर्क था कि ईडी का यह मामला किसी एफआईआर (FIR) पर आधारित होने के बजाय भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की ‘निजी शिकायत’ और मजिस्ट्रेट द्वारा जारी समन पर टिका है. अदालत ने स्पष्ट किया था कि तकनीकी आधार पर इस स्तर पर संज्ञान नहीं लिया जा सकता, हालांकि ईडी को अपनी जांच जारी रखने की पूरी छूट दी गई थी. साथ ही, कोर्ट ने सोनिया और राहुल गांधी को दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर की कॉपी देने से भी इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि वे इसके हकदार नहीं हैं.
2012 से अब तक: मामले की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद साल 2012 में शुरू हुआ था जब सुब्रमण्यम स्वामी ने आरोप लगाया था कि कांग्रेस नेताओं ने ‘एसोसिएट्स जर्नल्स लिमिटेड’ (National Herald की मूल कंपनी) की बेशकीमती संपत्तियों को अनुचित तरीके से हथियाने के लिए यंग इंडियन लिमिटेड के जरिए साजिश रची.
अप्रैल 2025: ईडी ने सोनिया गांधी, राहुल गांधी, सैम पित्रोदा और अन्य के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
आरोप: मनी लॉन्ड्रिंग के तहत धोखाधड़ी और संपत्तियों का हेरफेर.
वर्तमान स्थिति: हाई कोर्ट ने 4 जुलाई 2014 की मूल शिकायत और 2021 की ईसीआर (ECIR) कॉपी रिकॉर्ड पर लाने का निर्देश दिया है.
राजनीतिक गलियारों में हलचल
25 मई की तारीख इस मामले में बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है. यदि हाई कोर्ट ईडी की दलीलों से सहमत होता है और चार्जशीट पर संज्ञान लेने का आदेश देता है, तो गांधी परिवार के लिए कानूनी मुश्किलें काफी बढ़ सकती हैं. फिलहाल, कांग्रेस नेतृत्व इसे राजनीतिक प्रतिशोध बता रहा है, जबकि भाजपा इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी लड़ाई के रूप में देख रही है.
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

