West Bengal 3D Policy: पश्चिम बंगाल की राजनीति और डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) में अब तक का सबसे बड़ा भूचाल आ गया है! राज्य में नई सरकार के आते ही अवैध बांग्लादेशियों और रोहिंग्याओं के खिलाफ ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (पहचान करो, नाम काटो और देश से निकालो) की नीति को पूरी सख्ती के साथ लागू कर दिया गया है. हालात ये हैं कि कल तक जो घुसपैठिए बंगाल के अलग-अलग शहरों में अपनी पहचान छिपाकर रह रहे थे, वे आज अपना बोरिया-बिस्तर और प्लास्टिक शीट लेकर खुद अंतरराष्ट्रीय सीमा पर जमा हो रहे हैं. इस ऐतिहासिक ‘उल्टे पलायन’ ने पूरे देश का ध्यान बंगाल की ओर खींच लिया है.
हाकिमपुर बॉर्डर पर मची भगदड़ (West Bengal Illegal Bangladeshi)
उत्तर 24 परगना जिले के बसीरहाट उपमंडल स्थित हाकिमपुर चेकपोस्ट पर नजारा हैरान कर देने वाला है. पिछले दो दिनों में सैकड़ों कथित बांग्लादेशी घुसपैठिए यहां जमा हो गए हैं. दमदम, न्यू टाउन और डानकुनी जैसे वीआईपी इलाकों में बरसों से मजदूरी और घरों में काम करने वाले ये लोग अब दहशत में हैं. बीएसएफ (BSF) के अधिकारियों का कहना है कि लोग खुद आकर कह रहे हैं कि उन्हें वापस उनके देश भेज दिया जाए. चेकपोस्ट पर इंतजार कर रहे एक व्यक्ति ने दर्द बयां करते हुए कहा- “अगर सरकार हमें यहां रहने ही नहीं देगी, तो वापस जाने के अलावा और क्या चारा है?”
“जल्दी भागो…” सीएम शुभेंदु अधिकारी की खुली चेतावनी
कल्याणी में एक उच्च-स्तरीय प्रशासनिक बैठक के बाद मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बेहद कड़े तेवर दिखाए. बॉर्डर पर जमा भीड़ का जिक्र करते हुए उन्होंने सीधा अल्टीमेटम दिया- “जल्दी-जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी.” उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने वोट बैंक की खातिर इन्हें पाला था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा. “हम उन्हें जेलों में खाना खिलाकर जनता का पैसा बर्बाद नहीं करना चाहते. इससे बंगाल के असली नागरिकों का नुकसान हो रहा है. हम देश हित में इन्हें बाहर निकालेंगे,” सीएम ने स्पष्ट किया.
‘डिटेंशन सेंटर’ का मालदा से हुआ श्रीगणेश (West Bengal Illegal Bangladeshi deportation)
इस अभियान को कानूनी और प्रशासनिक अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य के ‘होम एंड हिल अफेयर्स डिपार्टमेंट’ ने सभी डीएम (DM) को सख्त निर्देश जारी किए हैं. हर जिले में ‘निरुद्ध केंद्र’ (Holding Centers) बनाए जा रहे हैं. मालदा जिला इस दिशा में पहला कदम उठाने वाला जिला बन गया है, जहां 9 संदिग्ध बांग्लादेशियों को हिरासत में रखा गया है. केंद्रीय गाइडलाइन के अनुसार, इन सेंटरों में पकड़े गए लोगों का बायोमेट्रिक डेटा लिया जाएगा और 30 दिनों के भीतर जांच पूरी कर उन्हें बॉर्डर अथॉरिटी (BSF) को सौंप दिया जाएगा.
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अब हो रहा है ‘डायरेक्ट एक्शन’
पश्चिम बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा दशकों से सिर्फ चुनावों में रैलियों और भाषणों तक सीमित रहता था. लेकिन अब ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ नीति के तहत प्रशासनिक स्तर पर जो एक्शन शुरू हुआ है, उसने साबित कर दिया है कि राज्य में अब वोट बैंक की राजनीति के दिन लद गए हैं. नागरिकता तय करने का अंतिम अधिकार जिलाधिकारियों को दे दिया गया है, और बंगाल की धरती से अवैध घुसपैठियों की पूरी तरह से ‘सफाई’ का काउंटडाउन शुरू हो चुका है!
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