पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी शिकस्त झेलने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर ऐसा भयंकर और ऐतिहासिक विद्रोह शुरू हो चुका है, जिसने ममता बनर्जी के ‘नबन्ना’ (सचिवालय) की दीवारें हिला दी हैं. बंगाल की सत्ता पर काबिज होने के बाद बीजेपी ने टीएमसी के बचे-कुचे साम्राज्य को जड़ से उखाड़ने के लिए जो चक्रव्यूह रचा था, वह अब पूरी तरह कामयाब होता दिख रहा है.
बीजेपी के सीनियर नेता और तीन बार के लोकसभा सांसद सौमित्र खान ने एक ऐसा सनसनीखेज और तीखा दावा (BJP Soumitra Khan statement)) कर दिया है, जिसने बंगाल से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों में भूकंप ला दिया है. सौमित्र खान का कहना है कि टीएमसी के करीब 20 लोकसभा सांसद सीधे तौर पर बीजेपी आलाकमान के संपर्क में हैं और दिल्ली से हरी झंडी मिलते ही पूरी की पूरी टीएमसी अगले कुछ दिनों में इतिहास बन जाएगी.
दीदी के गढ़ में क्यों मची खलबली?(BJP Soumitra Khan statement)
दरअसल सौमित्र खान ने ऑन-कैमरा दहाड़ते हुए कहा कि ‘दिल्ली बस एक बार इशारा कर दे, बंगाल में टीएमसी का नामोनिशान खत्म हो जाएगा.’ अगर इस दावे को कानूनी और तकनीकी चश्मे से देखें, तो लोकसभा में टीएमसी के कुल 29 सांसद हैं. दल-बदल विरोधी कानून की फांस से बचने और अपनी सांसदी बचाने के लिए किसी भी पार्टी के दो-तिहाई यानी कम से कम 19 या 20 सांसदों का एक साथ पाला बदलना जरूरी होता है.
सौमित्र खान का दावा है कि उनके पास ठीक वही जादुई नंबर (20 सांसद) पूरी तरह तैयार है जो बीजेपी में आने के लिए बेताब बैठा है. हालांकि, टीएमसी के बुजुर्ग नेता सौगत राय इसे बकवास और सरासर झूठ बता रहे हैं, लेकिन जमीन पर जो गदर मचा है, उसने टीएमसी की रातों की नींद हराम कर दी है.
कल रात को दीदी के खेमे में लगी सबसे बड़ी सेंध
इस सियासी ड्रामे और ‘ऑपरेशन लोटस’ का सबसे विस्फोटक मोड़ तब सामने आया, जब खबर लीक हुई कि टीएमसी की कद्दावर नेता, सांसद और विधायक काकोली घोष दस्तीदार 6 अन्य विधायकों के साथ चुपके से बीजेपी के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के साथ प्रशासनिक और गुप्त बैठक करने पहुंच गईं.
चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) पर अपना गुस्सा निकालते हुए काकोली घोष पहले ही जिलाध्यक्ष पद छोड़ चुकी हैं. इस खुफिया मुलाकात के बाद यह साफ हो गया है कि ममता बनर्जी के पंद्रह साल के सिंडिकेट राज के अंत के बाद अब टीएमसी के शीर्ष स्तर के नेता भी अपना सियासी भविष्य सुरक्षित करने के लिए बीजेपी के पाले में जाने की स्क्रिप्ट लिख चुके हैं.
100 से ज्यादा पार्षदों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
मुसीबतें यहीं खत्म नहीं हो रहीं बल्कि टीएमसी को सबसे घातक और करारा झटका जमीन पर लगा है, जहां पार्टी के 100 से ज्यादा पार्षदों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है. भाटपारा, गारुलिया, हालिसहर, उत्तर बैरकपुर, कांचीरापाड़ा, कांथी और खुद अभिषेक बनर्जी के गढ़ डायमंड हार्बर जैसी 7 प्रमुख नगर पालिकाओं (Municipalities) के 100 से अधिक पार्षदों ने एक साथ इस्तीफा देकर बोर्ड को भंग होने की कगार पर पहुंचा दिया है.
इन पार्षदों का साफ आरोप है कि हार के बाद टीएमसी में पूरी तरह नेतृत्व की कमी है और स्थानीय प्रशासन को चेयरमैन नहीं बल्कि पुलिस चला रही है. ममता बनर्जी ने आनन-फानन में बैठक बुलाकर एकजुट रहने की खोखली अपील तो की है, लेकिन 100 पार्षदों के इस सीधे इस्तीफे ने साफ कर दिया है कि तृणमूल का जहाज अब बंगाल की खाड़ी में डूबने को तैयार है.
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-भारत एक्सप्रेस
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