Indian States Debt Report: भारत आज वैश्विक मंच पर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शुमार है. GDP की मजबूत विकास दर और वैश्विक आर्थिक रैंकिंग में लगातार मजबूत होती भारत की स्थिति वैश्विक निवेशकों का ध्यान खींच रही है. लेकिन इस आर्थिक चमक और विकास के दावों के बीच एक कड़वी और गंभीर सच्चाई यह भी है कि देश का राजकोषीय ढांचा कर्ज के भारी बोझ तले दबा हुआ है. संसद में राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा के सवाल पर वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा 28 जुलाई 2026 को दिए गए आधिकारिक आंकड़ों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है.
आइये जानें देश के कौन से राज्य सबसे ज्यादा कर्ज में डूबे हैं, कैसे कई राज्यों का कुल कर्ज उनके सालाना बजट की सीमा को भी पार कर चुका है, चुनावी वर्षों में लोकलुभावन योजनाओं के चक्कर में कर्ज का ग्राफ कितना बढ़ा और इस वित्तीय अनिश्चितता से निपटने के लिए भारतीय संविधान में क्या प्रावधान हैं?
बजट से भी बड़ा उधारी का पहाड़ (Parliament Debt Data 2026)
भारतीय अर्थव्यवस्था पर उधारी का बोझ इस कदर बढ़ चुका है कि केवल टॉप 10 राज्यों का कुल कर्ज भारत सरकार के एक साल के पूरे बजट से भी अधिक हो गया है. देश के सभी 28 राज्यों को मिलाकर कुल बकाया कर्ज लगभग 92.73 लाख करोड़ के स्तर पर पहुंच गया है. सबसे ज्यादा कर्जदार टॉप 10 राज्यों का कुल बकाया कर्ज ही 66.28 लाख करोड़ है.
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इसके उलट वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत सरकार का कुल केंद्रीय बजट 53.47 लाख करोड़ का ही था, जिसमें केंद्र की अनुमानित वास्तविक कमाई केवल 36.5 लाख करोड़ के आसपास थी. देश का एक भी राज्य ऐसा नहीं है जिसने कर्ज न लिया हो, और न ही किसी राज्य का कर्ज पिछले वर्ष के मुकाबले कम हुआ हो.
कर्जदार टॉप 10 राज्य (State Debt Ranking)
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के आंकड़ों के अनुसार, देश के सबसे बड़े कर्जदार राज्यों की सूची में दक्षिण भारत के पांचों प्रमुख राज्य शामिल हैं.
| रैंक | राज्य | कुल बकाया (करोड़) |
| 1 | तमिलनाडु | 9,38,358 |
| 2 | महाराष्ट्र | 8,44,995 |
| 3 | उत्तर प्रदेश | 8,26,148 |
| 4 | कर्नाटक | 7,31,968 |
| 5 | पश्चिम बंगाल | 7,25,099 |
| 6 | राजस्थान | 6,30,348 |
| 7 | आंध्र प्रदेश | 5,65,534 |
| 8 | मध्य प्रदेश | 4,62,846 |
| 9 | केरल | 4,62,037 |
| 10 | तेलंगाना | 4,40,870 |
4 राज्यों में कमाई से दोगुना कर्ज (Parliament Data On State Wise Debt)
- हिमाचल प्रदेश: वर्ष 2026-27 के लिए राज्य का बजट 54,928 करोड़ है, जबकि उधारी 1,01,241 करोड़ (लगभग दोगुना) तक पहुंच चुकी है.
- पंजाब: राज्य का सालाना बजट 2.60 लाख करोड़ है, लेकिन उधारी का बोझ 3.79 लाख करोड़ का है.
- पश्चिम बंगाल: राज्य का बजट 4.38 लाख करोड़ है, जिसके मुकाबले बकाया कर्ज 7.25 लाख करोड़ पहुंच चुका है.
- बिहार: राज्य का वार्षिक बजट 3.47 लाख करोड़ है, जबकि कुल कर्ज 3.70 लाख करोड़ के स्तर पर है.
रेवड़ी कल्चर का असर
विधानसभा चुनावों से ठीक पहले लोकलुभावन घोषणाओं और बजटीय प्राथमिकताओं के कारण उधारी में भारी उछाल देखा गया.
- असम: उधारी में सबसे ज्यादा 18.63% का इजाफा हुआ और कर्ज 1.50 लाख करोड़ से बढ़कर 1.78 लाख करोड़ हो गया.
- तमिलनाडु: चुनावी वर्ष से ठीक पहले राज्य के कर्ज में 11.24% की वृद्धि हुई और यह 8.43 लाख करोड़ से बढ़कर 9.38 लाख करोड़ पहुंच गया.
- पश्चिम बंगाल: उधारी में 10.54% की बढ़ोतरी दर्ज की गई और कर्ज 6.55 लाख करोड़ से 7.25 लाख करोड़ हो गया.
- केरल: राज्य का कर्ज 11.56% बढ़कर 4.14 लाख करोड़ से 4.62 लाख करोड़ हो गया.
केंद्र की अनुमति के ले सकते हैं कर्ज? (State Debt More Than GDP)
संसद में वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 293 (3) के तहत कोई भी राज्य सरकार बिना केंद्र सरकार की पूर्व सहमति के नया कर्ज नहीं उठा सकती. यदि किसी राज्य पर केंद्र सरकार का कोई पुराना कर्ज बकाया है या केंद्र ने उस राज्य के किसी लोन पर गारंटी दे रखी है, तो केंद्र की मंजूरी अनिवार्य होती है.
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वित्तीय अनुशासन की दरकार (Debt In India)
संसद में सामने आए ये आंकड़े चेतावनी देते हैं कि यदि उधारी का इस्तेमाल बुनियादी ढांचे और संपत्ति निर्माण के बजाय केवल चालू खर्चों और लोकलुभावन योजनाओं के लिए किया गया, तो यह राज्य सरकारों के साथ-साथ देश की भावी पीढ़ियों पर ब्याज का असहनीय बोझ डाल देगा. जब तक राज्य सरकारें अपने राजस्व सृजन के साधनों को मजबूत नहीं करतीं और राजकोषीय विवेक का पालन नहीं करतीं, तब तक भारत के विकास का ढांचा इस कर्ज के दलदल में उलझा रहेगा.
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