रिपोर्टर- राहुल रतन
उत्तर प्रदेश में बाहुबलियों, माफियाओं और आपराधिक इतिहास वाले रसूखदार लोगों के शस्त्र लाइसेंसों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है. कोर्ट ने यूपी सरकार और सूबे के सभी जिलाधिकारियों (DMs) से प्रदेशभर के उन सभी शस्त्र धारकों की कुंडली मांगी है, जिनका कोई न कोई क्रिमिनल बैकग्राउंड रहा है.
कोर्ट के इस हंटर के बाद, इस लिस्ट में शामिल पूर्व सांसद और भाजपा नेता बृजभूषण शरण सिंह ने इस पर अपनी चुप्पी तोड़ी है. बलरामपुर के गैंडास बुजुर्ग में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कोर्ट के आदेश पर सधे हुए अंदाज में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अब जमाना बदल चुका है और लोग अब ‘असलहा संस्कृति’ (Gun Culture) से पूरी तरह ऊब चुके हैं.
मामले पर क्या बोल गए बृजभूषण?(UP Arms License)
बलरामपुर में जनता को संबोधित करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने पुराने दिनों को याद किया और कहा, “एक दौर था जब लोग खुलेआम असलहा लेकर चलते थे और समाज में इसे एक रसूख के तौर पर पसंद भी किया जाता था. लेकिन अब माहौल और वक्त दोनों बदल चुके हैं.
उन्होंने साफ किया कि वे खुद भी अब अपने साथ कोई असलहा लेकर नहीं चलते हैं. हाईकोर्ट द्वारा उनके और अन्य बाहुबलियों के लाइसेंसों की जानकारी मांगे जाने पर उन्होंने बहुत ही सहजता से कहा कि यह पूरी तरह से एक सामान्य न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और अदालत को पूरा ब्यौरा देना कानून के दायरे में आता है.
राजा भैया से लेकर धनंजय सिंह तक सबकी खुलेगी फाइल
दरअसल, यह पूरा मामला तब गरमाया जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने यूपी में शस्त्र लाइसेंसों के खुलेआम दुरुपयोग और उनके सार्वजनिक प्रदर्शन पर गहरी चिंता जताई. हाईकोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए सरकार से पूछा कि आखिर आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को धड़ल्ले से लाइसेंस कैसे जारी किए जा रहे हैं?
कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से जिन प्रमुख और चर्चित चेहरों के शस्त्र लाइसेंसों, उनके पते, आपराधिक मुकदमों के इतिहास और वर्तमान स्थिति की पूरी रिपोर्ट तलब की है, उनमें बृजभूषण शरण सिंह, कुंवर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया, और धनंजय सिंह जैसे यूपी के सबसे रसूखदार बाहुबलियों के नाम शामिल हैं.
बलरामपुर से पुराना कूटनीतिक रिश्ता
इस कार्यक्रम के दौरान बृजभूषण शरण सिंह भावुक भी नजर आए और उन्होंने बलरामपुर तथा उतरौला क्षेत्र से अपने दशकों पुराने राजनीतिक और व्यक्तिगत जुड़ाव का जिक्र किया. उन्होंने जनता को याद दिलाया कि एक बेहद कठिन और चुनौतीपूर्ण समय में उन्होंने बलरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था. उन्होंने कहा कि बलरामपुर की जनता ने मुझे जो बेपनाह प्यार और सम्मान दिया है, वही यादें और अपनापन मुझे आज भी बार-बार खींचकर इस धरती पर ले आता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए बृजभूषण ने एक तरफ अदालत के प्रति सम्मान दिखाया है, तो दूसरी तरफ अपनी जनता के बीच अपनी ‘सॉफ्ट इमेज’ (नरम छवि) को पेश करने की कोशिश की है.
क्या रद्द होंगे बाहुबलियों के लाइसेंस?
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस कड़े आदेश के बाद यूपी के प्रशासनिक अमले और गृह विभाग में हड़कंप मच गया है. कोर्ट ने साफ निर्देश दिया है कि सरकार यह सुनिश्चित करे कि किसी भी ऐसे व्यक्ति के पास हथियार न रहे जो समाज की शांति और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता हो.
अब सभी जिलाधिकारियों को अपने-अपने जिलों के बाहुबलियों के असलहों का पूरा रिकॉर्ड री-वेरिफाई (दोबारा जांच) करना होगा. कानूनी जानकारों का कहना है कि यदि इस रिपोर्ट में किसी भी बाहुबली के खिलाफ गंभीर मामलों में दोषी पाए जाने या लाइसेंस के नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो उनके शस्त्र लाइसेंस तुरंत रद्द किए जा सकते हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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