TMC Crisis After West Bengal Polls: पश्चिम बंगाल के सियासी अखाड़े से इस वक्त की सबसे बड़ी और दिल दहला देने वाली खबर सामने आ रही है. कोलकाता से लेकर दिल्ली तक राजनीतिक गलियारों में एक नया भूचाल आ गया है. विधानसभा में विधायकों की बड़ी बगावत झेलने के बाद अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के संसदीय दल में भी ऐतिहासिक दोफाड़ होने की कगार पर है. सूत्रों के मुताबिक, टीएमसी के करीब 18 से 20 सांसद इस वक्त भारतीय जनता पार्टी (BJP) के शीर्ष नेतृत्व के सीधे संपर्क में हैं और वे किसी भी वक्त पाला बदल सकते हैं.
यह बागी सांसद आगामी 8 जून को दिल्ली में लोकसभा स्पीकर से मुलाकात करने की तैयारी में हैं. हालिया चुनाव परिणामों के बाद पहले से ही बैकफुट पर चल रही टीएमसी के लिए यह बगावत रीढ़ की हड्डी टूटने जैसी है. पार्टी की कद्दावर नेता काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देकर और खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करके इस बगावत की पटकथा पर मुहर लगा दी है.
दलबदल का गणित (TMC MPs rebellion against Mamata Banerjee)
लोकसभा में टीएमसी के पास कुल 28 सांसद हैं, जबकि राज्यसभा में उनके 13 सदस्य हैं. दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) के तहत बिना सांसदी गंवाए पार्टी तोड़ने के लिए दो-तिहाई सांसदों का एक साथ अलग होना अनिवार्य है. 28 सांसदों के लिहाज से यह जादुई आंकड़ा ठीक 19 सांसद बैठता है. यदि बागियों की यह संख्या 20 तक पहुंचती है, तो ममता बनर्जी के हाथ से न सिर्फ उनकी पार्टी की कमान छिन जाएगी, बल्कि संसद में ‘असली टीएमसी’ होने का तमगा भी बागी गुट के पास चला जाएगा.
बीजेपी के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा यह दांव (TMC rebel MPs Delhi march and strategy)
इस बगावत की गूंज सिर्फ बंगाल तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि इसका सीधा असर केंद्र की सत्ता और एनडीए (NDA) के समीकरणों पर भी पड़ेगा. लोकसभा में फिलहाल बीजेपी के पास अपने खुद के 240 सांसद हैं और पूर्ण बहुमत के लिए 272 का आंकड़ा चाहिए.
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यदि टीएमसी के 20 बागी सांसद बीजेपी का दामन थाम लेते हैं या उन्हें समर्थन देते हैं, तो बीजेपी का निजी आंकड़ा 260 के पार पहुंच जाएगा. इससे केंद्र सरकार की अपने एनडीए सहयोगियों (जैसे टीडीपी और जेडीयू) पर निर्भरता काफी हद तक कम हो जाएगी और सरकार बेहद मजबूत स्थिति में आ जाएगी.
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