From Amritsar Village To Glasgow Podium: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल 2026 (CWG 2026) के आठवें दिन वेटलिफ्टिंग की रिंग से भारत के लिए एक बेहद गर्व की बात आई, लेकिन साथ में एक टीस भी छोड़ गई. दरअसल पुरुषों के 110 किलोग्राम भारवर्ग में भारत के स्टार वेटलिफ्टर लवप्रीत सिंह ने कुल 388 किग्रा वजन उठाकर देश की झोली में कड़क ‘सिल्वर मेडल’ डाल दिया.
हालांकि, वे न्यूजीलैंड के डेविड लिटी से महज 1 किलोग्राम के बेहद मामूली अंतर से गोल्ड मेडल से चूक गए. इस थ्रिलर मुकाबले के बाद लवप्रीत सिंह का दर्द छलक पड़ा, लेकिन उनके मुख से निकले शब्दों ने हर भारतवासी का दिल जीत लिया.
गोल्ड से चूकने पर क्या बोले लवप्रीत?(Lovepreet Singh CWG 2026 Silver Medal)
पोडियम पर देश का तिरंगा लहराने के बाद मीडिया से खास बातचीत करते हुए नौसेना के जवान लवप्रीत सिंह थोड़े भावुक दिखे. लवप्रीत ने कहा कि मुझ पर विश्वास जताने और सपोर्ट करने के लिए पूरे देश का बहुत-बहुत धन्यवाद. मेरी एक क्लीन एंड जर्क लिफ्ट मिस हो गई, वो लिफ्ट मुझे सही करनी चाहिए थी. अगर वो हो जाती तो आज रंग कुछ और होता… लेकिन भगवान जो करता है, वो अच्छा ही करता है.
कैसा रहा उनका प्रदर्शन?
बता दें कि मुकाबला इतना जबरदस्त था कि स्नैच राउंड में लवप्रीत ने 176 किग्रा वजन उठाकर न्यूजीलैंड के प्रतिद्वंद्वी पर 10 किग्रा की विशाल बढ़त बना ली थी. लवप्रीत ने स्नैच में 168, 173 और 176 किलो के तीनों प्रयास सफलता से पूरे किए. इसके बाद क्लीन एंड जर्क राउंड में उन्होंने 205 और 212 किलो का वजन आसानी से उठाया.
हालांकि, गोल्ड मेडल पक्का करने के लिए उन्होंने अपनी आखिरी लिफ्ट में सीधे 217 किग्रा उठाने की हिम्मत दिखाई, लेकिन वे थोड़ा असंतुलित हो गए. वहीं न्यूजीलैंड के डेविड लिटी ने क्लीन एंड जर्क में 223 किग्रा उठाकर महज 1 किग्रा की बढ़त से सोना अपने नाम कर लिया, जबकि इंग्लैंड के एंड्रयू ग्रिफिथ्स (356 किग्रा) को ब्रॉन्ज से संतोष करना पड़ा.
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गरीबी को पछाड़कर पोडियम तक पहुंचे लवप्रीत
लवप्रीत सिंह की इस ऐतिहासिक कामयाबी (Lovepreet Singh CWG 2026 Silver Medal) के पीछे एक लंबी और दर्दनाक तपस्या छिपी है. 6 सितंबर 1997 को पंजाब के अमृतसर जिले के छोटे से गांव ‘बाल सचंदर’ में जन्मे लवप्रीत ने साल 2010 में महज 13 साल की उम्र में गांव के अखाड़े में ट्रेनिंग शुरू की थी. परिवार की बेहद खराब आर्थिक स्थिति और सुविधाओं के अभाव के बावजूद उनके अटूट संकल्प ने उन्हें रुकने नहीं दिया.
साल 2017 में साई (SAI) पटियाला नेशनल कैंप में चयन के बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ में ब्रॉन्ज और कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में गोल्ड जीतने वाले भारतीय नौसेना के इस जांबाज ने आज गरीबी को पछाड़कर साबित कर दिया कि हौसले के आगे हर चुनौती घुटने टेक देती है.
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-भारत एक्सप्रेस
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