नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति भवन में शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसमें शिक्षा, राष्ट्रीय एकता और अल्पसंख्यक सशक्तिकरण के विविध पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया गया। राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान आयोग (NCMEI) के पदासीन अध्यक्ष प्रोफ़ेसर (डॉ.) शाहिद अख्त़र ने उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन से उनके आधिकारिक निवास पर भेंट की और देश के विकास में शिक्षा की भूमिका पर सार्थक चर्चा की।
“उपराष्ट्रपति जी से मिलकर अत्यंत गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं। उनके मार्गदर्शन और विचारों ने हमें नई दिशा दी है,” – प्रोफ़ेसर शाहिद अख्त़र ने इस ऐतिहासिक मुलाक़ात के बाद अपनी भावनाएं साझा कीं।
बैठक में शिक्षा जगत और सामाजिक क्षेत्र की दो प्रमुख हस्तियों – मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. इंद्रेश कुमार तथा दीपक मौर्य की भी उपस्थिति रही। डॉ. इंद्रेश कुमार, जो पिछले दो दशकों से RSS की मुस्लिम समाज तक पहुंच अभियान के प्रमुख रहे हैं, ने इस अवसर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय पहचान को भारत की प्रगति के लिए अनिवार्य बताया।
एनसीएमईआई के सुधारों पर चर्चा
प्रोफ़ेसर शाहिद अख्त़र, जो जामिया मिल्लिया इस्लामिया में प्रोफ़ेसर भी हैं, ने बैठक में NCMEI के तहत चल रहे शैक्षिक सुधारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने विशेष रूप से अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों के पंजीकरण के लिए डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म की शुरुआत की जानकारी दी, जिससे पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता में सुधार होगा। उल्लेखनीय है कि प्रोफ़ेसर अख्त़र इससे पहले झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष एवं उर्दू भाषा संवर्धन के लिए राष्ट्रीय परिषद के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुके हैं।
सद्भाव और राष्ट्रीय एकता पर बल
डॉ. इंद्रेश कुमार ने इस बात पर ज़ोर दिया कि शैक्षिक सशक्तिकरण राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव को मज़बूत कर सकता है। उन्होंने कहा कि “गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और राष्ट्रीय पहचान” ही भारत की प्रगति की आधारशिला हैं। मुस्लिम राष्ट्रीय मंच, जो पिछले कई वर्षों से सद्भावना सप्ताह और अखिल भारतीय मुस्लिम महासम्मेलन जैसे आयोजनों के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश देता रहा है, की इस बैठक में महत्वपूर्ण भूमिका रही।
उपराष्ट्रपति का मार्गदर्शन
भारत के 15वें उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने इस बैठक में शिक्षा के क्षेत्र में सुधारों पर अपने विचार साझा किए और अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को देश की विकास योजना से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया। उपराष्ट्रपति भवन में होने वाली यह बैठक शिक्षा, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वय स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण क़दम मानी जा रही है।
बैठक के निष्कर्ष
बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने सहयोग, समावेशी शासन और निरंतर सुधार के माध्यम से भारत की शैक्षिक प्रणाली को मज़बूत करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता जताई। प्रोफ़ेसर अख्त़र ने इस अवसर पर आयोग की वार्षिक रिपोर्ट और NCMEI अधिनियम, 2004 की एक प्रति भी उपराष्ट्रपति को भेंट की।
ग़ौरतलब है कि इससे एक दिन पहले ही प्रोफ़ेसर अख्त़र ने बिहार निवास में बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) के साथ भी शैक्षिक सुधारों पर चर्चा की थी, जिससे स्पष्ट है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मूर्त रूप देने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।
—– भारत एक्सप्रेस
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