By Election Update: देश के तीन प्रमुख राज्यों बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की तीन हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए आज (30 जुलाई 2026) सुबह 7 बजे से मतदान की प्रक्रिया जारी है. बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर सीट पर लोकतंत्र के इस पर्व को लेकर मतदाताओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है. शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के लिए चुनाव आयोग और स्थानीय प्रशासन की ओर से कड़े और चाक-चौबंद सुरक्षा इंतज़ामात किए गए हैं. संवेदनशील मतदान केंद्रों पर केंद्रीय बलों की तैनाती के साथ-साथ वेबकास्टिंग से पल-पल की निगरानी की जा रही है.
इन तीनों सीटों का अपना अलग राजनीतिक इतिहास और समीकरण रहा है. कहीं गढ़ बचाने की साख दांव पर लगी है, तो कहीं बगावत और खाली हुई विरासत को हथियाने का बड़ा घमासान छिड़ा हुआ है. आइये आपको तीनों विधानसभा सीटों का पूरा पॉलिटिकल फैक्ट-फाइल, उनके खाली होने की असल वजह, अब तक का ऐतिहासिक रिपोर्ट कार्ड और इस बार मैदान में आमने-सामने खड़े बड़े चेहरों की पूरी इनसाइड स्टोरी बताने जा रहे हैं.
1. बांकीपुर (बिहार) (Bankipur by election)
बिहार की राजधानी पटना का केंद्र मानी जाने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट राज्य की सबसे चर्चित और हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक है. बांकीपुर सीट से लगातार 5 बार के विधायक रहे वरिष्ठ भाजपा नेता नितिन नवीन के त्यागपत्र देने (और अप्रैल में राज्यसभा सांसद चुने जाने) के बाद यह सीट रिक्त हुई थी. इसके बाद चुनाव आयोग को यहाँ उपचुनाव की घोषणा करनी पड़ी.
चुनावी इतिहास
बीजेपी का मजबूत गढ़: बांकीपुर सीट को भारतीय जनता पार्टी का अभेद्य दुर्ग माना जाता है.
नितिन नवीन का दबदबा: नितिन नवीन इस सीट से लगातार 5 बार विधायक चुने जा चुके हैं.
विशाल जीत का मार्जिन: पिछले चुनावों में नितिन नवीन ने राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की प्रत्याशी रेखा गुप्ता को 50,000 से अधिक भारी-भरकम मतों के अंतर से शिकस्त दी थी.
मैदान में प्रमुख प्रत्याशी
- नीरज कुमार सिन्हा- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- रेखा गुप्ता- राष्ट्रीय जनता दल (RJD)
- प्रशांत किशोर- जन सुराज पार्टी
- तनवीर आलम- राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (RLJP)
2. दतिया (मध्य प्रदेश) (Datia by election)
मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड अंचल में स्थित दतिया विधानसभा सीट पर राजनीतिक घमासान हमेशा से बेहद आक्रामक और नाटकीय रहा है. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को धोखाधड़ी के एक मामले में कोर्ट से सजा सुनाए जाने के बाद अयोग्य ठहरा दिया गया था, जिससे दतिया सीट खाली हुई और उपचुनाव की नौबत आई.
चुनावी इतिहास
2008 से 2018 तक बीजेपी का परचम: साल 2008 से लेकर 2018 के चुनावों तक भारतीय जनता पार्टी ने इस सीट पर लगातार 3 बार जीत दर्ज की.
2018 का बेहद कड़ा मुकाबला: 2018 के विधानसभा चुनाव में यहाँ सबसे कड़ा और थ्रिलर मुकाबला देखा गया था.
2023 में बड़ा उलटफेर: 2023 के आम चुनावों में कांग्रेस उम्मीदवार राजेंद्र भारती ने भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,500 से अधिक वोटों के अंतर से हराकर बड़ा राजनीतिक उलटफेर किया था.
मैदान में प्रमुख प्रत्याशी
- आशुतोष तिवारी- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- कुंवर घनश्याम सिंह- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress)
- दामोदर सिंह यादव- आजाद समाज पार्टी (कांशीराम)
3. मांजलपुर (गुजरात) (Manjalpur by election)
गुजरात के वडोदरा जिले में स्थित मांजलपुर विधानसभा सीट पर भाजपा का वर्चस्व कई दशकों पुराना है. मांजलपुर सीट से लगातार जीतते आ रहे वयोवृद्ध भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री योगेश पटेल का 2 जून 2026 को बीमारी के चलते निधन हो गया था, जिसके बाद यह सीट खाली घोषित की गई.
चुनावी इतिहास
2008 में नए परिसीमन से अस्तित्व में आई: यह सीट परिसीमन के बाद वर्ष 2008 में नए रूप में सामने आई थी.
योगेश पटेल की हैट्रिक: मांजलपुर सीट बनने के बाद योगेश पटेल ने 2012, 2017 और 2022 में लगातार 3 बार यहाँ से बीजेपी के टिकट पर परचम फहराया.
36 साल से अजेय रिकॉर्ड: इससे पहले भी वे रावपुरा सीट से लगातार 5 बार (1990 से 2007) विधायक रहे. उन्होंने अपने 36 वर्षों के लंबे राजनीतिक करियर में लगातार 8 बार चुनाव जीतने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड कायम किया.
मैदान में प्रमुख प्रत्याशी
- सतीश पटेल- भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- भीखाभाई रबारी- भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress)
3 अगस्त को आएगा जनादेश
आज सुबह से ही बांकीपुर, दतिया और मांजलपुर के पोलिंग बूथों पर मतदाताओं का आना जारी है. जहाँ एक तरफ प्रशासनिक मुस्तैदी और चाक-चौबंद सुरक्षा के बीच लोकतंत्र का यह उत्सव चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ चुनावी मैदान में उतरे सभी उम्मीदवारों और उनके राजनीतिक आकाओं की धड़कनें बढ़ी हुई हैं.
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आज शाम वोटिंग प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही सभी प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में बंद हो जाएगी. अब पूरे देश और तीनों राज्यों की जनता को 3 अगस्त 2026 का बेसब्री से इंतजार है, जब मतगणना के बाद नतीजों की घोषणा की जाएगी और यह साफ होगा कि जनता ने किस पर भरोसा जताया है.
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