Muzaffarpur Bank Glitch: बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक ऐसा हैरान करने वाला और अनोखा मामला सामने आया है, जिसने बैंकिंग जगत से लेकर आम जनता के बीच खलबली मचा दी है. यहां एक बेहद गरीब और साधारण बुजुर्ग पेंशनभोगी के बैंक खाते में अचानक एक या दो लाख नहीं, बल्कि पूरे सात अरब से ज्यादा रुपये यानी करीब 750 करोड़ रुपये क्रेडिट हो गए. इतना ही नहीं, उनके दिव्यांग बेटे के खाते में भी बिल्कुल इतनी ही बड़ी रकम ट्रांसफर हो गई.
दोनों खातों को मिला दिया जाए तो यह रकम 15 अरब रुपये यानी 1500 करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है. जैसे ही इस महा-रकम का खुलासा हुआ, बैंक कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए और खुद बुजुर्ग का सिर चकरा गया. हालांकि, कुछ ही देर बाद यह पूरी जादुई रकम खाते से गायब होकर सीधे जीरो पर आ गई, जिसके बाद अब इस भारी टेक्निकल ग्लिच की जांच के लिए उच्च स्तरीय टीम बैठ गई है.
#WATCH | Muzaffarpur, Bihar: An elderly pensioner in Muzaffarpur experienced a massive banking anomaly after approximately Rs 700 crore was mistakenly credited to his account. However, the balance vanished shortly after, dropping straight back to zero and triggering an official… pic.twitter.com/sbEkC006aE
— ANI (@ANI) July 13, 2026
कंप्यूटर स्क्रीन देखकर सन्न रह गया बैंक कर्मी
मुजफ्फरपुर के रहने वाले बुजुर्ग पेंशनभोगी कामेश्वर मिश्रा ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा कि वे हर महीने मिलने वाली अपनी सरकारी वृद्धावस्था पेंशन यानी सामाजिक सुरक्षा पेंशन के केवल 1100 रुपये निकालने के लिए बैंक गए थे. चूंकि उनके पैर ठीक से काम नहीं करते, इसलिए वे अपने दिव्यांग बेटे को साथ लेकर बैंक पहुंचे थे.
बेटे के साथ 1100 रुपये की निकासी करने के बाद कामेश्वर मिश्रा ने बैंक कर्मचारी से अपने खाते का बैलेंस चेक करने को कहा. जैसे ही सीबीएस सिस्टम पर काम करने वाले कर्मचारी ने उनका अकाउंट खोला, वह अपनी सीट पर ही सन्न रह गया. कर्मचारी के मुंह से कुछ पल के लिए शब्द ही नहीं निकल रहे थे क्योंकि कंप्यूटर स्क्रीन पर एक ऐसी संख्या लिखी थी जिसके पीछे के शून्य गिनना भी आम आदमी के बस की बात नहीं थी.
खाते में लिखे थे 7,59,69,51,951.16
कामेश्वर मिश्रा ने बताया कि जब उन्होंने घबराकर बैंक कर्मी से पूछा कि आखिर क्या हुआ है, तो स्क्रीन पर दिख रहा आंकड़ा उनके सामने आया. उनके खाते में कुल 7,59,69,51,951.16 रुपये (सात अरब उन्सठ करोड़ उनहत्तर लाख इक्यावन हजार नौ सौ इक्यावन रुपये और सोलह पैसे) जमा दिख रहे थे. सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उनके मूक-बधिर बेटे का खाता चेक किया गया, तो उसके अकाउंट में भी बिल्कुल यही राशि, यानी सात अरब उनसठ करोड़ से ज्यादा रुपये दिख रहे थे.
दोनों बाप-बेटे के खातों का कुल जोड़ 15 अरब रुपये से ऊपर पहुंच चुका था. इतनी विशाल धनराशि देखकर बुजुर्ग कामेश्वर मिश्रा के मन में भारी उथल-पुथल शुरू हो गई और वे गहरे मानसिक तनाव और असमंजस में डूब गए कि आखिर एक झटके में वे देश के सबसे अमीर लोगों की सूची में कैसे शामिल हो गए.
कुछ ही पलों में हवा हो गए 15 अरब रुपये
यह जादुई अमीरी कामेश्वर मिश्रा के नसीब में ज्यादा देर तक नहीं टिक पाई. जैसे ही बैंक के सीनियर अधिकारियों को इस महा-गड़बड़ी की भनक लगी, उन्होंने तुरंत एक्शन लेते हुए दोनों खातों पर अस्थाई रोक लगा दी. इसके कुछ ही समय बाद जब खातों की दोबारा जांच की गई, तो वह 15 अरब रुपये की भारी-भरकम राशि अचानक हवा हो गई और दोनों ही खातों का बैलेंस वापस गिरकर सीधे शून्य यानी जीरो पर पहुंच गया.
इस बैंकिंग अजूबे ने जहां एक तरफ बुजुर्ग परिवार को कुछ समय के लिए बड़ी टेंशन दे दी, वहीं अब बैंक के आला अधिकारी इस बात का पता लगाने में जुटे हैं कि आखिर सिस्टम में ऐसा कौन सा टेक्निकल वायरस आया था जिसने एक ही झटके में एक गरीब पेंशनभोगी को कागजों पर अरबपति बना दिया.
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बिहार में पहले भी हो चुके हैं ऐसे बैंकिंग चमत्कार
बिहार के मुजफ्फरपुर में हुई यह घटना कोई पहली बार नहीं है. इससे पहले भी बिहार के अलग-अलग जिलों से कभी छात्रों तो कभी किसानों के खातों में अचानक करोड़ों रुपये आने और फिर गायब होने के दिलचस्प मामले सामने आते रहे हैं. इस ताजा मामले को लेकर बैंक के तकनीकी विशेषज्ञों की एक स्पेशल टीम को जांच के काम पर लगा दिया गया है, जो इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह केवल सॉफ्टवेयर की एक तकनीकी खराबी थी या फिर इसके पीछे किसी बड़ी साइबर धोखाधड़ी या बैंक सर्वर की हैकिंग का कोई गुप्त प्रयास था.
फिलहाल, मुजफ्फरपुर की चाय की दुकानों से लेकर सोशल मीडिया तक, हर तरफ 1100 रुपये की पेंशन वाले इस 1500 करोड़पति बाप-बेटे की कहानी ही छाई हुई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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