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86 पन्ने, 26 कंटेंट और 11 करोड़: नितिन गडकरी के E20 मानहानि केस में कौन पिसेगा?

Nitin Gadkari: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने E20 इथेनॉल योजना से जुड़े AI-जनित फर्जी वीडियो और भ्रामक पोस्ट के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट में ₹11 करोड़ की मानहानि याचिका दायर की. जानिए पूरा मामला.

Nitin Gadkari E20 Bombay High Court

Nitin Gadkari E20 Bombay High Court: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) ने सोशल मीडिया पर उनके नाम से फैलाए जा रहे कथित फर्जी और भ्रामक कंटेंट के खिलाफ कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है. उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट (Bombay High Court) में 86 पन्नों की एक विस्तृत याचिका दाखिल करते हुए साफ कहा है कि सरकार की E20 इथेनॉल मिश्रण योजना से उनका कोई लेना-देना नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने 11 करोड़ रुपये के मानहानि हर्जाने की भी मांग की है.

गडकरी ने अपनी याचिका में कहा है कि सोशल मीडिया पर कई ऐसे वीडियो, तस्वीरें, मीम्स और रील्स वायरल किए जा रहे हैं जिनमें उन्हें E20 योजना का जिम्मेदार बताया जा रहा है. इतना ही नहीं, कुछ पोस्ट में उनके परिवार को इस योजना से कथित आर्थिक लाभ मिलने और भ्रष्टाचार से जोड़ने की भी कोशिश की गई है. गडकरी का कहना है कि ये सभी आरोप पूरी तरह झूठे, मनगढ़ंत और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाले हैं.

किसके खिलाफ पहुंचे कोर्ट?

इस मामले में गडकरी ने मेटा, एक्स, गूगल और यूट्यूब जैसी बड़ी टेक कंपनियों के अलावा केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, दूरसंचार विभाग और कुछ अज्ञात सोशल मीडिया यूजर्स को भी पक्षकार बनाया है. उन्होंने अदालत से मांग की है कि एआई तकनीक की मदद से तैयार किए गए फर्जी वीडियो, तस्वीरें और अन्य मानहानिकारक सामग्री को तुरंत हटाया जाए.

E20 योजना किस मंत्रालय के अधीन है?

याचिका में गडकरी ने स्पष्ट किया है कि वह सड़क परिवहन मंत्रालय संभालते हैं, जबकि E20 इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम पूरी तरह पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है. इसलिए इस योजना के निर्माण, संचालन या क्रियान्वयन में उनकी कोई भूमिका नहीं है.

उन्होंने अदालत को यह भी बताया कि इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 2003 में हुई थी. उस समय पेट्रोल में इथेनॉल मिलाने की नीति लागू की गई थी और धीरे-धीरे इसे बढ़ाकर 2025-26 तक 20 प्रतिशत मिश्रण यानी E20 के स्तर तक पहुंचाया गया. इस पूरी प्रक्रिया का संचालन हमेशा पेट्रोलियम मंत्रालय ने ही किया है.

‘आलोचना से नहीं, झूठे प्रचार से है आपत्ति’

गडकरी ने अपनी याचिका में यह भी कहा है कि उन्हें अपनी नीतियों या सार्वजनिक जीवन को लेकर होने वाली वैध आलोचना से कोई आपत्ति नहीं है. लोकतंत्र में आलोचना और सवाल उठाना सामान्य बात है. लेकिन जब किसी व्यक्ति के बारे में झूठे बयान गढ़े जाएं, एआई की मदद से नकली वीडियो तैयार किए जाएं या उनकी छवि खराब करने के लिए गलत जानकारी फैलाई जाए, तो वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता नहीं बल्कि मानहानि का मामला बन जाता है.


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याचिका के अनुसार अदालत के सामने 26 ऐसे इंटरनेट लिंक पेश किए गए हैं जिनमें फेस स्वैप वीडियो, एआई से तैयार की गई तस्वीरें और कार्टून शामिल हैं. इन सभी में बिना अनुमति गडकरी के चेहरे, आवाज, नाम और बोलने के अंदाज का इस्तेमाल किया गया है. उनका कहना है कि यह उनकी पहचान का अवैध उपयोग है और इससे उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा है.

इस मामले में गडकरी की ओर से वरिष्ठ वकील संदीप लड्ढा अदालत में पक्ष रखेंगे. मामले की सुनवाई बॉम्बे हाई कोर्ट में जस्टिस आरिफ एस. डॉक्टर की बेंच के सामने होगी, जहां इन फर्जी पोस्टों को हटाने और मानहानि के दावे पर आगे की सुनवाई की जाएगी.

-भारत एक्सप्रेस



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