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आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट को मिली राहत! जौहर यूनिवर्सिटी के 38 भवनों पर ध्वस्तीकरण कार्रवाई रुकी

Jauhar University case: रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को बड़ी राहत मिली है. मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने 38 भवनों पर प्रस्तावित ध्वस्तीकरण कार्रवाई पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है. जानिए पूरा मामला.

Azam Khan Jauhar University

Jauhar University Case: रामपुर/सुरेश दिवाकर: उत्तर प्रदेश के रामपुर स्थित मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को ध्वस्तीकरण कार्रवाई के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है. मुरादाबाद मंडलायुक्त की अदालत ने रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) द्वारा यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को गिराने के आदेश पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है. अदालत के इस आदेश के बाद पिछले 11 दिनों से यूनिवर्सिटी के मुख्य द्वार पर चल रहा छात्रों का धरना-प्रदर्शन देर रात समाप्त हो गया.

ध्वस्तीकरण आदेश के खिलाफ जारी था आंदोलन

आरडीए ने यूनिवर्सिटी के 38 भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया था. इस फैसले के विरोध में छात्र-छात्राएं लगातार प्रदर्शन कर रहे थे और कार्रवाई वापस लेने की मांग कर रहे थे. मामले की सुनवाई मंडलायुक्त की अदालत में हुई, जहां अंतरिम राहत मिलने के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया.

छात्रों ने मनाई खुशी

अदालत के आदेश की जानकारी मिलते ही यूनिवर्सिटी परिसर और धरनास्थल पर छात्रों में उत्साह का माहौल बन गया. देर रात छात्रों ने मिठाई बांटकर खुशी जाहिर की और शांतिपूर्वक धरना समाप्त कर दिया. छात्रों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और अब वे अगली सुनवाई का इंतजार करेंगे.

प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी

फैसले के बाद जिला प्रशासन ने एहतियात के तौर पर यूनिवर्सिटी के आसपास सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी है. परिसर के करीब दो किलोमीटर के दायरे में बैरिकेडिंग की गई है तथा अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है. फिलहाल किसी भी राजनीतिक दल के नेता या जनप्रतिनिधि को यूनिवर्सिटी परिसर की ओर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है, ताकि कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो.


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मामले ने फिर खींचा राजनीतिक ध्यान

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खान का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है. जिस मंडलायुक्त की अदालत ने ध्वस्तीकरण पर रोक लगाई है, वे पहले रामपुर के जिलाधिकारी भी रह चुके हैं. उनके कार्यकाल के दौरान आजम खान की ओर से उन पर सार्वजनिक टिप्पणियां भी की गई थीं. फिलहाल अदालत के अंतरिम आदेश से यूनिवर्सिटी प्रशासन, छात्रों और समर्थकों को राहत मिली है. अब इस पूरे मामले की अगली सुनवाई और अंतिम न्यायिक निर्णय पर सभी की निगाहें टिकी हैं.

-भारत एक्सप्रेस



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