बलिया/नरेंद्र मिश्र: देश में जहां सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी चुनावी रणनीतियों में उलझे हुए हैं, वहीं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने गोरखपुर के सहारा एस्टेट स्थित भारत माता मंदिर से निकाली गई अपनी ‘गोविष्टि यात्रा’ के जरिए उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया भूचाल ला दिया है. गुरुवार को बलिया पहुंची इस यात्रा के दौरान शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि उनकी यात्रा का एकमात्र उद्देश्य खतरे में पड़ी गौ माता की रक्षा और उनकी प्राण-प्रतिष्ठा करना है. इसी दौरान उन्होंने यूपी सरकार की गौशाला नीति पर तीखे सवाल दागे.
‘कागजों में शेर बनने से काम नहीं चलेगा’
यूपी सरकार द्वारा गौ आश्रय स्थल बनाकर की जा रही गौ रक्षा के दावों पर शंकराचार्य ने कड़ा प्रहार किया. उन्होंने कहा, “गौशालाओं की हालत बहुत खराब है. गायें अंदर हैं लेकिन वहां भूसा-पानी नहीं है, कोई सेवक नहीं है. जमीनी स्थिति बहुत विपरीत है.” उन्होंने बिना लाग-लपेट के कहा कि केवल कागजों में शेर बन जाना और यह दिखाना कि हम बहुत अच्छा कर रहे हैं, इसका कोई मतलब नहीं है. “मुख्यमंत्री का काम कानून बनाना है, न कि मुख्यमंत्री बनकर कोई गौशाला खोलना और गाय को गुड़-रोटी खिलाकर वीडियो बनवाना.”
गोरक्ष पीठ से सीधा सवाल
अविमुक्तेश्वरानंद ने सबसे बड़ा सवाल गाय को ‘पशु’ की श्रेणी में रखे जाने पर उठाया. उन्होंने कहा कि हमारे वेद-पुराणों और बाप-दादाओं ने गाय को माता कहा है, लेकिन अंग्रेजों के जमाने (यूनाइटेड प्रोविंस) के कानून के तहत आज भी यूपी सरकार उसे ‘पशु’ मान रही है. सीएम योगी आदित्यनाथ का बिना नाम लिए उन्होंने गोरक्ष पीठ को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि-
‘अंग्रेजों को तो हमने भगा दिया. पुरानी सरकारों ने इसे नहीं बदला, लेकिन कम से कम ‘गोरक्ष पीठ’ वाले आए तो इनको तो यह काम कर देना चाहिए था कि गाय पशु सूची में नहीं रहेगी. 9 साल से आप पूर्ण बहुमत की सरकार में बैठे हैं, फिर इसे क्यों नहीं हटाया गया?’
‘हम विपक्ष की आवाज हैं तो क्या दिक्कत है?’
जब उनसे पूछा गया कि क्या वे यह सब विपक्ष के इशारे पर कर रहे हैं? इस पर शंकराचार्य ने बेबाकी से जवाब दिया, “चलो हम विपक्ष के इशारे पर ही सही, अगर विपक्ष गौ सेवा करना चाहता है तो क्या दिक्कत है? मान लो हम विपक्ष की आवाज हैं और कह रहे हैं कि गाय को पशु सूची से हटाओ. आप तो गौ भक्त हैं, आप हटा दीजिए, हम आपके भक्त हो जाएंगे.” उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्ची और कड़ी बात बोलने वाला विपक्ष का नहीं हो जाता, वे यह सब जनकल्याण और सच्चाई के लिए बोल रहे हैं.
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2027 के चुनाव पर असर की चेतावनी
क्या इस यात्रा का 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव पर कोई असर पड़ेगा? इस सवाल पर शंकराचार्य ने बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा, “असर पड़ेगा, आप देख लेना. असर तो अभी से दिखाई दे रहा है.” उन्होंने उपस्थित भीड़ से सीधे सवाल किया, “क्या जो गाय को पशु सूची में बनाए रखेगा, ऐसे किसी ‘असुर’ को आप वोट देंगे?” जनता के ‘नहीं’ कहने पर उन्होंने कहा कि सच्चाई हमेशा टिकती है, जबकि झूठ और आडंबर केवल कुछ दिनों के मेहमान होते हैं. शंकराचार्य के इन तीखे बयानों ने यूपी के सियासी और धार्मिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है.
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